सिंगापुर — भारत अपनी पारंपरिक दवाओं और चिकित्सा पद्धतियों को सिंगापुर में औपचारिक मान्यता दिलाने के लिए काम कर रहा है जहां एक बड़ा बाजार है। सिंगापुर में भारतीय उच्चायुक्त जावेद अशरफ ने यहां पारंपरिक भारतीय दवाओं पर आयोजित चौथे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से इतर कहा कि आयुर्वेदिक और सिद्ध दवाओं से संबंधित दस्तावेज सिंगापुर स्वास्थ्य प्राधिकरण को सौंपे गए हैं।

 

आयुर्वेदिक प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन ऑफ सिंगापुर (ए पी ए एस) और सिद्ध प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन ऑफ सिंगापुर (एस पी ए एस) प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही हैं।

ए पी ए एस के महासचिव डॉ विजयपल्ल जे जोन्नगदला ने कहा कि प्रक्रिया के बाद अंतत: भारत और सिंगापुर के बीच पारंपरिक औषधियों के संबंध में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर होंगे। वतर्मान में सिंगापुर में भारतीय दवाएं पारंपरिक मसाज केंद्रों और वेलनेस स्पा के जरिए वितरित की जा रही हैं।

डॉ. जोन्नगदला ने कहा कि सिंगापुर में भारतीय समुदाय प्रति वर्ष एक करोड़ 20 लाख सिंगापुरी डॉलर से अधिक की भारतीय पारंपरिक दवाएं और सेवाएं इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा,‘‘भारतीय पारंपरिक दवाओं और सेवाओं के आयात के वैध होने तथा उचित लाइसेंसिंग के बाद हम 200 प्रतिशत की वृद्धि देखेंगे।’’