Home Politics India मसाला ब्रांड एमडीएच के मालिक धर्मपाल गुलाटी का निधन

मसाला ब्रांड एमडीएच के मालिक धर्मपाल गुलाटी का निधन

'मसाला किंग' साल 1947 में विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आए थे जहाँ उन्होंने पहले तांगा चलाया, फिर मसालों का कारोबार शुरू किया

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मसाला कंपनी महाशिया दी हट्टी (MDH) के मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी (Dharampal Gulati) का गुरुवार को 98 साल की उम्र में निधन हो गया। पिछले कुछ समय से दिल्ली के माता चंदन देवी हॉस्पिटल (Mata Chanan Devi Hospital ) में उनका इलाज चल रहा था। कोरोनावायरस की बीमारी (Covid-19) से ठीक होने के बाद गुरुवार सुबह दिल का दौरा पड़ने पर उनका निधन हुआ।

मसाला किंग के नाम से मशहूर धर्मपाल गुलाटी साल 1947 में विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आए थे। भारत आने के बाद उन्होंने पहले तांगा चलाया और फिर मसाला कारोबार शुरू किया। आज उनका अरबों रुपयों का कारोबार है।

एमडीएच मसाला कंपनी के मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी का जन्म 27 मार्च 1923 को पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था। 1933 में उन्होंने पाँचवीं कक्षा की पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी। 1937 में उन्होंने पिता के सहयोग से शीशे का छोटा सा व्यवसाय शुरू किया। उसके बाद साबुन और दूसरे कई व्यवसाय किए, लेकिन उनका मन नहीं लगा। बाद में उन्होंने मसालों का काम शुरू किया जो उनका पुश्तैनी कारोबार था।

साल 1947 में बँटवारे के समय महाशय धर्मपाल गुलाटी भारत आ गए और अमृतसर के एक शरणार्थी शिविर में रहे। इसके कुछ समय बाद वह दिल्ली आए।

दिल्ली की ज़मीन पर जब उन्होंने क़दम रखा तो धर्मपाल गुलाटी की जेब में सिर्फ़ रु० 1,500 थे और उन्होंने रु० 650 में एक तांगा खरीदा जिसमें वह कनॉट प्लेस और करोल बाग़ के बीच यात्रियों को लाने और ले जाने का काम करते थे। इसके लिए वह दो आना प्रति सवारी लेते थे।

ग़रीबी से तंग आकर धर्मपाल गुलाटी ने अपना तांगा बेच दिया और मसालों का कारोबार शुरू करने का फ़ैसला किया, जो उनका पुश्तैनी कारोबार था। 1953 में चांदनी चौक में एक छोटी सी दुकान किराए पर ली और महाशिया दी हट्टी (MDH) नाम की दुकान खोली।

सियालकोट की एक बड़ी दुकान से उठ कर धर्मपाल गुलाटी का बिजनेस दिल्ली की एक छोटी दुकान में चलने लगा। इसके बाद जैसे-जैसे लोगों को पता चला कि सियालकोट की देगी मिर्च वाले अब दिल्ली में आ गए हैं, उनका कारोबार फैलता चला गया।

महाशय धर्मपाल ने छोटी सी पूंजी से कारोबार शुरू किया था, लेकिन उनका काम चलने लगा। जब मिर्च-मसालों की बिक्री ज़्यादा होने लगी तो वह पिसाई का काम घर के बजाए पहाड़गंज की मसाला चक्की में करवाने लगे। इसके बाद धीरे-धीरे उन्होंने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में दुकान खोल ली।

मसालों का कारोबार धीरे-धीरे फैलता गया और धर्मपाल गुलाटी ने साल 1959 में दिल्ली के कीर्ति नगर में मसाले तैयार करने की अपना पहला कारख़ाना लगाया। आज भारत और दुबई में एमडीएच की मसाले के 18 कारख़ाने हैं और कंपनी सालाना अरबों रुपयों का कारोबार करती है।

MDH के पूरी दुनिया में वितरक हैं और दुबई में कारख़ाना तथा लंदन, शारजाह और अमेरिका में कार्यालय हैं, जबकि भारत में एमडीएच के लगभग 1,000 वितरक हैं। एमडीएच का कारोबार भारत के अतिरिक्त ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड, हॉन्गकॉन्ग, सिंगापुर, चीन और जापान में भी है। इसके अलावा खाड़ी के देशों (पश्चिमी एशिया) में भी एमडीएच के मसालों का कारोबार है।

व्यापार और उद्योग खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में बेहतर योगदान देने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) ने पिछले साल महाशय धर्मपाल गुलाटी (Dharampal Gulati) को पद्मविभूषण से सम्मानित किया था।

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