Saturday 28 May 2022
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दिव्यांगों की सहायता का विश्व कीर्तिमान; बनारस-दिल्ली ट्रेन चालू

वाराणसी — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र काशी में गिनीस बुक अफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। डीरेका खेल मैदान में 9,296 दिव्यांगों को उपकरण बांटकर न सिर्फ़ उन्हें स्वावलंबन की राह दिखाई, अपितु काशी को एक नवीन विश्व कीर्तिमान का साक्षी बनाया।

पूरी चाकचौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच ज़िले भर से आए विकलांगों को ट्राईसाइकल, बैसाखी से लेकर स्मार्टफ़ोन, लैपटॉप, वॉकरस्टिक, हियरिंगएड, मंदबुद्धिकिट्स, कृत्रिमअंग, नेत्रहीन-छड़ी और ब्रेलकिट बाँटे गए। इसके पूर्व अमेरिका में सात हज़ार लोगों को हियरिंग एड देने का रिकॉर्ड गिनीस बुक अफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में दर्ज था। इन उपकरणों की क़ीमत लगभग साढ़े सात करोड़ है।

“कुछ समय पूर्व दिए अपने वक्तव्य में जापान के प्रधानमंत्री ने अपनी काशी यात्रा, माँ गंगा आरती एवं आरती के समय व्यक्त विचारों का उल्लेख किया था। उनके विचार प्रत्येक भारतीय को गौरवान्वित करेंगे। मैं जापान के प्रधानमंत्री को धन्यवाद देता हूँ।" – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
“कुछ समय पूर्व दिए अपने वक्तव्य में जापान के प्रधानमंत्री ने अपनी काशी यात्रा, माँ गंगा आरती एवं आरती के समय व्यक्त विचारों का उल्लेख किया था। उनके विचार प्रत्येक भारतीय को गौरवान्वित करेंगे। मैं जापान के प्रधानमंत्री को धन्यवाद देता हूँ।” — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री ने अपने सम्बोधन का आरम्भ उन सभी को धन्यवाद देते हुए आरम्भ किया जो “दिव्यांगों” के जीवन को सरल एवं सुखमय बनाने हेतु सतत प्रयासरत हैं। प्रधानमंत्री ने जापान के प्रधानमंत्री द्वारा कुछ दिन पूर्व के उस वक्तव्य का भी स्मरण कराया जिसमे उन्होंने अपनी काशी यात्रा एवं माँ गंगा आरती के अनुभव को साझा किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें विकलांगों की कमियों की बजाय उनकी अतिरिक्तकुशलतादेखनी होगी। इसलिए ज़रूरी है कि पहले उन्हें विकलांग बोलना बंद किया जाए क्योंकि विकलांग शब्द से उनकी कमी जाहिर होती है, जबकि दिव्यांग शब्द से उनकी अतिरिक्तकुशलतापर ध्यान जाता है।उन्होंने कहा कि दूसरे देशों में विकलांगों को कई नाम दिए जा चुके हैं लेकिन हमारे देश में सालों से उन्हें इसी नाम से पुकारा जा रहा है। हमें अब इन्हें विकलांग की बजाय दिव्यांग कहना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार गरीबों को समर्पित है। गरीब, पीड़ित, शोषित, वंचित जिन्हें जीवन में कष्ट झेलने पड़ते हैं, उनके लिए सरकार कुछ न कुछ करने का प्रयास कर रही है।

varanasi 2उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में सरकार ने 1,800 कैंप लगाकर लाखों लोगों तक सुविधाएं पहुंचाई हैं। सरकार दिव्यांगों को खोजकर उनकी आवश्यकता, संसाधन उपलब्ध करा रही है ताकि उनके जीने का विश्वास बढ़ जाए। ये प्रयास आज चला है और चलता रहेगा। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, ये विभाग 1992 से स्थापित है लेकिन पिछली सरकार ने अब 22 सालो में सौ कैंप ही लगाए जबकि वर्तमान सरकार एक साल में ही 1800 कैंप लगा चुकी है। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाओं में बिचौलियों का भी खूब फायदा होता है लेकिन कैम्प के कारण अब इन बिचौलियों की दुकानें बंद हो गई हैं।

varanasi 4उन्होंने कहा कि विकलांग बच्चे की ज़िम्मेदारी सिर्फ उसके परिवार वालों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनके लिए समाज क्या कर सकता है, समाज को सामूहिक तौर पर इस पर चिंता करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकार सुगम्य भारत के तहत विकलांगों के लिए नई व्यवस्थाएं शुरू कर रही है। सरकार की ओर से उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं ताकि उन्हें ये एहसास हो कि समाज उनके प्रति संवेदनशील है।

“हमें ‘दिव्यांग’ नाम पाकर सम्मानित महसूस कर रहे हैं।आज से पहले हमने प्रधानमंत्री जी को “मन की बात” में रेडियो पर सुना था” 

— राजकुमार, अंध विद्यालय के छात्र

सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने न सिर्फ दिव्यांगों को बल्कि विधवा महिलाओं को भी स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से सिलाई मशीन बांटी। लुंबा फाउंडेशन से जुड़ी पांच महिलाओं को उन्होंने सिलाई मशीन दी। प्रधानमंत्री के हाथों उपकरण व ज़रूरत का सामान मिलने पर इन लोगों के चेहरे खुशी से खिल उठे थे। उपकरण बांटते वक्त प्रधानमंत्री ने दिव्यांगों से बातचीत कर उनके मन की भी बात जानी।

“समाज में विकलांग उपेक्षित हैं नए सम्बोधन “दिव्यांग” से नवीन ऊर्जा मिली है” 

— हनुमान दास पोद्दार, अंध विद्यालय के छात्र

वाराणसी को विशेष उपहार

varanasi 6प्रधानमंत्री ने जैसे ही डीरेका स्थित समारोह स्थल से हरी झंडी दिखाई, वैसे ही वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन पर दुल्हन की तरह सज-धज के तैयार महामना एक्सप्रेस के असिस्टेंट पायलट राजेश जायसवाल ने हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को नई दिल्ली की तरफ़ रवाना कर दिया।

महामना एक्सप्रेस मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को वाराणसी से 6 बजकर 35 मिनट पर रवाना होकर अगले दिन सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर नई दिल्ली पहुंचेगी।

“हम दिल्ली अपने रिलेशन में जा रहे हैं। हमेशा दिल्ली जाते हैं, इसबार रिज़र्वेशन के लिए आये तो महामना एक्सप्रेस में टिकट करवाया। अच्छी ट्रेन है। किराया कुछ ज़्यादा है, पर सुविधा शताब्दी से अच्छी है तो क्या कहने।“ 

— अपनी पत्नी और बच्चों के साथ सवार महमूरगंज के रहने वाले तनिष्क कपूर

महामना एक्सप्रेस के एसी फर्स्ट क्लास के डिब्बों में उच्च तकनीक और डिज़ाइन का इस्तेमाल किया गया है। इस डिब्बे के प्रत्येक बॉक्स में एक एलईडी टीवी, एक वाश बेसिन लगाया गया है। यात्रियों के ऊपर की सीट पर चढ़ने के लिए सीढ़ी बनायी गयी है।

वहीं इस बोगी की सभी सीटें फायर प्रूफ हैं। साथ ही साथ इसका इंटीरियर काफी खूबसूरत बनाया गया है। साथ ही साथ हर दस क़दम के बाद इसमें फायर इक्यूपमेंट लगाये गए हैं, ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

महमाना एक्सप्रेस के सभी डिब्बों में बायो टॉयलेट लगे हैं। साथ ही साथ अन्य ट्रेनों से हटकर बने इन शौचालयों में कूड़ेदान भी बनाए गए हैं। ताकि यात्री ट्रेन के टॉयलेट में गन्दगी न करें। बायो टॉयलेट की कार्यप्रणाली और उसे कैसे इस्तेमाल करना है। इन सभी चीज़ों की जानकारी स्टीकर द्वारा दी गयी है।

जब यात्री शौचालय में होगा तो सीट के पास लगा टॉयलेट इंडिकेटर रेड रहेगा। जब टॉयलेट खाली होगा तब और बाहर से बंद होगा तो ग्रीन लाइट का इंडिकेशन होगा।

प्रधानमंत्री द्वारा दी गयी काशी को यह सौगात काशीवासियों को काफी पसंद आ रही है। इस ट्रेन से रिज़र्वेशन कराकर जाने वाले भी काफी खुश दिखाई दिए।

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महामना एक्सप्रेस के भीतरी भागों की कुछ और तस्वीरें

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महामना एक्सप्रेस की पैंट्री कार (रसोई)

प्रधानमंत्री उवाच —

  • आज प्रातः सरकारी व्यवस्था से आ रहे “दिव्यांग लाभार्थी” दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए, उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना।

  • सुबह-सुबह उठो आप — चारों तरफ़ से मुझपे हमले चलते रहते हैं। चारों तरफ़! लगे रहते हैं! उन्हें लगता है कि मोदी अपने रास्ते को छोड़ कर किसी और रास्ते पर आ जाए, विवादों में पड़ जाए… लेकिन मेरा तो मंत्र है मेरे देश के ग़रीबों की, दुखियारों की सेवा करना। और इसलिए मैं विचलित नहीं होता हूँ। लेकिन ये हो इसलिए रहा है कि व्यवस्थाएँ ऐसी बदल रही हैं, nut-bolt ऐसे tight हो रहे हैं कि बिचौलियों की दुकानें बंद हुई हैं; इसलिए ये परेशानियां हो रही हैं।

  • “विकलांग” के स्थान पर हम “दिव्यांग” शब्द का प्रयोग करें क्योंकि उसे एक विशेष “कार्य-कुशलता” का गुण प्राप्त होता है।व्यवस्था विकसित करके “दिव्यांगों” को अनुभव कराना है, कि “मेरे लिए भी समाज में कुछ हो रहा है”; उनके लिए सम्मान की भावना जगे।

  • मुझे खुशी हो रही है कि मेरे संसदीय क्षेत्र से “महामना एक्सप्रेस” का संचालन आरंभ हो रहा है; संपूर्ण भारत में इसकी चर्चा होगी।

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Anupam Pandey
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​​IT analyst with mentoring responsibilities at IEEE, an associate at CSI India

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