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Thursday 2 July 2020

प्रशांत भूषण के ख़िलाफ़ धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में एफ़आईआर

प्रशांत भूषण ने देशभर में कोरोनावायरस लॉकडाउन के दौरान दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत के पुनर्प्रसारण की तुलना जनता में अफ़ीम बांटने से की थी

अधिवक्ता प्रशांत भूषण के खिलाफ गुजरात के राजकोट में दर्ज की गई एक एफआईआर के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भूषण को किसी प्रकार की बलपूर्वक कार्रवाई से राहत दी है। प्रशांत भूषण के खिलाफ यह एफआईआर कथित रूप से हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में दर्ज की गई है। 

यह एफआईआर पूर्व सैन्य अधिकारी जयदेव रजनीकांत जोशी ने दर्ज कराई थी। जोशी ने आरोप लगाया है कि प्रशांत भूषण ने पूरे देश में कोरोनावायरस लॉकडाउन के दौरान दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत के दोबारा प्रसारण के खिलाफ ट्वीट कर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। 

जोशी ने अपनी शिकायत में भूषण पर आरोप लगाा कि उन्होंने 28 मार्च को एक ट्वीट में रामायण और महाभारत के लिए ‘अफीम’ शब्द का इस्तेमाल करके हिंदू समुदाय की भावनाओं को आहत किया है।

प्रशांत भूषण ने अपने ट्वीट में लिखा था कि जब करोड़ों की तादाद में लोग ‘जबरन तालाबंदी’ के कारण परेशानी झेल रहे हैं तो केंद्र सरकार बड़ी आबादी को दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत सीरियल्स के नाम पर अफीम खिला रही है। इसको लेकर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई है। इसके बाद गुजरात के एक पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई गई है। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में अब कल होगी।

चूँकि घबराहट या किसी और वजह से प्रशांत भूषण ने विवादस्पद ट्वीट डिलीट कर दी है, पाठकों की सुविधा हेतु हम उसका एक स्क्रीनशॉट प्रस्तुत करते हैं —

कोर्ट ने प्रशांत भूषण को किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम राहत और संरक्षण प्रदान करते हुए कहा, ‘कोई भी व्यक्ति टीवी पर कुछ भी देख सकता है।’ इसके साथ ही पीठ ने सवाल किया कि कोई किसी कार्यक्रम विशेष को नहीं देखने के लिए लोगों से कैसे कह सकता है।

हिन्दुओं और हिंदुत्व के ख़िलाफ़ ज़हर उगलने में माहिर प्रशांत भूषन की यह कोई पहली करतूत नहीं थी। वे हिन्दू सभ्यता की आलोचना करते हैं या अपने अज्ञान या निर्बुद्धिता की नुमाइश, इसका अनुमान इस पुरानी ट्वीट से लगाइए —

न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भूषण की याचिका पर सुनवाई की और गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया। पीठ ने इस मामले को दो सप्ताह बाद आगे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

भूषण की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने यह प्राथमिकी निरस्त करने का अनुरोध करते हुए पीठ से कहा कि फिलहाल उन्हें किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया जाए।

दवे ने कहा कि वह इस मुद्दे पर नहीं है कि लोगों को क्या देखाना चाहिए और क्या नहीं बल्कि वह तो सिर्फ प्राथमिकी दर्ज किए जाने के खिलाफ ही बहस कर रहे हैं। इस बीच रजिस्ट्री के सूत्रों ने बताया कि भूषण ने बृहस्पतिवार को यह यचिका दायर की थी और यह सुनवाई के लिए शुक्रवार को सूचीबद्ध हुई थी।

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