क्या चुनाव आयोग ने बांग्लादेशी अभिनेता फ़िरदौस को तृणमूल के प्रचार की अनुमति दी?

टॉलीवुड के पायल सरकार और अंकुश के साथ फ़िरदौस ने रायगंज और हेमाबाद दोनों इलाकों में तृणमूल के रोड शो में भाग लिया

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फ़िरदौस

कोलकाता | ये बांग्लादेशी जनाब कोई घुसपैठिये नहीं हैं, फिर भी इन्होंने भारतीय चुनाव प्रक्रिया में घुसपैठ तो की ही है! बांग्लादेशी अभिनेता फ़िरदौस अहमद रविवार उत्तर दिनाजपुर जिले के रायगंज से तृणमूल लोकसभा के उम्मीदवार कन्हैया लाल अग्रवाल के लिए चुनाव प्रचार करते हुए पाए गए।

भले ही फ़िरदौस एक लोकप्रिय हों, विदेशी नागरिक भारतीय चुनावों में न तो भाग ले सकते हैं और न ही प्रचार में शामिल हो चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

फ़िरदौस कौन?

फिरदौस अहमद बांग्लादेशी फिल्म अभिनेता हैं। वह बांग्लादेश और बंगाल की फिल्मों में अभिनय करते हैं। उन्होंने हॉटट ब्रिश्ती (1998), गंगाजत्रा (2009), कुसुम कुसुम प्रेम (2011) और एक कप चा (2014) फिल्मों में अपनी भूमिकाओं के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए बांग्लादेश राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता।

टॉलीवुड के पायल सरकार और अंकुश के साथ फ़िरदौस ने रायगंज और हेमाबाद दोनों इलाकों में तृणमूल के रोड शो में भाग लिया।

तृणमूल के सूत्रों का कहना है कि बंगाल में प्रचार करने के लिए फ़िरदौस को सत्ता पक्ष की तरफ से आमंत्रित किया गया था। इससे तृणमूल के प्रचार की वैधता पर सवाल उठा है — क्या एक विदेशी नागरिक किसी भी भारतीय चुनाव में किसी भी उम्मीदवार के लिए प्रचार कर सकता है?

मुद्दा यह भी है कि क्या इस विदेशी ने वीजा शर्तों का उल्लंघन किया है?

इस घटना ने वस्तुतः बंगाल में एक अत्यधिक ध्रुवीकरण वाले चुनाव में  राज्य में विपक्षी भाजपा के हाथ तृणमूल के ख़िलाफ़ एक हथियार सौंप दिया। भाजपा उम्मीदवार कल्याण चौबे ने कहा, “मैंने पहले कभी ऐसा नहीं सुना। ऐसा लगता है कि पार्टी के पास कोई भारतीय स्टार नहीं है। कल ममता इमरान खान को तृणमूल के लिए प्रचार करने के लिए आमंत्रित करेंगी क्या? हम इसकी निंदा करते हैं।”

भाजपा के बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने ट्विटर पर कहा, “ऐसा लगता है कि ममता का बांग्लादेश के प्रति विशेष स्नेह है।”

पर हैरत की बात है कि अभी तक चुनाव आयोग में इस घटना के ख़िलाफ़ कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई!

इस बार, बांग्लादेशी घुसपैठिया बंगाल में एक प्रमुख चुनावी एजेंडा है। यहां तक ​​कि अमित शाह ने अपनी कई रैलियों में यह बात स्पष्ट कर दी है कि कैसे उनकी पार्टी पूरे भारत में नागरिकता के राष्ट्रीय पंजीकरण (एनआरसी) को लागू करेगी। NRC एक ऐसी प्रक्रिया है जो भारतीयों को घुसपैठियों से अलग करती है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने तृणमूल की इस हरकत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मुस्लिम वोट बैंक को लुभाने के लिए किया गया है। बंगाल में मुर्शिदाबाद, दिनाजपुर और मालदा जैसे मुसलमानों के वर्चस्व वाले जिलों में समुदाय की आबादी 32% है। मुर्शिदाबाद की 67% जनसंख्या मुसलमानों की है।

सब की नज़रें चुनाव आयोग पर हैं क्योंकि आचार संहिता के उल्लंघन के लिए शिकायत करना ज़रूरी नहीं। आयोग उल्लंघन के मामलों का स्वतः संज्ञान ले सकता है।

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