Thursday 3 December 2020
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इस्लामी आतंक के ख़िलाफ़ फ़्रांस का महायुद्ध शुरू

इस्लामी आतंकवाद के मुद्दे पर फ़्रांस को भारत, अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसी बड़ी महाशक्तियों का साथ मिला है जिससे इस मुद्दे पर आगे टकराव तेज़ होने की संभावना है

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फ़्रांस के नीस शहर में एक चर्च के बाहर दो महिलाओं समेत तीन लोगों की हत्या से पूरे देश में आक्रोश है। फ़्रांस ने इसे आतंकी घटना करार दिया है। इसको लेकर दुनिया के तमाम ग़ैर-मुुसलमान मुल्क फ़्रांस के साथ और इस्लामी आतंकवाद के ख़िलाफ़ खड़े नज़र आ रहे हैं।

यूएई के विदेश मंत्रालय ने आतंकवाद के विरुद्ध इन आपराधिक कृत्यों की कड़ी निंदा करते हुए बयान जारी किया है। मंत्रालय ने कहा कि वह हिंसा के सभी रूपों को स्थायी रूप से ख़ारिज करता है। ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने इस घातक चाकू हमले की निंदा की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, ‘हम नीस शहर में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हैं।’

ईरान और यूएई के अलावा इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी हमले की निंदा की। उन्होंने ट्वीट करके सभी सभ्य देशों को फ़्रांस के साथ पूर्ण एकजुटता के साथ खड़े होने की बात कही।

दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ़्रांस को समर्थन दिया और कहा कि अमेरिका इस लड़ाई में अपने सबसे पुराने सहयोगी के साथ खड़ा है।

इस्लामिक आतंकवाद के मुद्दे पर फ़्रांस को भारत, अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसी बड़ी महाशक्तियों का साथ मिला है। जिससे इस मुद्दे पर आगे टकराव तेज होने की आशंका बढ़ गई है।

ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि हमारा दिल फ़्रांस के लोगों के साथ है। अमेरिका इस लड़ाई में अपने सबसे पुराने सहयोगी के साथ खड़ा है। इन कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवादी हमलों को तुरंत रोक देना चाहिए।

कुछ इस्लामी देश और संगठनों ने फ़्रांस के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। फ़्रांस सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए कुछ मस्जिदों को बंद कर दिया है। इसे लेकर कई मुस्लिस देशों में नाराजगी सामने आई है। लेकिन यूएई जैसे इस्लामी देश का फ़्रांस को समर्थन मिलना बड़ी बात माना जा रहा है।

मुसलमानों को फ़्रांस के लोगों की हत्या का हक़: महातिर मोहम्मद

फ़्रांस के विरुद्ध आग उगलते हुए मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री और कट्टर मुस्लिम नेता महातिर मोहम्मद ने एक के बाद एक ट्वीट करके अपनी भड़ास निकाली। महातिर मोहम्मद ने भड़काऊ ट्वीट करके लिखा, ‘धर्म से परे, गुस्साए लोग हत्या करते हैं। फ़्रांस ने अपने इतिहास में लाखों लोगों की हत्या की है जिनमें से कई मुस्लिम थे। मुस्लिमों को गुस्सा होने और इतिहास में किए गए नरसंहारों के लिए फ्रांस के लाखों लोगों की हत्या करने का हक़ है।’

तुर्की के राष्ट्रपति ने की मुसलमानों को भड़काने की शुरुआत

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान ने दुनिया भर के मुस्लिम देशों को भड़काने की शुरूआत करते हुए कहा था, ‘मैं अपने सभी नागरिकों और दुनिया भर के मुसलमानों का आह्वान कर रहा हूं। जैसे वे कहते हैं कि फ़्रांस में ‘तुर्की के ब्रांडों की ख़रीद मत करो’, मैं यहां से अपने सभी नागरिकों को फ्रांसीसी ब्रांडों की मदद करने या उन्हें नहीं खरीदने की अपील कर रहा हूं।’

इस्लामी आतंक के ख़िलाफ़ फ़्रांस झुकने को तैयार नहीं

इस्लामी कट्टरवाद और आतंकवाद के विरुद्ध सबसे बड़ी लड़ाई का चेहरा बन चुके फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल माक्रों दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन और देश पर हो रहे आतंकवादी हमलों के बावजूद झुकने को तैयार नहीं हैं। राष्ट्रपति माक्रों की अगुवाई में फ़्रांस अब इस लड़ाई को अंजाम तक पहुँचाने को तैयार है। माक्रों ने साफ़ कहा है कि इस्लामी आतंकी हमले के बाद भी फ़्रांस अपने मूल्यों को छोड़ेगा नहीं।

हम मज़बूती के साथ खड़े रहेंगे: माक्रों

माक्रों ने कहा, ‘मैं यहाँ सबसे पहले फ़्रांस और अन्य जगहों पर कैथोलिक आबादी के लिए राष्ट्र का समर्थन व्यक्त करना चाहता हूं। 2016 की गर्मियों में फ़ादर जैक्स हेमेल की हत्या के बाद एक बार फिर से कैथोलिकों को निशाना बनाया गया है। पूरा देश उनके पक्ष में खड़ा है। हम मज़बूती से साथ खड़े रहेंगे ताकि हमारे देश में धर्म का स्वतंत्र रूप से अभ्यास किया जा सके।’

नीस में फिर हुआ आतंकी हमला

इसी बीच पेरिस में टीचर की गला काटकर हत्या के बाद फ़्रांस के नीस शहर में एक बार फिर इस्लामी आतंकी हमला हुआ। हाथ में क़ुरान और चाक़ू लिए एक कट्टरवादी ने पहले इस्लामी नारे लगाए। उसके बाद चाक़ू से लोगों पर हमला बोल दिया। वारदात में 3 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। तीन लोगों की हत्या करने वाला संदिग्ध इसी साल सितंबर के आख़िर में ट्यूनिशिया से आया था और उसकी उम्र सिर्फ़ 21 साल है।

हमारा देश फिर इस्लामी आतंक का शिकार हुआ: माक्रों

इस घटना के बाद राष्ट्रपति इमैन्युअल माक्रों ने कहा, ‘… एक बार फिर से हमारा देश इस्लामी आतंकवाद का शिकार हुआ है। इस सुबह एक बार फिर से हमारे तीन हमवतनों की नीस में हत्या कर दी गई। यह स्पष्ट रूप से फ़्रांस पर हमला किया गया है। जिस समय हम फ़्रांस में गिरफ्तारियां कर रहे थे, उसी दौरान हमने जेद्दा में सऊदी अरब में फ़्रांसीसी कांसुलर सेक्शन पर हमला देखा है।’

फ़्रांस ने स्कूलों और धार्मिक स्थानों पर बढ़ाए सैनिक

नीस में इस आतंकी हमले के बाद फ़्रांस ने इस्लामिक आतंक पर अपना रुख़ और सख़्त कर लिया है। राष्ट्रपति इमैन्युअल माक्रों ने देश में सुरक्षा का स्तर बढ़ाने और इस्लामी आतंकियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई तेज़ करने का आदेश दिया है। राष्ट्रपति के आदेश के बाद अब फ़्रांस के प्रमुख स्थानों पर सैनिकों की तैनाती की जाएगी। इन स्थानों में स्कूल और धार्मिक स्थान शामिल रहेंगे। इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा के लिए तैनात सैनिकों की संख्या भी 3 से बढ़ाकर 7 हज़ार की जाएगी।

भारत ने देर-सवेर किया फ़्रांस का समर्थन

इस्लामी आतंक के विरुद्ध फ़्रांस को भारत, अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसी बड़ी महाशक्तियों का साथ मिला है। पीएम नरेंद्र मोदी ने शिक्षक साम्युल पाती के सर कलम कर दिए जाने वाले पहले इस्लामी आतंकी हमले के तीन दिन बाद ट्वीट करके कहा, ‘मैं आज नीस में चर्च के भीतर हुए नृशंस हमले समेत फ्रांस में हुए हालिया आतंकी हमलों की कड़ी निंदा करता हूं। पीड़ितों के परिवार वालों और फ़्रांस के लोगों के साथ हमारी संवेदना। आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में भारत फ्रांस के साथ है।’

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