सर्जिकल स्ट्राइक

नई दिल्ली | यूपीए सरकार के दौरान हुई सर्जिकल स्ट्राइक्स के कांग्रेसी दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए जनरल वीके सिंह ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस को झूठ बोलने की आदत है। “क्या आप मुझे बताएंगे कि मेरे बतौर सेना प्रमुख कार्यकाल के दौरान किस तथाकथित सर्जिकल स्ट्राइक की बात आप कर रहे हैं?” अवसरप्राप्त सेना प्रमुख व वर्तमान केन्द्रीय मंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को संबोधित करते हुए ट्विटर पर पूछा

“निश्चित रूप से आपने एक और कहानी का आविष्कार करने के लिए किसी Coupta को काम पर रखा होगा,” जनरल सिंह ने लिखा।

जब से इन्डियन एक्सप्रेस में एक स्टोरी छपी थी कि जनरल सिंह के नेतृत्व वाले भारतीय सेना की एक यूनिट ने यूपीए सरकार गिरा कर सत्ता पर क़ाबिज़ होने की कोशिश की थी तब से अखबार के तत्कालीन संपादक शेखर गुप्ता की तरफ़ कई सोशल मीडिया यूज़र्स “Coupta” के नाम से इशारा करते हैं। उनका यह मानना है कि सरकार के ख़िलाफ़ उस समय जनरल सिंह की सही उम्र पर चल रहे विवाद के कारण मीडिया के सहारे कांग्रेस-नीत सरकार ने तत्कालीन सेना प्रमुख को बदनाम करने की कोशिश की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय सेना की संरचना और इसका कंट्रोल कुछ इस प्रकार का है कि यहाँ सेना द्वारा तख़्ता पलटना संभव ही नहीं है।

जनरल सिंह के ट्विटर पर दिए बयान से पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यह टिप्पणी की थी कि कांग्रेस के राज में कई बार सर्जिकल स्ट्राइक्स हुए थे लेकिन उन्होंने नरेन्द्र मोदी सरकार की तरह इसका ढिढोरा नहीं पीटा था।

पर आज केवल जनरल सिंह ने नहीं बल्कि पूर्व सेनाध्यक्ष बिक्रम सिंह ने भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि भारतीय सेना द्वारा पहले ऐसे प्रयास किए गए हैं। “यह ज़रूर कही-सुनी बात है,” जनरल बिक्रम सिंह ने कहा।

कांग्रेस के भाग्य में पर आज और ज़लालत लिखी हुई थी। इसके अलावा करगिल युद्ध के दौरान सेना प्रमुख रहे जनरल वेद प्रकाश मलिक का बयान आया। उन्होंने भी मनमोहन सिंह के बयान की मुख़ाल्फ़त की। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी घटना का उन्हें स्मरण नहीं है जहाँ तत्कालीन राजनैतिक नेतृत्व ने सशस्त्र बलों को इस तरह की कार्रवाई के लिए कहा था सिवाय 1984 में एक मर्तबा के जब सशस्त्र बलों द्वारा ऐसी योजना को स्वीकृति दी गई थी कि सियाचेन से पाकिस्तान की सेना को खदेड़ दिया जाए और सोल्टोरो रेंज पर क़ब्ज़ा कर लिया जाए।

मनमोहन सिंह ने पहले कहा था कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के कार्यकाल के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों को बाहरी खतरों का जवाब देने के लिए एक स्वतंत्र हाथ मिला।

“हमारे कार्यकाल में कई सर्जिकल स्ट्राइक हुए। पूर्व पीएम ने दावा किया कि सैन्य अभियानों का मकसद रणनीतिक विद्रोह करना था और भारत विरोधी ताकतों को वोट देने की कवायद का जवाब देना था।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी का सैन्य अभियानों से चुनावी लाभ हासिल करने का प्रयास ‘शर्मनाक और अस्वीकार्य’ है।

ताकि भारतीय जनता पार्टी को राष्ट्रवाद के मुद्दे पर लोकसभा चुनाव में कोई फ़ायदा न पहुँचे, कांग्रेस ने इससे पहले या तो यह दावा किया कि नरेन्द्र मोदी सरकार के कार्यकाल में कोई सर्जिकल स्ट्राइक हुई ही नहीं या फिर यह कि सर्जिकल स्ट्राइक कोई बात नहीं है; ऐसा उनके ज़माने में भी कई बार हुआ है। पार आज तक अपने दावे की पुष्टि के लिए कोई ठोस सबूत देने में कांग्रेस नाकाम रही है।