हिन्दी में भारतीय विज्ञान का पाठ नासा के प्रकल्प में

प्रोजेक्ट के मुख्य अन्वेषक आलोक कुमार ने बताया कि ‘हम दिलचस्प और समृद्ध संदर्भ प्रदान करते हैं ताकि शिक्षार्थी हिन्दी के अध्ययन में उन्नत स्तर को प्राप्त करे’

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वाशिंगटन, डीसी | अमेरिका में नासा द्वारा वित्त पोषित एक कार्यक्रम के अंतर्गत भारत-स्थित प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थलों और संस्थानों के बारे में वीडियो की एक श्रृंखला का निर्माण किया है। कार्यक्रम में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के पाठ हिन्दी में पढ़ाए जायेंगे जिससे भाषा का प्रचार और विस्तार दुनिया भर में हो।

ये वीडियो जयपुर के आमेर किला महल और हवा महल, दिल्ली के जंग-रोधी लौह स्तंभ, यूनेस्को की विरासत स्थल कुतुब मीनार, मशहूर जयपुर फुट के मुख्यालय और चांद बावरी, इत्यादि पर ध्यान केंद्रित करते हैं। बता दें कि जयपुर फुट संस्था दुनिया भर में 80 देशों में ग़रीब दिव्यांगों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें कृत्रिम हाथ-पैर मुफ़्त प्रदान करती है।

नासा द्वारा वित्त पोषित कार्यक्रम STARTALK ने परियोजना के निदेशक वेद चौधरी को 90,000 डॉलर का अनुदान दिया है। नासा के STARTALK का मानना है कि अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हिन्दी, अरबी, चीनी और अन्य कई विश्व भाषाओं का ज्ञान आवश्यक है।

कार्यक्रम को चौधरी की न्यू जर्सी-स्थित फाउंडेशन एजुकटर्स सोसायटी फॉर हेरिटेज अफ़ इंडिया से भी वित्तीय सहायता मिलती है। कार्यक्रम मैरीलैंड विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय विदेशी भाषा केंद्र द्वारा प्रशासित किया जाता है।

“यह एक अनूठा अनुभव था। मुझे कभी नहीं पता था कि मुझे शोध करने में इतना मज़ा आने वाला है,” प्रोजेक्ट के मुख्य अन्वेषक आलोक कुमार ने कहा। अनुसंधान अध्ययनों के हवाले से कुमार ने कहा कि नई भाषाओं को सीखने में संदर्भ महत्वपूर्ण है। कॉलेज के माध्यम से मध्य विद्यालय के शिक्षार्थियों के लिए डिज़ाइन किए गए प्रत्येक वीडियो में एक STEM (science/विज्ञान, technology/प्रौद्योगिकी, engineering/इंजीनियरिंग और mathematics/गणित) के परिप्रेक्ष्य का उपयोग होता है। इस परिप्रेक्ष्य के द्वारा हम ऐसे दिलचस्प और अविश्वसनीय रूप से समृद्ध संदर्भ प्रदान करते हैं ताकि शिक्षार्थी हिन्दी के अध्ययन में उन्नत स्तर को प्राप्त करे।”

स्टेट यूनिवर्सिटी अफ़ न्यूयॉर्क में भौतिकी के प्रोफ़ेसर कुमार ने प्राचीन हिंदू विज्ञान, गणित और चिकित्सा पर कई किताबें प्रकाशित की हैं। “मैंने कई विदग्ध व्यक्तित्वों से मुलाक़ात की जिन्होंने मेरे जीवन पर गहरा प्रभाव डाला है,” उन्होंने कहा। मैरीलैंड विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा कि कुमार द्वारा चुने गए स्थलों में विज्ञान-आधारित प्रयोगों का विस्तार किया जाता है।

कुमार ने बताया कि 1799 में कोई एयर कंडीशनिंग नहीं होने के कारण एक हिंदू वास्तुकार ने छत्ते के पैटर्न वाला हवा महल डिजाइन किया था जिसमें भौतिकी के ‘वेंचुरी प्रभाव’ को उपयोग में लाया गया था। इस विज्ञानं को समझाते हुए कुमार ने कहा कि हवा महल में हवा इमारत की संकीर्ण गलियारों में प्रवेश करती है जिससे प्रवाह की गति बढ़ जाती है और प्राकृतिक तरीके से शीतलता प्रदान करती है।

सन 402 ई० में निर्मित दिल्ली का लगभग 24 फुट ऊंचा लोहे का स्तंभ हिंदू धातु वैज्ञानिकों के कौशल का एक प्रमाण है। उन्होंने फॉस्फोरस से भरपूर लोहे को संसाधित किया जो एक समान सुरक्षात्मक परत बनाता है जिससे सदियों से लोहा जंग-रोधक बना हुआ है। मानसून और चिलचिलाती गर्मी का इसपर कोई असर नहीं होता। ऐसे कई उदाहरण देते हुए विश्वविद्यालय के बयान में कहा गया है कि इस तरह के पाठ अब हिन्दी में पढ़ाए जाएंगे। इसी प्रकार चीन में स्थित पुरातत्व की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण स्थलों की जानकारी मैन्डरिन में दी जाएगी; उमर ख़य्याम की वैज्ञानिक सोच के बारे में फ़ारसी में पाठ पढ़ाए जायेंगे, आदि।