Tuesday 25 January 2022
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कम कपड़े पहनने वाली महिलाओं के कारण कोरोना संकट: मौलाना तारीक़ जमील

मौलाना तारिक जमील ने अपने संबोधन में कहा कि अगर 'राष्ट्र में झूठ बोला जा रहा है, बेईमानियां की जा रही हैं, जहां लड़कियां नाच रही हों और कम कपड़े पहनती हों, उस पर कोरोना जैसी विपत्ति आनी ही है

पाकिस्तान के जाने माने मौलवी तथा तब्लीगी जमात से ताल्लुक़ रखने वाले मौलाना तारीक़ जमील का कहना है कि दुनियाभर में जो कोरोनावारस का संकट मानवता पर मंडराया है, उसके पीछे महिलाओं द्वारा किए जाने वाले ‘गलत काम’ है। महिलाओं पर यह आपत्तिजनक कमेंट मौलाना तारिक जमील ने लाइव टेलीविजन पर किया, जिसमें देश के प्रधानमंत्री इमरान खान भी मौजूद थे।

मौलाना तारीक़ जमील के धार्मिक उपदेशों को पाकिस्तान के साथ-साथ भारत में भी काफी सुना जाता है। पाकिस्तान में इस मौलाना को धर्मगुरुओं में ऊंचा स्थान हासिल है। इसीलिए कोरोनावायरस के खिलाफ फंड जुटाने के लिए कुछ दिन पहले हुए कार्यक्रम में प्रधानमंत्री इमरान खान और अन्य के साथ वह भी शामिल हुए थे और सभी ने उनके नेतृत्व में ईश्वर से कोरोना से मुक्ति के लिए प्रार्थना की थी।

मौलाना तारीक़ जमील ने अपने संबोधन में कहा कि अगर ‘राष्ट्र में झूठ बोला जा रहा है, बेईमानियां की जा रही हैं, जहां लड़कियां नाच रही हों और कम कपड़े पहनती हों, उस पर कोरोना जैसी विपत्ति आनी ही है।’ उन्होंने विशेषरूप में मीडिया पर देश में झूठ फैलाने का आरोप लगाया।

बाद में मीडियाकर्मियों की आपत्ति पर उन्होंने कहा कि वह मीडिया से माफी मांगते हैं उनकी जुबान फिसल गई थी। लेकिन महिलाओं पर टिप्पणी पर उन्होंने कुछ नहीं कहा।

मौलाना की महिलाओं के बारे में टिप्पणी पर एक स्थानीय ने अपने संपादकीय में लिखा, मौलाना द्वारा यह कहना कि इस वैश्विक महामारी के लिए महिलाएं जिम्मेदार हैं, न केवल जानकारी का अभाव है बल्कि भड़काने वाला है। यह बयान बहुत परेशान करने वाला है, सिर्फ इसीलिए नहीं कि यह महिला विरोधी भावना से जुड़ा है बल्कि इसे बहुत ऊंचे मंच से बिना किसी रोक टोक के कहने दिया गया. मौलाना को माफी मांगनी चाहिए।

अधिकारी कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने उनके इस बयान को मुस्लिम बहुल देश में आधी आबादी महिलाओं के खिलाफ ‘‘संवेदनहीन और अपमानजनक” करार दिया। बैरिस्टर और कानून एवं न्याय संसदीय सचिव मलीका बोखारी ने ट्वीट किया, ‘‘ महामारी के प्रसार को कभी भी और किसी भी परिस्थिति में किसी महिला की धर्मनिष्ठता या नैतिकता से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि इस तरह का संबंध स्थापित करना खतरनाक है जहां महिलाओं के खिलाफ अपराध जारी है और उसपर कोई सजा नहीं होती। संघीय मानवाधिकार मंत्री शीरीन मजरी ने कहा, ‘‘ हम इस तरह के भद्दे आरोपों के बहाने महिलाओं को निशाना बनाने को स्वीकार नहीं कर सकते हैं। हमने पाकिस्तान के संविधान में प्रतिष्ठापित अपने अधिकार के लिए कठिन लड़ाई की है।”

पाकिस्तान की महिलाओं के खिलाफ मौलाना की बेतुकी टिप्पणी की आलोचना करते हुए मजरी ने कहा कि यह या तो महामारी के बारे में अज्ञानता को दर्शाता है या गलत मानसिकता को जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है। आसमा जहांगीर विधि सहायता प्रकोष्ठ की निदेशक निदा अली ने कहा कि लॉकडाउन में रह रही महिलाओं को समुदाय से सुरक्षा की जरूरत है।

उन्होंने कहा, सरकार ने तारीक़ जमील का व्यापक टेलीविजन कार्यक्रम चलाया, जिसमें न केवल महिलाओं पर आपत्तिजनक बात कही गई, बल्कि उन्हें और उनके व्यक्तिवादी कार्यों को ईश्वर का प्रकोप और कोविड-19 महामारी के रूप सजा होने की घोषणा की गई। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने भी जलील के बयान को आपत्तिजनक और अस्वीकार्य करार दिया।

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