आपातकाल देश के लिए काला दाग— प्रधानमंत्री मोदी

जेटली ने कहा,‘‘हिटलर ने 25 सूत्री आर्थिक कार्यक्रमों की घोषणा की थी। श्रीमती गांधी ने 20 सूत्री कार्यक्रमों की घोषणा की थी। इस अंतर को पाटने के लिये संजय (गांधी) ने अपने पांच सूत्री आर्थिक और सामाजिक कार्यक्रम की घोषणा की

मुंबई—भारतवर्ष पर 43 साल पहले लगाया गया आपातकाल देश के लिए काला दाग ही था। एक परिवार ने अपनी सत्ता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए देश पर आपातकाल लाद दिया था। इस तरह का जोरदार हमला मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई भाजपा की ओर से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस पार्टी पर किया है।

यह व्यक्तव्य प्रधानमंत्री ने आज मंगलवार को मुंबई भाजपा की ओर से न्यू मरीन लाइंस स्थित बिरला मातोश्री सभागृह में आयोजित आपातकाल-लोकतंत्र पर आघात नामक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिया है। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रावसाहेब दानवे, मुंबई भाजपा के अध्यक्ष आशीष शेलार व अन्य लोग शामिल हुए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब कांग्रेस पार्टी को लगता है तो वह खतरे में हैं तो लोकतंत्र व संविधान के नाम पर चिल्लाना शुरु कर देती है। जो अपने पक्ष में लोकशाही नहीं रख सकता है , वह देश में लोकशाही की रक्षा किस तरह कर सकता है। संविधान के नाम पर देश खतरे में है, इस तरह की प्रचार किया जाने लगता है।

कांग्रेस पार्टी यह आभास करवाने का प्रयास करती है कि केवल वही देश बचा सकती है। लेकिन कांग्रेस पार्टी सिर्फ अपनी सत्ता के लिए यह सब करती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि सत्ता सुख और परिवार हित के लिए लोग हिंदुस्तान को जेलखाना बना देंगे।

देश के नेताओं को सलाखों में बंद कर देंगे। उन्होंने गायक किशोर कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें गाने-बजाने के लिए बुलाया, किशोर कुमार ने मना किया तो रेडियो पर से किशोर कुमार के गानों को हटा दिया गया। कांग्रेस पार्टी आंधी फिल्म से इतनी डर गई कि उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

जिस पार्टी के अंदर ही लोकतंत्र नहीं उससे कोई उम्मीद नहीं की जा सकती है। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर डर की राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने ऐसा काल्पनिक भय पैदा किया कि बीजेपी आएगी तो मुसलमानों को मार दिया जाएगा, दलितों के लिए मुश्किल हो जाएगी। इस प्रकार का उनका जो भाव है वह काफी खतरनाक है। जिन्होंने लोकतंत्र को कैदखाने में बंद कर दिया वे दुनिया में भय पैदा कर रहे हैं कि मोदी है संविधान को खत्म कर देगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब भी कांग्रेस की उसी तरह की मानसिकता है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी सभी वर्ग को लेकर संविधान की रक्षा के लिए काम कर रही है।

जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर और दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बीच तुलना करते हुए केंद्रीय मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि दोनों ने लोकतंत्र को तानाशाही में तब्दील कर दिया।

तीन भाग वाले लेख ‘द इमरजेंसी रिविजिटेड’ के दूसरे भाग में जेटली ने कहा कि हिटलर के विपरीत इंदिरा गांधी ने एक कदम आगे बढ़कर भारत को ‘वंशवादी लोकतंत्र’ में तब्दील करने का प्रयास किया।

अपने फेसबुक पोस्ट में मंत्री ने आश्चर्य जताया कि आपातकाल की पटकथा नाजी जर्मनी में 1933 में जो कुछ भी हुआ क्या उससे प्रेरित थी। चार दशक से अधिक समय पहले 25 जून 1975 को भारत में आपातकाल लगाया गया था।

जेटली ने ‘द टिरैनी ऑफ इमरजेंसी’ उपशीर्षक से दूसरे भाग में लिखा है, ‘‘हिटलर और श्रीमती गांधी दोनों ने कभी भी संविधान को निष्प्रभावी नहीं किया। उन्होंने गणतांत्रिक संविधान का इस्तेमाल लोकतंत्र को तानाशाही में बदलने में किया।’’

जेटली ने कहा कि कुछ ऐसे काम थे जो हिटलर ने नहीं किए, लेकिन इंदिरा गांधी ने किए।

जेटली ने कहा, ‘‘ उन्होंने मीडिया में संसद की कार्यवाही के प्रकाशन पर रोक लगा दी — हिटलर के विपरीत , श्रीमती गांधी भारत को ‘ वंशवादी लोकतंत्र ’ में तब्दील करने की दिशा में आगे बढ़ीं।’’

जेटली ने कहा,‘‘ भारत और जर्मनी में प्रेस पर सेंसर लगाने के लिये कानून लगभग एक समान थे। प्रभावी रूप में आपके यहां एकदलीय लोकतंत्र था।’’ आर्थिक कार्यक्रमों के संबंध में मंत्री ने हिटलर और इंदिरा गांधी के एजेंडा में समानता बताई।

जेटली ने कहा,‘‘हिटलर ने 25 सूत्री आर्थिक कार्यक्रमों की घोषणा की थी। श्रीमती गांधी ने 20 सूत्री कार्यक्रमों की घोषणा की थी। इस अंतर को पाटने के लिये संजय (गांधी) ने अपने पांच सूत्री आर्थिक और सामाजिक कार्यक्रम की घोषणा की। असहमति गुनाह हो गया और चाटुकारिता पैमाना बन गया।’’

उन्होंने कहा कि हिटलर ने इस बात को सुनिश्चित रखा कि उसके कदम संविधान के दायरे के भीतर हैं। जेटली ने कहा, ‘‘श्रीमती गांधी ने अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल लगाया ओर अनुच्छेद 359 के तहत मौलिक अधिकार निलंबित कर दिये और दावा किया कि देश में विपक्ष ने अव्यवस्था फैलाने की योजना बनाई थी।’’

वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि सुरक्षा बलों को अवैध आदेशों का पालन नहीं करने को कहा जा रहा था और इसलिये देश के व्यापक हित में भारत को ‘अनुशासित लोकतंत्र’ बनाया जाना था।

उन्होंने कहा कि हिटलर की तरह ही इंदिरा गांधी ने संसद के ज्यादातर विपक्षी सदस्यों को गिरफ्तार करवा लिया और इस प्रकार उनकी अनुपस्थिति में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो तिहाई बहुमत हासिल कर लिया और संविधान संशोधन के जरिये कई अप्रिय प्रावधानों को पारित करवा लिया।

जेटली ने कहा, ‘संविधान के 42 वें संशोधन के जरिये उच्च न्यायालयों की रिट जारी करने की शक्ति को कमतर कर दिया गया। इस शक्ति को डॉ . आंबेडकर ने कहा था कि यह संविधान की आत्मा है। उन्होंने अनुच्छेद 368 में भी संशोधन किया ताकि संविधान संशोधन को न्यायिक पुनर्विलोकन के दायरे से बाहर किया जा सके।’’

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