Saturday 21 May 2022
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जीएसटी — कैट ने 28% टैक्स स्लैब की समीक्षा की अपील की

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नई दिल्ली — कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने जीएसटी काउंसिल से आग्रह किया है कि 28% की कर दर में शामिल किये गए उत्पादों की पुन: समीक्षा कर इसे केवल लक्जरी एवं डिमेरिट वस्तुओं तक ही सीमित रखा जाए।

इसके अलावा कैट ने जीएसटी काउंसिल से आग्रह किया है कि बिल एवं एचएसएन कोड को फ़िलहाल 6 महीने के लिए स्थगित रखा जाए क्योंकि बड़ी संख्या में व्यापारी इससे अनभिज्ञ हैं और इस प्रक्रिया को समझने एवं उसका पालन करने के लिए उनको थोड़ा समय दिया जाना अच्छा होगा।

कैट का मानना है कि इस कर दर में शामिल वस्तुओं के कारण व्यापारी वर्ग असंतोष में है। कर दरों की विसंगतियों को दूर किया जाना बेहद जरूरी है क्योंकि इस कारण से ही जीएसटी जैसे अच्छे सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं। कैट ने उम्मीद व्यक्त की है कि व्यापक जानकारी के अभाव में उपजे भ्रम और असंतोष को दूर करने से जीएसटी को व्यापारी आसानी और सुविधापूर्वक अपना सकेंगे।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा की जीएसटी काउंसिल द्वारा पूर्व में जारी एक अधिकृत वक्तव्य में कहा गया था की 28% का कर स्लैब केवल उन वस्तुओं के लिए है जिन पर वर्तमान में 30-31 प्रतिशत (वैट एवं एक्साइज ड्यूटी) मिलाकर कर लगता है। लेकिन, इनमें से बड़ी संख्या में वस्तुएं आम आदमी खास तौर पर लोअर मिडिल क्लास द्वारा उपयोग की जाती हैं। इसलिए 28% की कर दर उनके लिए महंगी साबित होगी और इस दृष्टि से ऐसे सभी आइटम 18 प्रतिशत की कर दर में रखे जाएंगे। लेकिन लगभग 19% आइटम इस कर दर में रखने से काउंसिल का उद्देश्य ही विफल हो गया है।

उन्होंने कहा कि दुपहिया और चार पहिया वाहनों के स्पेयर पार्ट्स, हाउसिंग सेक्टर में प्रकट होने वाले आइटम जिनमें सीमेंट, आयरन एंड स्टील, बिल्डिंग हार्डवेयर, पेंट, मार्बल, सेनेटरीवेयर, फर्नीचर, इलेक्ट्रिकल फिटिंग्स, सौन्दर्य प्रसाधन, बॉर्न्विटा, अमूल प्रो, हॉर्लिक्स जैसे स्वास्थ्यवर्धन प्रोडक्ट, साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट, आदि को 28% की कर दर में रखा गया है जबकि यह किसी भी दृष्टि से न तो लक्जरी अथवा डिमेरिट आइटम हैं।

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