Monday 18 October 2021
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बंगाल के नतीजे देख क्या पवार खड़ा कर पाएंगे तीसरा मोर्चा?

भाजपा के कैलाश विजयवर्गीय के अनुसार पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी को मिली अप्रत्याशित जीत के पीछे एनसीपी के मुखिया शरद पवार का भी हाथ है

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पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों ने देश की भाजपा विरोधी पार्टियों की न केवल हिम्मत बढ़ाई है बल्कि साथ मिलकर तीसरा मोर्चा बनाने की उनकी कोशिशों को भी बल मिला है। थर्ड फ्रंट की चाह रखने वालों के लिए कोरोनावायरस की लगातार प्रहार के बीच पश्चिम बंगाल के नतीजे किसी संजीवनी से कम नहीं हैं।

पवार होंगे बंगाल के परिणाम से प्रभावित?

महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी सरकार के संयोजक और एनसीपी के मुखिया शरद पवार की अगुवाई में तीसरे मोर्चे की बात करने वाली शिवसेना की भी बांछें खिली हुई हैं, हालांकि शिवसेना के सांसद और प्रवक्ता अरविंद सावंत ने कहा कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता कोरोना महामारी के खतरे को जल्द से जल्द खत्म करना है। इसके बाद ही दूसरे किसी विषय पर बातचीत शुरू हो पाएगी।

कुछ महीने पहले शरद पवार ने कहा था कि देश में अब तीसरे मोर्चे यानी थर्ड फ्रंट की ज़रूरत है। पवार ने तब यह भी बताया था कि देश के विभिन्न दलों से इस बाबत बातचीत भी की जा रही है, हालांकि इस मोर्चे का आकार कैसा होगा, इस पर कोई बातचीत तब नहीं हो पाई थी।

शिवसेना की तरफ़ से भी यह बात कही गई थी कि तीसरे मोर्चे की अगुवाई शरद पवार को करनी चाहिए क्योंकि वे देश के सबसे सीनियर और अनुभवी नेता हैं।

लेकिन जहाँ पांच राज्यों व केंद्र-शासित प्रदेश में कांग्रेस को करारी शिकस्त का मुँह देखना पड़ा है, वह तीसरे मोर्चे के पक्ष में नहीं है। वहीं महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले की माने तो कांग्रेस ही देश में भाजपा का विकल्प है और यह बात अब लोगों को धीरे धीरे समझ में भी आने लगी है।

भाजपा ने केवल देश को लूटने और बर्बाद करने का काम किया है। पटोले ने कहा कि क्षेत्रीय पार्टियां भी अपना अपना दमखम दिखाने के लिए फ्रंट बनाने की बातें करती रहती हैं लेकिन इनका कोई खास असर नहीं होता है। थर्ड फ्रंट बनाने का असफल प्रयोग देवगौड़ा भी कर चुके हैं।

हाइलाइट्स:

  • पश्चिम बंगाल की जीत के बाद थर्ड फ्रंट बनाने की सुगबुगाहट तेज़
  • शरद पवार बीजेपी विरोधी पार्टियों को एकजुट करने की कोशिश में जुटे
  • कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा कि फेल होगा थर्ड फ्रंट
  • थर्ड फ्रंट के नेता को सभी मिलकर चुनेंगे, शरद पवार और ममता बनर्जी का नाम सबसे आगे

थर्ड फ्रंट देश की ज़रूरत

महाराष्ट्र में समाजवादी के विधायक और वरिष्ठ नेता अबू आसिम आज़मी ने कहा है कि थर्ड फ्रंट बनाने का प्रयास ज़रूर होना चाहिए। अगर देश में “नफ़रत फैलाने वाली” भाजपा को रोकना है तो तीसरा मोर्चा जरूरी है। इसके लिए क्षेत्रीय पार्टियों को अपने मनमुटाव भूलकर एक साथ आना होगा। तीसरे मोर्चे को लेकर सपा नेता अखिलेश यादव भी अपनी सहमति दे चुके हैं।

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप नेता अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी भी पवार की इस मुहिम में शामिल होने की बात कह चुके हैं। पर बिहार में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव इस मुद्दे पर अभी भी कांग्रेस के पहलू में नज़र आ रहे हैं। ऐसा ही हाल डीएमके प्रमुख एम के स्टॅलिन और झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख और सीएम हेमंत सोरेन का भी है।

पार्टियाँ तय करेंगी थर्ड फ्रंट का नेता

थर्ड फ्रंट के मुद्दे पर बात करते हुए महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री और एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि शरद पवार देश में सभी पार्टियों को एक साथ लाने का प्रयास कर रहे हैं जिससे थर्ड फ्रंट बन सके। यह सभी लोग भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए प्रयास करेंगे। इस थर्ड फ्रंट का नेता कौन होगा? यह सभी पार्टियां मिलकर तय करेंगी।

शरद पवार ने पहले ही कहा है कि उन्हें नेता बनने में कोई खास दिलचस्पी नहीं है। ऐसे में ममता बनर्जी को भी मौका मिल सकता है। आपको बता दें कि शिवसेना ने शरद पवार को यूपीए के चेयरमैन बनाने की भी वकालत की थी। जिसका कांग्रेस ने जमकर विरोध किया था।

दीदी की बंगाल जीत में पवार का हाथ?

भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के अनुसार पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी को मिली अप्रत्याशित जीत के पीछे एनसीपी के मुखिया शरद पवार का भी हाथ है। परन्तु दीदी को पवार का समर्थन जग जाहिर है। पवार ने तमाम भाजपा विरोधी पार्टियों से चुनाव में दीदी को मदद करने की अपील भी की थी।

अब ममता बनर्जी और पवार इस मोर्चे के लिए संयुक्त प्रयास कर सकते हैं।

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