Saturday 16 January 2021
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मुसलमान भीड़ के उपद्रव से बिहार के गाँव में छठ पूजा में विघ्न

महिला ने बताया कि हिन्दुओं के साथ जबरदस्ती होती है, उनके साथ मारपीट होती है और उन्हें चारों तरफ से दबा कर रखा जाता है

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Crime मुसलमान भीड़ के उपद्रव से बिहार के गाँव में छठ पूजा में...

बिहार में छठ महापर्व का समापन हो गया है, परंतु कटिहार जिला के कोढ़ा प्रखंड के रतौरा थाना क्षेत्र अंतर्गत हथियादियरा स्थित दिघरि पंचायत के चामापारा गाँव के लोगों को संध्या अर्घ्य के दौरान मुसलमान समुदाय पर छठ पूजा में घाट पर आकर विघ्न डालने का आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने एक वीडियो के ज़रिए मुसलमानों की भीड़ पर छठ पूजा न करने देने और व्यवस्था को तहस-नहस कर देने के आरोप लगते हुए उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद से भी हस्तक्षेप की मांग की है।

तीन दिन पहले यानी 20 नवंबर की शाम संध्याकालीन अर्घ्‍य देने के समय आतिशबाजी करने को लेकर दो पक्षों के बीच उत्पन्न विवाद से स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। एक पक्ष के शरारती तत्वों ने छठ घाट पर तोड़-फोड़ और उपद्रव मचाया था। स्थिति तनावपूर्ण देख वरीय अधिकारियों के निर्देश पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी और छठ व्रतियों ने पुलिस की उपस्थिति में ही पूजा अर्चना की थी।

इधर छठ के बाद एक पक्ष के लोग अभी भी सहमे हुए हैं। प्राथमिकी दर्ज करने में हुई देरी को लेकर भी पीड़ित पक्ष के लोग लगातार सवाल उठाते रहे हैं। फ़िलहाल उपमुख्यमंत्री के संज्ञान लेने के बाद इस केस में प्राथमिकी दर्ज हो गई है।

संध्या अर्घ्य के दौरान पटाखों से निकली चिंगारी घाट के समीप खड़े एक बच्चे को लग गई थी। मामूली बात पर दूसरे पक्ष के 20-25 लोग लाठी-डंडे व धारदार हथियार से लैस होकर छठ घाट को क्षतिग्रस्त कर दिया था। ग्रामीण मंजू देवी, मानो देवी, ममता देवी, विकास कुमार, संजय उरांव, सुरेंद्र कुमार आदि ने बताया कि पर्व-त्‍योहार एवं शादी विवाह के अवसर पर मुसलमानों द्वारा अक्सर बाधा उत्पन्न की जाती है। पुलिस में शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी जाती है। एसडीपीओ अमरकांत झा ने कहा कि इस संबंध में पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्यवाही में जुट गई है।

सूत्रों का कहना है कि मुसलमानों की इस कारस्तानी में स्थानीय मौलाना के दामाद का हाथ है। अपुष्ट दावों के अनुसार इस क्षेत्र में केवल 30 परिवार हिंदुओं के हैं जबकि 30,000 मुसलमान परिवार हैं।

एक महिला ने बताया कि घाट पर जब श्रद्धालु वहाँ अर्घ्य देने गए तो पटाखा उड़ाने को लेकर मुसलमान समाज के लोगों से विवाद हुआ। महिला ने बताया कि वहाँ ‘काफ़ी सारे मुसलमान समाज के लोग’ थे और शाम को अर्घ्य देने के बाद वो लोग जैसे ही घर लौटे, तभी वहाँ पर केले के सारे थम उखाड़ डाले गए और मुसलमान समाज के लोगों ने वहाँ मल-मूत्र त्याग कर दिया। साथ ही सजावट को तबाह कर देने और गुब्बारों को फोड़ देने के भी आरोप लगाए।

कई वीडियोज़ में हिन्दू कार्यकर्ता न्याय के लिए नारेबाज़ी करते हुए भी दिख रहे हैं। साथ ही पुलिस की गाड़ी के पास जनता मौजूद दिख रही है। घाट पर तहस-नहस स्थिति में चीज़ें भी दिख रही हैं, जिनसे महिलाएँ बहुत आक्रोशित हैं। एक महिला ने बताया कि वहाँ मुसलमान समाज के लोग इतनी संख्या में जमा हो गए थे जितने पर्व मनाने के लिए हिन्दू भी नहीं जाते हैं। महिला ने बताया कि हिन्दुओं के साथ ज़बरदस्ती होती है, उनके साथ मारपीट होती है और उन्हें चारों तरफ से दबा कर रखा जाता है।

महिला ने बताया कि जब तक ग्रामीणों ने थाने पहुँच कर हंगामा नहीं किया, तब तक पुलिसकर्मी नींद से नहीं जागे। उन्होंने बताया कि मुसलमान समाज के लोग सोचते हैं कि हिन्दू संख्या में कम हैं, इसीलिए मारपीट कर भगा देंगे। साथ ही यह भी कहा कि जमीन-जायदाद के झगड़े भी वे हिन्दू समाज के लोगों के साथ करते रहते हैं। उसने बताया कि मुसलमान समाज के लोग बोलते हैं कि ‘मुसलमान इलाक़ा बनाएंगे, हिन्दुओं को यहाँ रहने नहीं देंगे और उनकी ज़मीनें हड़प के उन्हें भगा देंगे’।

पीड़ित देवनारायण उराँव को उद्धृत करते हुए OpIndia हिन्दी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि “हम जैसे ही वहाँ पहुँचे, मुसलमान समाज के लोग हमें परेशान करने लगे। वो लोग कह रहे थे कि अगर तुम छठ करने गए तो तुम्हें घाट पर से फेंक दूंगा। इसके बाद हम लोग किसी तरह पूजा-पाठ निपटाने के बाद वापस घर आ गए। अभी हमें घर पहुँचे आधे घंटे भी नहीं हुए थे कि सारी सजावट नोच डाली गई थी। धमकियों के बाद हमारे बच्चे घाट देखने गए थे कि सब सुरक्षित है या नहीं। उन्होंने देखा कि हमारे लगाए हजार गुब्बारों में से एक भी नहीं बचा है। मुझे जैसे ही इसकी सूचना बच्चों ने दी, मैंने अन्य ग्रामीणों को बताया। इसके बाद मैं सारे ग्रामीणों के साथ थाना गया। वहाँ हमें ही शांतिपूर्वक बैठने को कहा जाने लगा। हमने पूछा कि क्या हम थाना प्रभारी से बात करने में सक्षम नहीं? तत्पश्चात रतौरा थानाध्यक्ष को हमने सारी बात बताई।”

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