कर्नाटक में मिला भाजपा को आईटी विशेषज्ञों का साथ

जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब कर्नाटक को 73,000 करोड़ रुपए मिलते थे । अब जबकि केंद्र में भाजपा की सरकार बनी तो 2,00,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि मिलना इस राज्‍य के लिए तय हुआ, जिसकी कई किश्‍ते समय-समय पर कर्नाटक को अब तक मिल चुकी हैं

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बेंगलुरु— वर्ष 2014 हम सभी को याद है कि लोकसभा चुनावों के पहले आईटी प्रोफेशनल्‍स का किस तरह से नरेंद्र मोदी को साथ मिला और सभी ने देश में कांग्रेस को सत्‍ता न सौंपकर उस समय जो माहौल देश व दुनियाभर में बनाया, उससे भाजपा को केंद्र की सत्‍ता पर काबिज होने में काफी अधिक सहयोग मिला था। इन चुनावों में भाजपा ने अकेले के दम पर 282 का आंकड़ा पार कर लिया था जबकि कांगेस सिर्फ 44 पर सिमटकर रह गई थी, इसी के साथ कर्नाटक प्रदेश की जो तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है वह जनता दल (सेक्युलर) सिर्फ अपने 2 उम्‍मीदवारों को ही संसद तक पहुंचाने में कामयाब हो सकी थी। इस दौरान इतिहास रचते हुए नरेंद्र मोदी ने केन्द्र में तिहरे शतक के साथ सरकार बनाई और 1984 के बाद के 30 वर्षों में भाजपा ऐसी पहली पार्टी बनी थी जिसने अपने दम पर बहुमत हासिल किया था। इस बार के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भी कुछ ऐसा ही नजारा शुरू हो गया है।

कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी को पहली पंसद के रूप में और कांग्रेस को पुन: सत्‍ता न सौपने के पीछे आईटी में कार्य करनेवाले प्रोफेशनल्‍स के अपना बहुत तार्किक पक्ष है। इनमें अधिकांश आईटी कंपनियों में कार्यरत सामान्‍य से लेकर सीईओ रेंक के कर्मचारी-अधिकारियों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले 4 वर्षों के दौरान केंद्र में रहते हुए बहुत अच्‍छा कार्य किया है और अभी भी वे अच्‍छा कर रहे हैं। इनका कहना है कांग्रेस की लगातार मनमोहन गर्वमेंट जो 10 सालों में और उसके पीछे रही कांग्रेस की सरकार बीते 60 वर्षों में जो कार्य नहीं कर पाई, उस तुलना में सबसे तेज गति से मोदी सत्‍ता आने के बाद दिखाई दिया है यदि ऐसे में कर्नाटक राज्‍य में भी भाजपा की सरकार बनेगी तो इस प्रदेश को बहुत अधिक आर्थ‍िक और अधोसंरचना संबंधी लाभ पहुँचेगा।

इस संबंध में एक दिग्‍गज आईटी कंपनी में पार्टनर मैनेजर विभा शर्मा कहती हैं कि हम पिछले 2 सालों से बेंगलुरु में रह रहे हैं | इन सालों में हमने अपने साथियों की बातों से जो जाना और अनुभव किया उसके अनुसार सिद्धारमैया की सरकार के पहले के समय में भले ही भाजपा ने अपने मुख्‍यमंत्री जल्‍दी-जल्‍दी बदले हों और बीएस यड्डियुरप्‍पा पर भ्रष्‍टाचार के आरोप लगने के कारण सत्‍ता से वे बाहर हुए लेकिन इसके बाद भी भाजपा की अंतर्कलह का कर्नाटक के विकास पर कोई असर नहीं हुआ था, लेकिन अब वह विकास की तेजी यहां दिखाई नहीं देती है।

वहीं अन्‍य आईटी कंपनी में कार्यरत प्रोजेक्‍ट मैनेजर मयंक त्रिवेदी ने कहा कि कानून-व्यवस्था राज्‍य की चरमराई हुई है। आमजन को छोड़ि‍ए यहां पत्रकारों के भी दिन दहाड़े मर्डर हो जाते हैं और पुलिस उन्‍हें खोज भी नहीं पाती है। देश में क्राइम मामले में अभी तक बिहार, यूपी बदनाम थे लेकिन बीते पांच सालों में कर्नाटक का नाम भी बहुत तेजी से क्राइम में ऊपर आया है। बेंगलूरु भी अब अकेले देर रात आने-जाने में महफूज नहीं रहा। त्रिवेदी यह भी कहते हैं कि केंद्र में भाजपा सरकार होने व राज्‍य में भी भाजपा सरकार के होने से यहां विकास ओर तेज गति से आगे बढ़ेगा । वैसे भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विश्‍व के कई देशों में उनकी नीतियों के कारण इन दिनों बहुत पसंद किया जा रहा है, यदि येड्डियुरप्‍पा सरकार बनती है तो विदेशी निवेश बहुत अधिक बढ़ने की संभावना है।

एक आईटी कंपनी को चला रहे अभय गोयनका का कहना है कि सिद्धारमैया सरकार में कर्नाटक भ्रष्टाचार में कोई कमी नहीं आई, जैसा कि यह वादा करके सत्‍ता में आए थे इसे कम करने का। राज्‍य में सुनते हैं किसानों की आत्‍महत्‍या का आंकड़ा 3500 को पार कर चुका है। ईमानदार अधिकारियों के लगातार ट्रांसफर किए गए, कई की रहस्यमय मौत होने के मामले भी प्रकाश में आए | इस तरह से देखें तो कुल मिलाकर कानून-व्यवस्था का पतन यहां सीधेतौर पर दिखाई देता है। ऐसे में सरकार परिवर्तन की बहुत जरूरत है। ऐसा ही कुछ मत आईटी एक्‍सपर्ट प्रवीण कोना और अभिषेक शर्मा ने भी व्‍यक्‍त किए हैं।

कर्नाटक में 7 लाख घर अभी भी ऐसे हैं जहां राज्‍य सरकार अभी तक रोशनी नहीं पहुंचा पाई है। पिछली केंद्र की कांग्रेस सरकार से जहां 73 हजार करोड़ रुपये राज्‍य सरकार को मिले थे, उस तुलना में केंद्र की मोदी सरकार ने कर्नाटक के विकास के लिए 2 लाख करोड़ से ज्यादा की राशि देने का प्‍लान बनाया और इसकी बहुत बड़ी किश्‍त राज्‍य सरकार को मिली भी है। केंद्र के प्रयासों से कर्नाटक अब तक विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में दूसरे स्थान पर है। अप्रैल 2016 से सितंबर 2017 की अवधि के दौरान राज्य ने 44,720 करोड़ रुपये के विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) को आकर्षित किया गया। केंद्र की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जहां 950 किलोमीटर नेशनल हाईवे का निर्माण कर्नाटक में हुआ था | वहीं मोदी सरकार के समय में 3.5 सालों में 1,600 किलोमीटर नेशनल हाईवे का निर्माण हो चुका है।

किसान आत्‍महत्‍याओं में भी यह राज्‍य पिछले पांच सालों से चर्चा में बना हुआ है। कांग्रेस सरकार में 3715 किसान आत्‍महत्‍या कर चुके हैं। वहीं कर्नाटक के लिए अबतक 3,37,000 घरों को स्वीकृति केंद्र से दी गई, इसमें से सिर्फ 38,000 घरों का निर्माण ही सिद्धारमैया सरकार पूरा कर पाई है । करीब 2 लाख घरों का काम तो अभी तक शुरू भी नहीं हो पाया है और बाकि में काम-आधे अधूरे हैं । जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब कर्नाटक को 73,000 करोड़ रुपए मिलते थे । अब जबकि केंद्र में भाजपा की सरकार बनी तो 2,00,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि मिलना इस राज्‍य के लिए तय हुआ, जिसकी कई किश्‍ते समय-समय पर कर्नाटक को अब तक मिल चुकी हैं।

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