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Saturday 6 June 2020

समलैंगिकता अपराध नहीं लेकिन समलैंगिक विवाह और संबंध प्रकृति संगत नहीं — आरएसएस

सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की तरह हम भी इस को अपराध नहीं मानते, समलैंगिक विवाह और संबंध प्रकृति से सुसंगत एवं नैसर्गिक नहीं है, इसलिए हम इस प्रकार के संबंधों का समर्थन नहीं करते, अरुण कुमार ने कहा

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नई दिल्ली—सुप्रीम कोर्ट द्वारा समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखे जाने पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ(आरएसएस) ने बयान दिया है। संघ ने समलैंगिका को अपराध की श्रेणी से बाहर मानते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की तरह हम भी इस को अपराध नहीं मानते लेकिन ऐसे संबंध प्रकृति विरुद्ध हैं।

संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने कहा, ”समलैंगिक विवाह और संबंध प्रकृति से सुसंगत एवं नैसर्गिक नहीं है, इसलिए हम इस प्रकार के संबंधों का समर्थन नहीं करते। परंपरा से भारत का समाज भी इस प्रकार के संबंधों को मान्यता नहीं देता।”

संघ ने कहा कि मनुष्य सामान्यतः अनुभवों से सीखता है इसलिए इस विषय को सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक स्तर पर ही संभालने की आवश्यकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आपसी सहमति सेसमलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। फैसला सुनाने वाली संवैधानिक पीठ में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा, जस्टिस आर एफ नरीमन, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदू मल्होत्रा भी शामिल थे। अदालत ने इस मामले में फैसला 17 जुलाई को ही सुरक्षित रख लिया था।

गुरुवार को संवैधानिक पीठ की ओर से सुनाए गए फैसले के बाद अब समलैंगिकता को अपराध नहीं माना जाएगा।

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