Wednesday 21 October 2020

मास्क में अपराधी, पुलिस के सामने शिनाख्त की नई परेशानी

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक महामारी के इस दौर में अब मास्क अपराधियों के लिए एक मौका बन गया है और वो इसे पहनकर मौके का फायदा उठाते हुए अपराध कर रहे हैं

लुटेरे, झपटमार और बदमाश पहले भी मुंह ढककर वारदात को अंजाम देते रहे हैं, लेकिन खुलेआम मुंह ढक कर नहीं चल पाते थे। अब मास्क की अनिवार्यता के बाद वह पुलिस की नाक के सामने से आराम से निकल जाते हैं। इसी वजह से पुलिस को उनका पता तक नहीं चलता। इस कारण आम लोगों के बीच अपराधियों को ढूंढकर उन पर नकेल कसने में पुलिस के पसीने छूटने रहे हैैं।

अमेरिकी खुफिया और सुरक्षा एजेंसी एफबीआई ने हाल ही में कोर्ट में एक दस्तावेज जमा किया जिसमें विलियम लोपेज़ द्वारा दिए गए वारदात का ज़िक्र था। एफ़बीआई ने बताया कि कैसे लोपेज ने सर्जिकल मास्क लगाकर कनेक्टिकट स्टोर में प्रवेश किया, प्लास्टिक की थैली और कुछ सामान उठाए और फिर काउंटर पर गए। इसके बाद लोपेज़ ने एक छोटी सी पिस्तौल निकाली और उसे क्लर्क की तरफ दिखाकर कॅश की मांग की।

मास्क का फ़ायदा उठा रहे अपराधी, सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ी

9 अप्रैल को पुलिस द्वारा गिरफ़्तार होने से पहले लोपेज ने इसी अंदाज़ में आठ दिन में चार अन्य दुकानों को भी अपना निशाना बनाया। इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक महामारी के इस दौर में अब मास्क अपराधियों के लिए एक मौक़ा बन गया है और वो इसे पहनकर मौक़े का फ़ायदा उठाते हुए अपराध कर रहे हैं।

अमेरिका में कोरोनावायरस के बढ़ते ख़तरे को देखते हुए मास्क को सभी के लिए अनिवार्य कर दिया गया है, जिसके बाद अब मास्क और ग्लव्स का इस्तेमाल कुछ लोग ग़लत कामों में भी करने लगे हैं। 

अमेरिकी जाँच एजेंसियों के मुताबिक़ यह बता पाना मुश्किल है कि महामारी का फ़ायदा उठाकर कितने लोगों ने अपराध किए हैं, लेकिन यह तय है कि इस तरह के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अधिकारियों के अनुसार मास्क पहनकर अपराध को अंजाम देना और आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के मामले तेज़ी से दुनियाभर में बढ़ सकते हैं।

बदमाशों की ढाल

पिछले कुछ महीनों में आभूषण की दुकानों में लूट की कई घटनाएँ सामने आई हैं। दुकानदारों का आरोप है कि मास्क लगाने के चक्कर में चोरों को ज़्यादा मौक़ा मिल रहा है।

चांदनी चौक की दुकान में लटके मिले दो सराफ़ा व्यापारी भाइयों अंकित और अर्पित की यादें अभी भी लोगों के मन में ताजा हैं जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान हुए भारी नुकसान के बाद लोन देने वाले लोगों की प्रताड़ना से तंग आकर अपना जीवन ख़त्म कर लिया था।

ज्वेलर्स की मानसिक शांति को छीनने वाली केवल यही एक घटना नहीं है, बल्कि वे राष्ट्रीय राजधानी में और उसके आसपास हथियार धारी लुटेरों और डकैतों के भी शिकार हो रहे हैं। इतना ही नहीं, एनसीआर में दिन-दहाड़े दुकानों में घुसकर बंदूकधारियों द्वारा लूट करने के मामले भी सामने आए हैं जिनमें विरोध करने पर लुटेरों ने गोली चलाने से भी परहेज नहीं किया।

मास्क पहनकर आए अपराधियों द्वारा किए गए अपराध

  • 20 मई — हैबोवाल में मास्क पहनकर आए हमलावरों ने सब्जी विक्रेता की हत्या कर दी।
  • 18 मई — ग्यासपुरा में मास्क पहनकर आए हमलावरों ने एक युवक पर कातिलाना हमला किया।
  • 14 मई — न्यू कुंदनपुरी में मास्क पहनकर आए हमलावरों ने मोबाइल कारोबारी की हत्या कर दी।
  • इन घटनाओं के अलावा ग्यासपुरा क्षेत्र में ही पिछले एक सप्ताह में मास्क पहनकर आए लुटेरों ने चार लोगों से नक़दी और मोबाइल छीन लिए।

सितंबर में अलीगढ़ में एक ज्वेलर के शोरूम में हुई डकैती का वीडियो वायरल हुआ था। इसी तरह इसी महीने की शुरुआत में ग्रेटर नोएडा के बादलपुर में एक 32 वर्षीय ज्वेलर को उस समय गोली मार दी गई थी, जब उसने अपनी दुकान पर एक सशस्त्र डकैती का विरोध करने की कोशिश की थी।

सितंबर में ही इंदिरापुरम में एक ज्वेलरी शॉप में 5 हथियारबंद लुटेरे बंदूक की दम पर दुकान मालिक से रु० 8 लाख के सोने-चांदी के आभूषण लूटकर फरार हो गए थे। सिर्फ लूट और डकैती तक ही नहीं, हाल के दिनों में ज्वेलर्स अपहरण का भी शिकार हुए हैं। अक्टूबर में करोल बाग़ के ज्वेलर का फिरौती के लिए अपहरण किया गया था जिसे दिल्ली पुलिस ने मेरठ से छुड़ाया था।

अधिकारियों के आश्वासन के बावजूद कई ज्वेलर्स को लगता है कि उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त काम नहीं किए गए हैं। बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल कहते हैं कि सराफ़ा व्यापारियों को हथियार लाइसेंस के आवंटन में प्राथमिकता दी जानी चाहिए क्योंकि दिल्ली-एनसीआर ही नहीं, पूरे देश में ज्वेलर्स लूट का शिकार हो रहे हैं। कोरोनावायरस के कारण स्थिति और बदतर हो गई है क्योंकि मास्क पहने हुए व्यक्ति को पहचानना मुश्किल होता है। अपराधियों को पकड़ने के लिए सराफ़ा बाज़ारों में अतिरिक्त पुलिस की तैनाती की जानी चाहिए और ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाने चाहिए।

इस बारे में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि हम अच्छी गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरों से सराफ़ा दुकानों को कवर करने की पूरी कोशिश करते हैं। इसके लिए लगातार जांच की आवश्यकता होती है, क्योंकि कई बार कैमरे की नजर पेड़ों या तारों की बढ़ती शाखाओं के कारण अवरुद्ध हो जाती है। इसके अलावा सराफ़ा व्यापारियों को लगातार बैठकों के जरिए अपराधियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली चालों और रणनीतियों से भी अवगत कराया जाता है।

सीसीटीवी कैमरों से फुटेज मिले पर चेहरों की पहचान नहीं

लूटपाट और झपटमारी करने वाले आरोपितों को ढूंढने के लिए पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले लेकिन आरोपितों की पहचान नहीं हुई। मास्क के कारण उनकी पहचान कर पाना मुश्किल हो रहा है।

”संदिग्धों को पकडऩे के लिए पुलिस लगातार काम कर रही है। कुछ अपराधी मास्क लगाकर वारदात कर रहे हैं, लेकिन पुलिस उन तक पहुंचने के लिए अलग-अलग थ्योरियों पर काम कर रही है। पहले भी अपराधी नक़ाब पहन कर वारदात करते थे, तब भी पुलिस उन तक पहुँच ही जाती थी।

Siddharth Raghvendra Raghuvanshi
Siddharth Raghvendra Raghuvanshi
Editorial Assistant of Sirf News with experience in covering sports and entertainment for Navbharat Times and Network 18's IBN Lokmat

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