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Thursday 2 April 2020

कोरोनावायरस काले विपरीतबुद्धिः का शर्तिया इलाज

इस भयावह व विकराल काल में जासूस विजय बनकर बाहर जाकर यह देखने की जरूरत बिलकुल नहीं है कि प्रशासन अपना काम ठीक कर रहा है या नहीं

News

Satish Sharma
Satish Sharmahttp://thesatishsharma.com/
Chartered accountant, independent columnist in newspapers, former editor of Awaz Aapki, activist in Anna Andolan, based in Roorkee

ऐसे समय में जब चीन के संक्रामक कोरोनावायरस ने पूरे देश के तथकथित इंसानों को अपने घर के अन्दर बंद करा दिया है तो अकेलेपन में उन सभी इंसानों के अन्दर का जानवर बाहर निकल कर आने के लिए बेताब है। कुछ लोगों के अन्दर का बन्दर उन्हें उछल उछल कर बाहर जाने के लिए कह रहा है लेकिन अधिकतर मामलों में बाहर पुलिस का मुफ्त में टैटू बनाने का प्रोग्राम देखकर बन्दर पिंजरे में रहना स्वीकार कर चुका है। हालांकि ऐसे में भी कुछ लोग बाहर सड़कों पर निकल रहे हैं, यकीन मानिये ये लोग दिल से सच्चे समाजसेवी है। इन लोगों को अपने सुविधापूर्वक बैठने से ज्यादा आपके मनोरंजन की चिंता है।

कुछ शादीशुदा लोग जो लम्बे समय से दुम दबाये श्वान बन चुके थे अब उनके अन्दर का शेर जाग्रत हो चुका है। लेकिन जैसा कि हर शादीशुदा आदमी के साथ होता है, शेर की मूंछ और पूंछ खींचने वाले एक/दो छोटे-छोटे शावक भी उसी घर में भेजकर प्रकृति ने संतुलन स्थपित किया है। जैसे ही शेर दहाड़ता है एक छोटा सा बच्चा उसकी पूंछ खींच कर भाग जाता है। ऐसे में व्यक्ति को एहसास हो जाता है कि पूंछ टांगों के बीच दबाये हुए जीने में ही फायदा है, अन्यथा इन नन्हे शावकों के अलावा घर में एक शेरनी भी है।

खैर, हम आज आपसे यह बात करेंगे कि अगले 21 दिन आप क्या करते हुए समय काट सकते हैं। तो सबसे पहले बात करते हैं कि आपको क्या नहीं करना है —

  • सबसे जरूरी बात, कोरोनावायरस काल में जासूस विजय बनकर बाहर जाकर यह देखने की जरूरत बिलकुल नहीं है कि प्रशासन अपना काम ठीक कर रहा है या नहीं। यह देखने के लिए एक बार घर से बाहर निकले तो यकीन मानिये एक हफ्ते तक घर में भी बैठ नहीं पाएंगे। बाहर निकलने पर पुलिस इस बात का पूरा ध्यान रख रही है कि बैठने का यंत्र पूरी तरह तोड़ दिया जाये और व्यक्ति सोने का काम भी उल्टा लेट कर ही करे।
  • अगर आपकी किराने की दुकान नहीं है तो राशन का अनावश्यक भंडार नहीं करना है। घर में जितना ज्यादा राशन होगा पत्नी आपसे उतना ही बनवाएगी। अगर आपके हाथ का खाना खाने की हिम्मत परिवार में किसी में नहीं भी है तो भी राशन ज्यादा होने पर पत्नी के हाथों से बने उलटे सीधे पकवान बनने पर खाने की हिम्मत शायद ही आप में हो। समस्या खाना खाने में नहीं है, समस्या खाने का नाम पता करने में है। और तारीफ तो करनी ही होती है, खाना भले ही कैसा भी बना हो। इसलिए अनावश्यक राशन घर में न रखें। जितना ज़रूरी है उतना ज़रूर रखें।
  • घर के लोगों से मुंह चढ़ाकर बात बिलकुल नहीं करनी है। वह दिन बीत गए हैं जब आप घर से नाराज होकर ऑफिस जा सकते थे। अब अगर यह गलती की तो इस नवरात्र में महिषमर्दिनी के अवतार के अवतरण की पूरी पूरी संभावनाएं होंगी और अगले महिषासुर आप ही हैं।
  • खाली बैठे नहीं रहना है। हमेशा कुछ न कुछ करते रहिये। यकीं मानिये बड़े से बड़े मंत्री, प्रधानमंत्री (यक़ीनन भारत के नहीं), मेयर आजकल घर में बर्तन मांजकर टाइमपास कर सकते हैं तो आप कोई बड़ी तोप नहीं है। बर्तन मांजना पसंद नहीं है तो आप पोचा लगा सकते हैं, झाड़ू लगा सकते हैं लेकिन खाली बैठकर तोंद मत बढाइये क्योंकि जितना वजन अभी आप बढ़ाएंगे उतना ही वजन आपको उठाना पड़ेगा। कोरोनावायरस टेम्पोरेरी है लेकिन वजन परमानेंट होगा।

अब जबकि आप जन चुके हैं कि क्या नहीं करना है तो उम्मीद है आप बिलकुल खाली होंगे तो अब बात करते हैं कि आप क्या कर सकते हैं —

  • झाड़ू पोछा कर सकते हैं। डिटेल में बताया जा चुका है।
  • रात को जल्दी सो जाएँ क्योंकि सुबह जल्दी उठकर आराम भी करना है।
  • वो किताब याद है जिसे आप लेकर आये थे लेकिन घर में आते ही तलाक दे दिया था, उस से दोबारा सम्बन्ध स्थापित करने की कोशिश कीजिये। खुद पर भरोसा रखें और इस रिश्ते को अजाम तक पहुंचाएं।
  • पड़ोस के अंकल याद हैं? वही, जो सुबह सुबह शेषनाग से कम्पीटीशन करते हुए फूं-फां करते हुए सांस खींचते हैं। शरीर को हास्यास्पद रूप से तोड़ते मरोड़ते हैं और फनी-फनी पोजीशन बनाते हैं। आप को वही अंकल बनना है। बनकर देखिये, अच्छा लगेगा।
  • घर का एक कोना जहाँ आप कभी नहीं गए, वहां जाकर देखिये। कुछ कीजिये, कुछ सीखिए। किसी से बदला लेना हो तो उस कोने में काम भी कीजिये। अरे हाँ, उस कोने का नाम बताना तो मैं भूल ही गया। उसे किचन कहते हैं।
  • कोई भी नई आदत पड़ने में 21 दिन लगते हैं। कुछ भी ट्राई कीजिये। इंग्लिश स्पीकिंग, फोर्क-नाइफ से खाना खाना, कुछ लिखना, फोटोग्राफी, कैलीग्राफी कुछ भी। कुछ सीखिए जरुर।

और अंत में, बिना मजाक के यह मुश्किल समय है, परीक्षा का समय है। परीक्षा पर खरे उतरिये। अपने लिए, अपने परिवार के लिए। जब कोरोनावायरस संक्रमण का ख़तरा हो, ऐसे में आपका बार-बार बाहर जाना, बेवजह की उत्सुकता, आपके परिवार को इस महामारी का शिकार बना सकती है।

किसी भी परिवार के किसी भी सदस्य को कोरोनावायरस इन्फेक्शन होने पर परिवार उसे केवल विदा कर सकता है, बिना गले लगे, शायद बिना देखे भी। अगर वह व्यक्ति ठीक हुआ तो आप उसे दोबारा गले लगा सकते हैं। ऐसा न होने पर अंतिम संस्कार भी सरकार स्वयं करेगी। अपनी और अपने परिवार की मुश्किलें न बढ़ाएं। पूरी जिंदगी है सब कुछ करने के लिए। अभी केवल संयम करें और घर से बाहर न निकलें।

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