Tuesday 24 May 2022
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कोविंद-मीरा कुमार के मुक़ाबले में फँसे नीतीश

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नई दिल्ली — राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए द्वारा रामनाथ कोविंद को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद गुरुवार को 17 विपक्षी दलों की बैठक के बाद पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को संयुक्त उम्मीदवार बनाने का ऐलान किया है।

राष्ट्रपति चुनाव को लेकर गुरुवार को कांग्रेस की अगुवाई में 17 विपक्षी दलों की बैठक से पहले एनसीपी प्रमुख शरद पवार के घर घर कांग्रेस नेताओं की बैठक की। इस बैठक में कांग्रेस की ओर से सोनिया के अलावा पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद, जैसे नेता मौजूद थे। सीपीआई से डी राजा, एआईयूडीएफ से बदरुद्दीन अजमल, केरल कांग्रेस के जोस के मनी, जेएमएम, आरजेडी से लालू यादव, डीएमके से कनिमाई, नेशनल कॉन्फ्रेंस, एनसीपी से शरद पवार और तारिक अनवर, और आरएसपी से एनके प्रेमचंद्रन और समाजवादी पार्टी से राम गोपाल यादव, माकपा से सीता राम येचुरी, टीएमसी डेरेक ऑ ब्रॉयन, बसपा से सतीश मिश्रा आदि नेता पहुंचे।

इससे पहले राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर दस जनपथ जाकर मुलाकात की और बैठक की अंतिम रणनीति को लेकर चर्चा की।

मीरा कुमार के नाम की घोषणा विपक्षी दलों का नेतृत्व कर रही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने की। राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार के चयन के लिए गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 17 विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक की। बैठक के बाद सोनिया गांधी ने कहा, “हम विपक्ष से अपील करते हैं कि वो मीरा कुमार का समर्थन करें।”

आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव में कहा, “मोदी सरकार अहंकार में चूर है। आम सहमति के नाम पर केवल नाटक हुआ। हमारी पार्टी के भी राष्ट्रपति चुनाव में वोट पड़ेंगे लेकिन बात तक नहीं की। सीबीआई और ईडी को हमारे पीछे लगाकर परेशान करने का तरीका ढूंढा जा रहा है।”

वहीं लालूू ने नीतीश को लेकर कहा कि उन्होंने नीतीश कुमार से बात की है। वे अपने निर्णय के बारे में पुर्नविचार करें, जो उनका व्यक्तिगत निर्णय है।

मीरा कुमार कांग्रेस की वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी का बड़ा दलित चेहरा हैं। यही वजह है कि कांग्रेस ने उन्हें उम्मीदवार बनाया है जिससे विपक्ष से झटक कर एनडीए के पक्ष में जाने वाले नीतीश कुमार को फिर से एक बार उनके नाम पर विचार करने पर विवश किया जा सके क्योंकि मीरा कुमार सासाराम से दो बार सांसद रह चुकी हैं।

पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार पिछली लोकसभा की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उनके उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा पहले से ही थी। राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष की तरफ़ से उम्मीदवार के लिए मीरा कुमार के अलावा सुशील कुमार शिंदे, गोपाल कृष्ण गांधी और प्रकाश आंबेडकर के नाम की चर्चा थी। विपक्ष की बैठक में से पहले सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा था कि वामपंथी गोपाल कृष्ण गांधी को उम्मीदवार के तौर पर देखना चाहते हैं।

मीरा कुमार कांग्रेस महासचिव और कांग्रेस कार्यसमिति की सदस्य भी रह चुकी हैं। वर्ष 1945 में पटना में जन्मीं और दिल्ली के इंद्रप्रस्थ कॉलेज व मिरांडा हाउस से शिक्षा ग्रहण करने वाली मीरा कुमार क़ानून में स्नातक और अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर हैं। वर्ष 1973 में वह भारतीय विदेश सेवा (आएफएस) के लिए चुनी गईं। इसके बाद स्पेन, ब्रिटेन और मॉरीशस में उच्चायुक्त रहीं लेकिन अफसरशाही उन्हें रास नहीं आई और उन्होंने राजनीति में कदम बढ़ाने का फ़ैसला किया।

मीरा कुमार ने अपना राजनैतिक सफ़र उत्तर प्रदेश से शुरू किया। वर्ष 1985 में बिजनौर लोकसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव में उन्होंने यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और कद्दावर दलित नेता रामविलास पासवान को पराजित कर पहली बार संसद में क़दम रखा। हालांकि इसके बाद हुए चुनाव में वह बिजनौर से पराजित हुईं। इसके बाद उन्होंने अपना क्षेत्र बदला और 11 वीं तथा 12वीं लोकसभा के चुनाव में वह दिल्ली के करोलबाग संसदीय क्षेत्र से विजयी होकर फिर संसद पहुंचीं।

इसके बाद बिहार के सासाराम संसदीय क्षेत्र में 1998 और 1999 के चुनावों में बीजेपी के मुनिलाल ने उन्हें पराजित कर दिया। लेकिन 2004 के लोकसभा चुनाव में पासा पलट गया, मीरा कुमार ने मुनिलाल को 2,58,262 मतों से हरा दिया। उस समय इन्हें पहली बार केन्द्र में मंत्री पद भी प्राप्त हुआ और सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया।

रामनाथ कोविंद को एनडीए के साथ-साथ कई विपक्षी दलों ने समर्थन का ऐलान किया है। विपक्षी एकता को उस समय बड़ा झटका लगा था जब जेडीयू ने बुधवार को कोविंद के समर्थन का ऐलान कर दिया। जेडीयू के अलावा टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस, बीजू जनता दल और एआईएडीएमके जैसे कई गैर-एनडीए दल भी कोविंद के समर्थन का ऐलान कर चुके हैं।

मीरा कुमार का समर्थन करेगी बसपा

लखनऊ — बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने गुरुवार को राष्ट्रपति पद के चुनाव में विपक्षी दलों की ओर से घोषित उम्मीदवार मीरा कुमार के समर्थन की घोषणा की है। इससे पहले मायावती ने एनडीए प्रत्याशी रामनाथ कोविंद के प्रति सकारात्मक रुख़ अपनाया था।

मायावती ने गुरुवार को कहा कि एनडीए ने रामनाथ कोविंद का नाम प्रतिपक्षी पार्टियों से बिना कोई सलाह-मश्विरा किये हुये ही एकतरफ़ा तौर पर घोषित किया था, लेकिन इसके बावजूद बसपा ने दलित होने के कारण उनके प्रति सकारात्मक रुख़ अपनाया था। मायावती ने अपने पूर्व बयान का हवाला देते हुए कहा कि लेकिन तब भी मैने यही कहा था कि रामनाथ कोविंद पर हमारा सकारात्मक रुख़ है, बशर्ते विपक्ष से दलित वर्ग का इनसे अधिक लोकप्रिय व योग्य उम्मीदवार चुनाव के मैदान में नहीं उतरता है।

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही मैने यह भी कहा था कि कोविंद शुरु से ही अधिकांश भाजपा और आरएसएस की संकीर्ण विचारधारा से ही जुड़े हुये रहे हैं। इसलिए इनकी इस राजनैतिक पृष्ठभूमि से मैं क़तई भी सहमत नहीं हूं। मायावती ने कहा कि आज यूपीए व अन्य विपक्षी दलों की नई दिल्ली में आयोजित बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चन्द्र मिश्र शामिल हुए थे जिसमें विपक्षी दलों ने एक साथ मिलकर दलित वर्ग से ताल्लुक रखने वाली लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार को सर्वसम्मति से अपना उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया है।

बसपा सुप्रीमों ने कहा कि इसलिए अब नई परिस्थिति में दोनों उम्मीदवारों की विशेषताओं की तुलना करने पर यह स्पष्ट है कि मीरा कुमार भाजपा व एनडीए के उम्मीदवार से ज्यादा लोकप्रिय व क़ाबिल भी हैं। इस कारण हमारी पार्टी उनको राष्ट्रपति पद के लिये अपना समर्थन घोषित करती है।

नीतीश की दुविधा

नई दिल्ली — आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव बिहार में गठबंधन की सरकार बनने के बाद पहली बार मुख्यमंत्री नीतीश के ख़िलाफ़ खुलकर सामने आए हैं। लालू प्रसाद यादव ने विपक्षी दलों की बैठक कहा कि विपक्ष ने सब ने मिलकर मीरा कुमार को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुना है। मीरा कुमार एक अनुभवी नेता हैं। लोकसभा अध्यक्ष के रूप में भी उनका कार्यकाल बहुत शानदार रहा। जगजीवन राम की बेटी हैं। इसलिए नीतीश कुमार को उनका समर्थन करना चाहिए।

लालू यादव ने कहा, “नीतीश कुमार को भी अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए, क्योंकि विचारधारा की लड़ाई बड़ी है। मैं भी उनसे बात करूंगा कि वह अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार करें। लालू ने साफ कहा कि कोविंद को समर्थन देना नीतीश की ऐतिहासिक भूल होगी।”

लालू यादव ने कहा, “हम फ़ास‍िस्ट ताक़तों को दूर करने के लिए हम इकट्ठा हुए थे। मीरा कुमार बिहार की बेटी, दलितों के महान नेता जगजीवन राम की बेटी हैं। अगर कांग्रेस कहती तो भी हम भाजपा के प्रत्याशी का समर्थन नहीं करते। नीतीश कुमार ने इस बारे में हमसे राय लेने की जरूरत नहीं समझी। यह किसी व्यक्ति के अच्छे या बुरे होने की बात नहीं है। हम व्यक्ति के सुंदरता की बात नहीं करते, आइडियोलॉजी की बात करते हैं।”

लालू ने कहा कि हमको लड़ाई लड़नी है विचारधारा की। इसलिए नीतीश कुमार भी इस पर पुनर्विचार करके मीरा कुमार को समर्थन करेंगे। ऐसा उम्मीद करता हूं। हालांकि नीतीश कुमार ने पहले कहा था कि वह विपक्ष के उम्मीदवार के समर्थन में हैं, बाद में रामनाथ कोविंद के नाम पर उन्होंने समर्थन दिया लेकिन हमारी अपील यही है कि तमाम विपक्षी पार्टियां एकजुट हो।
इसके साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा, “मैं सभी सेकुलर दलों से अपील करती हूं कि वे हमें सपोर्ट करें। मीरा कुमार को बसपा ने समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। आम आदमी पार्टी भी उनका समर्थन कर सकती है।”

जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा, “सब कुछ ध्यान में रखते हुए रामनाथ कोविंद का समर्थन करने का फ़ैसला लिया है। राजनीतिक फ़ैसले मिनट और सेकंड में नहीं बदलते।”

मीरा कुमार कांग्रेस की वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी का बड़ा दलित चेहरा हैं। यही वजह है कि कांग्रेस ने उन्हें उम्मीदवार बनाया है जिससे विपक्ष से झटक कर एनडीए के पक्ष में जाने वाले नीतीश कुमार को फिर से एक बार उनके नाम पर विचार करने पर विवश किया जा सके, क्योंकि मीरा कुमार बिहार के सासाराम से दो बार सांसद रह चुकी हैं जिनके ख़िलाफ़ बिहार के मुख्यमंत्री का खड़ा होना नीतीश कुमार को अटपटा लग सकता है।

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