26 C
New Delhi
Friday 5 June 2020

हिन्दू माँ-बेटी के शव बरामद, TMC से जुड़े 2 मुस्लिम गिरफ्तार

गाँवों में लोगों के बीच यह स्पष्ट है कि यह लव जिहाद का मामला है जिसके तहत हिन्दू लड़कियों को फँसाकर उनके धर्मांतरण के बाद उनसे शादी कर ली जाती है, ज़बरदस्ती की जाती है और बात न बने तो उन्हें मौत के घाट उतार दिया जाता है

in

on

18 फरवरी को पश्चिम बंगाल के हल्दिया में एक नदी के किनारे से माँ-बेटी — रिया दे और रमा दे — के शव बरामद किए गए थे। व्यापक जांच के बाद मृतक रिया दे के कथित प्रेमी शेख़ सद्दाम हुसैन और साथी शेख़ मंज़ूर को हिरासत में ले लिया गया। सद्दाम ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा पूछताछ के बाद अपराध क़ुबूल कर लिया है। हालांकि बंगाल के शहरों में घटना को मामूली अपराध की तरह देखा जा रहा है, गाँवों में लोगों के बीच यह स्पष्ट है कि यह लव जिहाद का मामला है जिसके तहत हिन्दू लड़कियों को फँसाकर उनके धर्मांतरण के बाद उनसे शादी कर ली जाती है, ज़बरदस्ती की जाती है और बात न बने तो उन्हें मौत के घाट उतार दिया जाता है।

रिया दे और रमा दे न्यू बैरकपुर क्षेत्र के एक हिन्दू परिवार से थे। दुर्गाचौक इलाके में रहने वाले शेख़ सद्दाम हुसैन पेशे से ठेकेदार हैं और बच्चों के साथ शादीशुदा हैं। उसने रिया दे को बताया कि वह कुंवारा है; उसने रिया के साथ एक रोमांटिक अफेयर शुरू किया और, पुलिस की मानें तो, सद्दाम ने रिया से अपनी शादी का सच छुपाया और उसे शादी का झूठा आश्वासन भी दिया।

(बाएँ) रिया दे, (बीच में) सद्दाम और (दाएँ) रमा

लड़की की माँ रमा दे को इस संघ के बारे में पता था।

लेकिन लंबे समय तक कोर्टशिप के बाद भी सद्दाम ने शादी की मंशा का कोई संकेत नहीं दिखाया। फिर माँ-बेटी की जोड़ी ने उसे शादी के लिए मनाना शुरू कर दिया, जिससे सद्दाम चिढ़ गया और उसने उनकी हत्या की योजना बनाकर उसे अंजाम दिया।

योजना के अनुसार सद्दाम और उसके साथी मंज़ूर ने रिया और उसकी माँ रमा को हल्दिया के दुर्गाचौक अस्पताल रोड में एक घर में रहने के लिए आमंत्रित किया। सद्दाम ने खाने में नशे की दावा मिला राखी थी जिससे रिया और रमा दोनों बेहोश हो गए। सद्दाम और मंज़ूर फिर उन्हें गाँव से गुज़रती नदी तक ले गए और वहाँ उन्हें आग लगा दी।

इससे स्थानीय लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ। उन्होंने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक दोनों माँ-बेटी मर चुकी थीं।

पुलिस के आने के बाद उनके शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पोस्टमार्टम से साबित हुआ कि मृत्यु के बाद शवों को जलाया नहीं गया था बल्कि रिया और रमा को उनके जीवित रहते आग के सुपुर्द कर दिया गया था।

रिया और रमा की अधजली लाशें यहाँ मिली थीं

पूर्व-मेदिनीपुर पुलिस स्टेशन के पुलिस अधिकारियों के पास कुछ शवों पर हरे-सुनहरे बालों के अलावा सबूत के नाम पर कुछ नहीं था और प्रारंभिक संकेतों के नाम पर स्वास्तिक के आकार में एक जोड़ी झुमके थे। उन्होंने देखा कि इन झुमकों में ’SJP’ और ’KDM’ के निशाँ बने हुए थे। उन्होंने सोशल मीडिया का उपयोग किया और जनता से जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की। कई कॉल्स के बाद किसीने पुलिस को बताया कि ये झुमके न्यू बैरकपुर इलाके में रहने वाली रिया और रमा की हैं।

पड़ोसियों ने पुष्टि की कि दोनों 4-5 दिनों से घर पर नहीं दिखे थे। उन्होंने पुलिस को अपने फोन नंबर भी उपलब्ध कराए थे, जिससे पता चला कि माँ-बेटी की जोड़ी को अंतिम बार हल्दिया में देखा गया था।

कॉल सूची की जांच की गई और यह पाया गया कि नंबर से किया गया आखिरी कॉल्स रात में शवों के बरामद होने से पहले के थे। कॉल लिस्ट से ही आख़िर सद्दाम का ठिकाना मिला।

जब पुलिस ने उसे पकड़ा, सद्दाम के हाथ में पट्टी बंधी हुई थी और वो अस्पताल में भर्ती था। पूछताछ के तहत सद्दाम हुसैन टूट गया और उसने अपना अपराध स्वीकार किया। उसने क़ुबूल किया कि वह शादी के दबाव से तंग आ चुका था और उसने रिया और रमा से छुटकारा पाने के लिए उनका खून किया।

दुर्गाचौक के निवासियों ने सद्दाम और मंज़ूर की पहचान आसानी से कर ली। उन्होंने बताया कि ये दोनों मुसलमान युवा बरसों से “सक्रिय तृणमूल कार्यकर्ता” रहे हैं। राज्य की पुलिस ने इसकी पुष्टि करने से मना कर दिया। पर बंगाल के स्वतंत्र नागरिक कार्यकर्ताओं ने पुष्टि की है कि सद्दाम के शक्तिशाली टीएमसी नेताओं के साथ संबंध हैं।

दोनों अभियुक्तों को अदालत में पेश किया गया और 14 दिनों के लिए हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस का दावा है कि सद्दाम और उसके साथी शेख़ मंज़ूर के अलावा इस हत्या में और भी लोग शामिल हैं। जांच अभी जारी है।

सूत्रों ने बताया कि इस हत्या के चलते इलाके में हिन्दू और मुसलमान समुदायों के बीच माहौल में तनाव है।

1,209,635FansLike
180,029FollowersFollow
513,209SubscribersSubscribe

Leave a Reply

For fearless journalism

%d bloggers like this: