नई दिल्ली—बिहार के भागलपुर जिले से जुड़े सृजन घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कल देर रात चार और मामले दर्ज किए हैं। इसमें कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें कुछ पूर्व बैंक अधिकारी व सृजन महिला विकास समिति के अधिकारी शामिल हैं। इन आरोपियों के बारे में कहा गया है कि उन्होंने साजिश रचकर धोखाधड़ी की। उल्लेखनीय है कि अभी तक इस मामले में सीबीआई ने 14 मामले दर्ज किए हैं।

यह मामला 2017 के दौरान उजागर हुआ था। उस वक्त कहा गया था कि एनजीओ सृजन महिला सहयोग समिति के खाते में सरकारी फंड की भारी भड़कम राशि 2004 से लेकर 2014 तक ट्रांसफर होती रही। इस एनजीओ का दफ्तर भागलपुर के सबौर ब्लॉक में स्थित है। जानकारी के मुताबिक एनजीओ की ओर से भागलपुर जिले में महिलाओं को व्यवसायिक प्रशिक्षण दिया जाता था। लेकिन आरोप के मुताबिक जिले के विभिन्न सरकारी विभाग के खातों की राशि सरकारी कर्मियों की मिलीभगत से एनजीओ के खाते में डाला जाता रहा। इसमें बैंक के कर्मी भी शामिल थे।

बैंक के कर्मियों की मिलीभगत से एनजीओ फर्जी बैंक स्टेटमेंट प्राप्त करता रहा और पैसे लेता रहा। उल्लेखनीय है कि इस एनजीओ की संस्थापक मनोरमा देवी थी। उनकी मौत के बाद उनके परिवार के सदस्यों में मतांतर होने लगा और इसके चलते घोटाला सामने आ गया। 03 अगस्त 2017 को सरकारी विभाग की ओर से जारी 10.32 करोड़ के चेक के बाउंस होने के बाद घोटाला सामने आ पाया।

घोटाले को सामने लाने में मनोरमा के पारिवारिक सदस्यों की भागेदारी अहम रही। जब यह घोटाला सामने आया तो नीतीश कुमार लालू से अलग होकर भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना चुके थे। इसलिए लालू ने उन पर पूरजोर हमला बोला था।