Friday 21 January 2022
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दत्तात्रेय होसबले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नए सरकार्यवाह

शिमोगा के दत्तात्रेय होसबले 1973 में बेंगलोर यूनिवर्सिटी से अंग्रेज़ी में MA करने के दौरान RSS के संपर्क में आए और ABVP के प्रदेश संगठन मंत्री बने

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने दत्तात्रेय होसबले (Dattatreya Hosabale) को अपना नया सरकार्यवाह बनाया है। वे भैयाजी जोशी की जगह लेंगे।

जोशी इस पद पर पिछले लगभग 12 साल से थे। होसबले को की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में नया सरकार्यवाह बनाया गया। RSS में इस परिवर्तन को लेकर लंबे समय से अनुमान लगाया जा रहा था।

चुनाव को लेकर संघ के इतिहास में आज तक कभी भी वोटिंग की नौबत नहीं आई है। हर बार सरकार्यवाह का चुनाव निर्विरोध ही हुआ है। इस बार भी ऐसा ही हुआ। “ॐ” की ध्वनि के साथ दत्तात्रेय होसबले के नाम पर संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ने मुहर लगा दी।

दत्तात्रेय होसबले — संक्षिप्त परिचय

दत्तात्रेय होसबले मूलतः कर्नाटक के शिमोगा से हैं। वे 1973 में के संपर्क में आए। बेंगलोर यूनिवर्सिटी से उन्होंने अंग्रेज़ी में MA किया। होसबले कर्नाटक के प्रदेश संगठन मंत्री रहे। इसके बाद ABVP के राष्ट्रीय मंत्री और सह संगठन मंत्री रहे।

लगभग 2 दशकों तक के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रहे। इसके बाद 2002-03 में संघ के अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख बनाये गए। 2009 से सह सरकार्यवाह थे।

होसबले वर्ष 1975-77 के जेपी आंदोलन में भी सक्रिय थे और लगभग पौने दो वर्ष तक ‘मीसा’ के अंतर्गत जेल में रहे। जेल में होसबले ने दो हस्तलिखित पत्रिकाओं का संपादन भी किया। इनमें से एक कन्नड़ भाषा की मासिक पत्रिका असीमा थी।

प्रतिनिधि सभा की बैठक

कोरोना महामारी की वजह से इस बार अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक काफी छोटी रखी गई है। इस बार की बैठक में देश भर से केवल 500 से लेकर 550 वरिष्ठ स्वयंसेवकों को ही इसमें आमंत्रित किया गया है। साधारणतः प्रतिनिधि सभा की बैठक में तीन हज़ार से अधिक वरिष्ठ पदाधिकारी भाग लेते है।

के प्रत्येक प्रांत से भी केवल सात-आठ पदाधिकारियों को ही इस बार बेंगलुरु के चेन्नहल्ली स्थित जनसेवा विद्या केंद्र में चल रही प्रतिनिधि सभा में आमंत्रित किया गया है।

में सरसंघचालक के बाद सरकार्यवाह का पद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। विश्व के सबसे बड़े संगठन के दूसरे प्रमुख पद के लिए जब चुनाव होता है तो कोई विशेष अनुष्ठान नहीं होता है और न ही कोई दिखावा होता है।

इस चुनाव की प्रक्रिया में पूरी केंद्रीय कार्यकारिणी, क्षेत्र व प्रांत के संघचालक, कार्यवाह व प्रचारक और संघ की प्रतिज्ञा किए हुए सक्रिय स्वयंसेवकों की ओर से चुने गए प्रतिनिधि शामिल होते हैं।

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