मनमोहन के घर हुई बैठक में कांग्रेस की राय, जम्मू कश्मीर में जल्द हों चुनाव

दूसरी ओर सूत्रों के अनुसार जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री व पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती पिछले दो दिनों से राजधानी दिल्ली में मौजूद हैं और दोनों पार्टी के नेताओं के बीच चर्चा का दौर जारी है

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नई दिल्ली— जम्मू-कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और पीडीपी के बीच गठबंधन टूटने और राज्य में राज्यपाल शासन लगाए जाने के बाद अब एक बार फिर राज्य में सरकार बनाए जाने को लेकर अटकलें व समीकरणों को लेकर चर्चा शुरु हो गई हैं। इसी सिलसिले में सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के आवास पर जम्मू-कश्मीर के लिए कांग्रेस नीति नियोजन समूह की बैठक हुई।

बैठक में मनमोहन सिंह के साथ राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम, जम्मू-कश्मीर प्रभारी अम्बिका सोनी, डॉ कर्ण सिंह, गुलाम अहमद मीर आदि नेता मौजूद रहे। बैठक के बाद अम्बिका सोनी ने कहा, ‘हमारी मांग है कि राज्य में जल्द से जल्द चुनाव हो। हम अपनी बात लेकर राज्य के लोगों तक जाएंगे।’ बैठक को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस गठबंधन पर विचार कर रही है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पीडीपी ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने की पहल की है। हालांकि कांग्रेस नेता इसे सिरे से खारिज कर रहे हैं। दूसरी ओर सूत्रों के अनुसार जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री व पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती पिछले दो दिनों से राजधानी दिल्ली में मौजूद हैं और दोनों पार्टी के नेताओं के बीच चर्चा का दौर जारी है। ये भी कयास लगाये जा रहे हैं की मुफ्ती यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर सकती हैं। इतना ही नहीं मंगलवार को जम्मू-कश्मीर में भी दोनों पार्टी के नेताओं की बीच बैठक प्रस्तावित है। उसमें जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, जम्मू-कश्मीर प्रभारी अंबिका सोनी के शामिल होने की संभावना है।

दरअसल दोनों के बीच चर्चा का मसला केंद्र की ओर से राज्यपाल एन एन वोहरा की जगह किसी और राज्यपाल की नियुक्ति और महत्वकांक्षी विधायकों के टूटने की आशंका है। इस संबंध में अम्बिका सोनी कहा, ‘पीडीपी के साथ गठबंधन का कोई सवाल ही नहीं है। हमने पहले भी राज्य के करीब 100 नेताओं को बैठक में बुलाया था। इसमें कांग्रेस पार्टी के सांसद, विधायक, पूर्व सांसद-विधायक समेत कई लोग शामिल हुए थे।’

बैठक में शामिल हुए जीए मीर ने कहा कि 2014 में कांग्रेस ने अपनी भूमिका निभाई थी लेकिन स्थिति अब बदल गई है। इसने इस मामले में न तो पहले कोई प्रयास किया न ही अब हो रहा है। इस संबंध में राज्यपाल को संवैधानिक निर्णय लेना चाहिए। उल्लेखनीय है कि राज्य में कांग्रेस के पास 12 विधायक हैं। पीडीपी के पास 28 विधायक हैं जबकि जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के लिए विधानसभा में 44 विधायकों की आवश्यकता होती है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि कांग्रेस किसी भी सूरत में जम्मू-कश्मीर सरकार नहीं बनाएगी। पार्टी दोबारा चुनाव चाहती है।