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Thursday 2 July 2020

कन्हैया कुमार भाकपा में शामिल; कई वरिष्ठ वामपंथी नाराज

कन्हैया कुमार जैसे छात्र नेता को राष्ट्रीय परिषद जैसी सर्वोच्च निर्णायक संस्था में जगह देने और वरिष्ठ वामपंथी नेताओं को नजरअंदाज करने के चलते पार्टी कैडर में असंतोष फैल रहा है

नई दिल्ली | जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ छात्र एवं ए आइ एस एफ़ के नेता कन्हैया कुमार सक्रिय राजनीति में शामिल हो गए हैं। कन्हैया कुुमार बाकायदा वामपंथी राजनैतिक दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) में शामिल हो गए हैं और इन्हें भाकपा ने अपनी राष्ट्रीय परिषद में जगह दी है। कन्हैया कुमार सीपीआई की 126 सदस्यीय राष्ट्रीय परिषद में सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं।

सीपीआई की राष्ट्रीय परिषद पार्टी के नीति व कार्यक्रम संबंधी निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था होती है। कन्हैया कुमार का नाम जेएनयू में हुए एक घटनाक्रम से सुर्खियों में आया था। तब कन्हैया कुमार की मौजूदगी में ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ के नारे लगे थे जिसके बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई थी।

भाकपा (सीपीआई) की 23वीं पार्टी कांग्रेस में राष्ट्रीय परिषद्, सचिवालय टीम, संगठन नियंत्रण आयोग सहित कई अहम पदों के लिए चुनाव हुए। इस महाधिवेशन के दौरान सुधाकर रेड्डी तीसरी बार पार्टी संगठन के सर्वोच्च पद, महासचिव के लिए चुने गए। 76 वर्षीय रेड्डी दो बार लोकसभा सांसद रह चुके है। वे 2012 में पहली बार पार्टी महासचिव चुने गए थे, उसके बाद से वे ही लगातार महासचिव पद पर बने हुए हैं।

पार्टी कांग्रेस के दौरान राष्ट्रीय परिषद् के लिए 126 सदस्यों का चयन हुआ। वहीं पार्टी सचिवालय के लिए 11 सदस्य नियुक्त किए गए। पार्टी ने 11 सदस्यों को नियंत्रण आयोग के लिए चुना, वहीं 13 उम्मीदवार सदस्यों का भी निर्वाचन हुआ।

सीपीआई की 23वीं पार्टी कांग्रेस में आह्वान किया कि पार्टी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से मुकाबला करने के लिए मोर्चा खोलेगी और सभी समान विचारधारा वाले दलों से गठबंधन करेगी। सीपीआई की पार्टी कांग्रेस में कहा गया कि पार्टी का लक्ष्य अब बीजेपी-आरएसएस को रोकना है।

आपसी फूट

सीपीआई की 23वीं पार्टी कांग्रेस में लगातार हार से जूझ रहे वामपंथी दल में आपसी फूट उभरकर सामने आई। कई वामपंथी वरिष्ठ नेता 25 अप्रैल से शुरू हुई 23वीं पार्टी कांग्रेस में हुए फैसलों से नाराज दिखे। इस बार पार्टी कांग्रेस में जेएनयू के छात्र नेता कन्हैया कुमार को भी राष्ट्रीय परिषद में सदस्य के रूप में शामिल कर लिया है। वहीं कई वरिष्ठ वामपंथी नेताओं को पार्टी संगठन में जगह नहीं दी गई है।

कन्हैया कुमार जैसे छात्र नेता को राष्ट्रीय परिषद जैसी सर्वोच्च निर्णायक संस्था में जगह देने और वरिष्ठ वामपंथी नेताओं को नजरअंदाज करने के चलते पार्टी कैडर में असंतोष फैल रहा है। पार्टी में सी. दिनाकरन जैसे वरिष्ठ नेता तक को नजरअंदाज कर दिया गया । उन्हें केरल से चुने गए 15 सदस्यों में भी शामिल नहीं किया गया, जबकि कन्हैया कुमार 126 सदस्यों वाली राष्ट्रीय परिषद में शामिल किए गए।

इतना ही नहीं पार्टी सचिव कनम राजेंद्रन और के.ई. इस्माइल के बीच हो रही खींचातानी भी सामने आई। राष्ट्रीय परिषद में छह सदस्य राजेंद्रन गुट के माने जा रहे हैं, जिसके चलते दूसरे गुट में असंतोष फैल गया है। पार्टी कांग्रेस के दौरान राष्ट्रीय परिषद के लिए 126 सदस्यों का चयन हुआ, वहीं पार्टी सचिवालय के लिए 11 सदस्य नियुक्त किए गए।

पार्टी ने 11 सदस्यों को नियंत्रण आयोग के लिए चुना, वहीं 13 उम्मीदवार सदस्यों का भी निर्वाचन हुआ। सीपीआई की 23वीं पार्टी कांग्रेस में आह्वान किया कि पार्टी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से मुकाबला करने के लिए मोर्चा खोलेगी और सभी समान विचारधारा वाले दलों से गठबंधन करेगी। सीपीआई की पार्टी कांग्रेस में कहा गया कि पार्टी का लक्ष्य अब बीजेपी-आरएसएस को रोकना है।

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