अशोक लवासा
चुनाव आयुक्त अशोक लवासा

नई दिल्ली | प्रधानमंत्री को आचार संहिता उल्लंघन के दोषी मानने वाले चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ख़ुद शक के घेरे में आ गए हैं। हाल ही में तीन में से एक चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ख़बरों की सुर्ख़ियों में आ गए थे जब अन्य दो चुनाव आयुक्तों द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को आचार संहिता उल्लंघन के मुआमले में निर्दोष करार दिए जाने पर उन्होंने आपत्ति जताई थी। विपक्षी पार्टियों ने उनके आरोप को हाथों-हाथ लिया और इस तरह भाजपा पर बरसने का एक और बहाना उनको मिल गया। पर अब एक वेबसाइट के मुताबिक़ लवासा के अपने आचार ही अनैतिक हैं।

समाचार वेबसाइट पी गुरुज़ ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की पत्नी नॉवेल सिंघल लवासा एक नहीं बल्कि 12 कंपनियों में निदेशक बनीं जो उन मंत्रालयों से जुड़ी थीं जहाँ-जहाँ अशोक लवासा ने चुनाव आयोग में आने से पहले आधिकारिक तौर पर काम किया है।

लवासा पर पत्नी को फ़ायदा पहुँचाने का आरोप

समाचार वेबसाइट के अनुसार नॉवेल बलरामपुर चीनी मिल्स और ओमैक्स ऑटो के निदेशक बनीं जब 2015 में अशोक लवासा पर्यावरण और वन मंत्रालय में सचिव थे। यह कंपनी बिजली क्षेत्र में व्यवसाय करती है।

पर्यावरण मंत्रालय से पहले अशोक लवासा बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में कार्यरत थे।

इसके अलावा नॉवेल को 2016 में 10 कंपनियों के बोर्ड्स में पद मिले जब अशोक लवासा वित्त मंत्रालय में सचिव बने। अशोक लवासा का वित्त मंत्रालय का कार्यकाल अप्रैल 2016 से अक्टूबर 2017 के बीच का था।

नॉवेल 14 सितंबर 2016 को इन 10 कंपनियों की निदेशक बनीं। इन 10 में से नॉवेल नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े वाल्वान ग्रुप ऑफ़ इंडस्ट्रीज की चार कंपनियों में निदेशक बनीं। वेलस्पन समूह के भी चार उद्योग इसी मंत्रालय से सम्बंधित काम करते हैं।

अब तक अशोक लवासा की पत्नी इन कंपनियों में निदेशक रह चुकी हैं —

  1. वेलस्पन सोलर टेक प्राइवेट लिमिटेड
  2. वेलस्पन सोलर पंजाब प्राइवेट लिमिटेड
  3. बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड
  4. वेलस्पन उरजा गुजरात प्राइवेट लिमिटेड
  5. ओमैक्स ऑटो लिमिटेड
  6. पावरलिंक ट्रांसमिशन लिमिटेड
  7. वेलस्पन एनर्जी राजस्थान प्राइवेट लिमिटेड
  8. दुगार हाइड्रो पावर लिमिटेड
  9. ड्रिसजेट मैसूर 24 प्राइवेट लिमिटेड
  10. वल्वहान विंड आरजे लिमिटेड
  11. एमआई मैसूर 24 प्राइवेट लिमिटेड
  12. वल्वहान ऊर्जा अंजार लिमिटेड

ये सभी कंपनियाँ बिजली या नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में काम करती हैं।

संयोग की बात है कि 3 जुलाई 2018 को एक ही दिन नॉवेल का बतौर निदेशक इन कंपनियों में कार्यकाल समाप्त हो गया।

सूत्रों के अनुसार नॉवेल को 2008 और 2013 के बीच बिजली क्षेत्र की एक अन्य कंपनी मल्टीप्लेक्स सोलर पावर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े वाइब्रेंट ट्रेड ग्रुप से किराए के रूप में रु० 29,45,000 मिले।

नॉवेल की शैक्षणिक योग्यता बस इतनी है कि वे अंग्रेज़ी भाषा में स्नातकोत्तर हैं और इन नियुक्तोयों से पहले 2005 तक स्टेट बैंक में काम करने का उनको अनुभव था।

लवासा की बेटी भी शक के दायरे में

सन 2010 में वीके शुंगलू ने राष्ट्रमंडल खेलों में कथित अनियमितताओं को उजागर करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) का गठन किया था। समिति ने लवासा की बेटी अवनी को बतौर सहायक परियोजना अधिकारी (एपीओ) नियुक्ति पर प्रश्न उठाया था। बाद में अवनी की परियोजना अधिकारी के रूप में पदोन्नति पर भी समिति ने आपत्ति जताई।

लवासा के बेटे अबीर का सहायक परियोजना अधिकारी के रूप में भी बहाली भी शक के घेरे में है।

समिति की रिपोर्ट में कहा गया कि यह स्पष्ट नहीं है कि निदेशकों की भर्ती के लिए एक समिति का गठन होता है और यह समिति इस बात पर विचार करती है कि एपीओ की नियुक्ति कैसे हो! यह स्पष्ट है कि इस प्रत्याशी को अन्य प्रत्याशियों के मुकाबले खड़ा नहीं किया गया ताकि उनकी तुलनात्मक मूल्यांकन हो सके। अवनी आयोजक समिति से बाहर के एक प्रभावशाली व्यक्ति से सम्बंधित हैं और इसलिए उनकी नियुक्ति को सही ठहराने के लिए कुछ दस्तावेज़ पेश किए गए, इस संभावना को नाकारा नहीं जा सकता।

वर्तमान में अवनी लवासा जम्मू और कश्मीर में एक आईएएस अधिकारी के रूप में सेवारत हैं।

चिदंबरम से मुआमले का सम्बन्ध

इसके आगे पी गुरुज़ पूर्व केन्द्र्रिय मंत्री पी चिदंबरम से मुआमले को जोड़ता है। वेबसाइट में लिखा है कि हरियाणा कैडर के 1980 बैच के आईएएस अधिकारी अशोक लवासा ने अप्रैल 2009 में पी चिदंबरम के कार्यकाल में गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में प्रवेश किया।

सन 2010 में चिदंबरम ने अशोक लवासा की एक पुस्तक लॉन्च की — अॅन अनसिविल सर्वेंट। उस समारोह में चिदंबरम ने लवासा दंपति की यात्रा फोटो प्रदर्शनी का भी शुभारंभ किया।

2009 में चिदंबरम उन्हें गृह मंत्रालय ले आये और मोदी सरकार के समय अक्टूबर 2017 में लवासा वित्त सचिव के रूप में सेवानिवृत्त हुए।

अशोक लवासा ने विद्युत मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय में विशेष सचिव के रूप में भी कार्य किया। उनकी बेटी अवनी 2013 में जम्मू और कश्मीर कैडर में आईएएस में शामिल हुईं और वर्तमान में लद्दाख में उपायुक्त के रूप में कार्यरत हैं।

पी गुरुज़ का दावा है कि लवासा चिदंबरम ही नहीं बल्कि कांग्रेस और भाजपा के कई मंत्रियों के चहेते रहे हैं और जब सुनील अरोड़ा अप्रैल 2021में सेवानिवृत्त हो जायेंगे तब लवासा की ही मुख्य चुनाव आयुक्त बनने उम्मीद है।

सुनील अरोड़ा का अतीत भी विवादित है। नीरा राडिया टेप काण्ड में वे रंगे हाथों पकडे गए थे। विवादास्पद लॉबीस्ट नीरा राडिया और सुनील अरोड़ा के बीच की बातचीत का टेप केवल आउटलुक पत्रिका की साईट में ही नहीं बल्कि वहाँ से सोशल मीडिया के ज़रिये घर-घर पहुँच चुका है।