भारतीय संगीत हमेशा जिंदा रहेगा —राम शंकर

बदलाव तो प्रकृति का नियम है, लेकिन हमारा भारतीय संगीत हमेशा जिंदा रहेगा और लोगों को पसंद आएगा

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भारतीय संगीत

‘यारों सब दुआ करो’ से लेकर फिल्म बॉम्बे का गाना ‘कहना ही क्या..’ सहित कई फिल्मों में अपनी आवाज का जादू बिखेर चुके मशहूर गायक राम शंकर जी बीते दिनों भोपाल प्रवास पर आए। हिन्दुस्थान समाचार संवाददाता नेहा पांडेय से बातचीत के दौरान राम शंकर जी ने बताया कि अब तक उन्होंने कई गजलें, कव्वाली, गीत, माता की भेंट, साई भजन को अपनी मधुर आवाज दी है। अब तक इनकी 100 से ज्यादा एलबम रिलीज हो चुकी है। पेश हैं उनसे हुई।

बातचीत के कुछ अंश:
सवाल: आपको भोपाल आना कैसा लगता है और यहां की कौन सी बात अच्छी लगती है?
जवाब: भोपाल बहुत ही खूबसूरत शहर है। यहां जितनी बार भी आओ, हर बार अच्छा लगता है। संगीत नाटक अकादमी के कार्यक्रम के सिलसिले में आना लगा रहता है। इसलिए भोपाल से एक अलग सा रिश्ता जुड़ गया है। भोपाल की एक अच्छी बात ये है कि यहां संगीत को सुनने और समझने वाले दोनों ही तरह के लोग हैं और एक कलाकार को इससे ज्यादा और कुछ नहीं चाहिए। इसलिए यहां आने और परफॉर्म करने दोनों में ही मजा आता है।

सवाल: संगीत की दुनिया में आज आप एक जाना पहचाना नाम हैं। आपके जीवन में इसकी शुरुआत किस तरह से हुई?
जवाब: संगीत हमारे परिवार में है। मेरे पिताजी स्वर्गीय शंकर जी और चाचा शंभू जी अपने जमाने के बहुत ही मशहूर सूफी गायक थे। शंकर-शंभू पवाल के नाम से उनकी कई प्रस्तुतियां हुईं। उन्हीं से मैंने पांच साल की उम्र से संगीत की शिक्षा लेनी शुरू की और दस की उम्र में मैंने अपना पहला कार्यक्रम किया। तब से आज तक कार्यक्रमों का सिलसिला बदस्तूर जारी है।

सवाल: संगीत के क्षेत्र में आज कई बदलाव आ चुके है, इस बदलाव को आप किस तरह से देखते हैं?
जवाब: बदलाव तो प्रकृति का नियम है, लेकिन हमारा भारतीय संगीत हमेशा जिंदा रहेगा और लोगों को पसंद आएगा। कुछ दिनों के लिए पॉप और वेस्टर्न म्यूजिक जरूर ट्रेंड में आ जाता है, लेकिन थोड़े दिनों के बाद फिर हमारा रूझान भारतीय संगीत और फोक म्यूजिक की ओर हो जाता है। क्योंकि हमारे संगीत की जो खुशबू है, जो आनंद है, वो हम हमेशा एंजॉय करते हैं।

सवाल: क्या वाकई रियलिटी शो के माध्यम से असली टैलेंट सामने आता है या यह सिर्फ टीआरपी के लिए होता है?
जवाब: खुशी की बात है कि आजकल नॉन म्यूजिकल फैमिली से भी ऐसे टैलेंटेड बच्चे आ रहे हैं, जिनके खानदान में किसी ने म्यूजिक सीखा नहीं, गाया नहीं, समझा नहीं। ऐसे बच्चों को सुनकर बहुत अच्छा लगता है और खुशी भी होती है। मैं भी एक म्यूजिकल रियलिटी शो सारेगामापा का हिस्सा रह चुका हूं। यह एक अच्छा प्लेटफॉर्म है, जो हमारे समय नहीं था। हमारे समय केवल दूरदर्शन था। लेकिन आजकल बच्चों के लिए रियलिटी शो एक अच्छा प्लेटफॉर्म साबित हो रहा है। इससे बहुत जल्दी प्रसिद्धी मिल जाती है। मेरी बेटी स्नेहा शंकर भी एशिया सिंगिंग सुपर स्टार की विनर रही है, जिसमें हर उम्र के सिंगर्स ने भाग लिया था और मेरी बेटी उसमें सबसे कम उम्र की कंटेस्टेंट थी। 11 साल की उम्र में ही उसने वह शो जीता।

सवाल: भारत के बाहर जब कभी आप परफॉर्म करने जाते हैं तो यहां के श्रोताओं में और विदेशी श्रोताओं में क्या फर्क महसूस करते हैं?
जवाब: विदेश में अपने देश की कला को लेकर लोग बहुत इमोशनल है। वहां बहुत क्रेज है हमारे भारतीय संगीत और कलाओं का। अमेरिका, कनाडा सभी जगहों पर जब हम शो करने जाते हैं तो वहां के लोग इस तरह की गायकी और संगीत सुनने के लिए तरसते हैं। इसलिए विदेश में हमारे सभी शो हाउस पैक होते हैं और कई बार तो हमे पब्लिक की डिमांड पर शो रिपीट करना पड़ता है।

सवाल: भारत में पाकिस्तानी सिंगर्स और कलाकारों पर बैन को आप कितना सही मानते हैं?
जवाब: मेरा इस मामले पर साफ मत है कि पाकिस्तानी कलाकारों और सिंगर्स पर बैन पूरी तरह से सही है। बाबुल सुप्रियो ने इस मुद्दे को उठाया था। इससे पहले हमने भी इस मुद्दे को उठाया था। अभिजीत भट्टाचार्य ने हमेशा इस मुद्दे को उठाया कि बाहर के सिंगर्स हमारे यहां आते हैं और सूटकेस भरकर पैसा कमाते हैं। उसके बाद भी भारत की बुराई करते है, जो ठीक नहीं है। हमारे भारत में कला की कमी नहीं है, एक से एक दिग्गज कलाकार हमारे देश में हैं। इसके बावजूद हम बाहर के कलाकारों को सर पर चढ़ाते हैं, जो उचित नहीं है। इस चलन को रोका जाना चाहिए।

सवाल: शास्त्रीय संगीत की ओर युवाओं का रूझान कम होने के पीछे क्या कारण मानते हैं?
जवाब: ऐसा नहीं है। संगीत की ओर आज भी युवाओं का काफी रूझान है। बल्कि टीवी और मीडिया ने इसे और ज्यादा बढ़ा दिया है। आजकल कमोबेश हर परिवार में बच्चों को संगीत सिखाया जाता है। सभी अपने बच्चों को अपने स्तर पर संगीत की शिक्षा दे रहे हैं। म्यूजिक और रियलिटी शो का इसमें बहुत बड़ा योगदान है।

सवाल: एक गायक के लिए उर्दू लफ्ज़ों के ज्ञान को आप कितना जरूरी मानते हैं?
जवाब: आजकल के कई बड़े प्ले-बैक सिंगर्स की उर्दू बहुत खराब है। वो शब्दों का सही उच्चारण भी नहीं कर पाते। लता मंगेशकर और आशा भोंसले समेत तमाम बड़े गायकों ने गाना गाने के लिए उर्दू की तालीम ली थी। नए गायकों के लिए भी यह जरूरी है कि वो अपनी भाषा में अच्छी पकड़ रखे।

हिन्दुस्थान समाचार