हिंदी फिल्मों की कमाई के लिहाज से 2018 की पहली छमाही का हिसाब शानदार रहा है। अब तक रिलीज हुईं करीब दो दर्जन फिल्मों में से महज छह को फ्लॉप की श्रेणी में रखा जा सकता है। जब फिल्में अपनी लागत का आधा हिस्सा भी वसूलने में कामयाब नहीं हो पाती हैं, तो उन्हें फ्लॉप मान लिया जाता है। अगर प्रदर्शित होने के पहले सप्ताहांत में कमाई का लेखा-जोखा देखें, तो संजय लीला भंसाली की पद्मावत ने 114 करोड़, अहमद खान की बागी-2 ने 73.10 करोड़, राजकुमार गुप्ता की रेड ने 41 करोड़, आर बाल्की की पैडमैन ने 40 करोड़ और वीरे दी वेडिंग ने 36.52 करोड़ कमाए। यह हिसाब रिलीज के पहले शुक्रवार, शनिवार और रविवार का है। देश और बाहर दोनों जगह पद्मावत की कमाई 500 करोड़ रुपये से अधिक है। लव रंजन की सोनू के टीटू की स्वीटी ने अपने प्रदर्शन के चौथे हफ्ते में 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया था। रेड की कुल आमदनी जहां 103 करोड़ से ऊपर रही, तो बागी-2 लगभग 165 करोड़ कमाने में सफल रही। मेघना गुलजार की राजी भी सौ करोड़ पार कर बॉक्स ऑफिस पर अब भी जमी हुई है।

यह तथ्य भी दिलचस्प है कि सोनू के टीटू की स्वीटी की लागत सिर्फ 37 करोड़ थी और बागी-2 का कुल बजट 60 करोड़ से कम था। अच्छे कथानक और प्रभावी प्रस्तुति के बावजूद ओमेर्ता, अय्यारी, कालाकांडी, 1921, दिल जंगली और मुक्काबाज जैसी कुछ फिल्में दर्शकों को थियेटर तक ला पाने में विफल रहीं, हालांकि इन्हें समीक्षकों की भरपूर सराहना मिली। कालाकांडी और दिल जंगली का बजट 20 करोड़ के आसपास था, लेकिन उनकी कमाई क्रमशः 4.75 और 1.15 करोड़ के करीब ही रही। 65 करोड़ की लागत से बनी अय्यारी 17.5 करोड़ ही वसूल पायी। कुछ हिंदी फिल्मों ने देश के बाहर भी अच्छी कमाई की है। विशाल पंड्या की हेट स्टोरी-4 ने आठ करोड़, तो अभिनय देव की ब्लैकमेल और शूजित सरकार की अक्टूबर ने नौ-नौ करोड़ रुपये अर्जित किये। प्रोसित रॉय की परी ने 15, नीरज पांडे की अय्यारी और अभिषेक शर्मा की परमाणु ने 17-17, उमेश शुक्ला की 102 नॉट आउट ने 26, सिद्धार्थ मल्होत्रा की हिचकी ने 30, पैडमैन और रेड ने 41, तथा सोनू के टीटू की स्वीटी ने 42 करोड़ रुपये विदेशी बाजार में कमाये हैं. राजी अब तक 65 करोड़ कमा चुकी है, जबकि बागी-२ का आंकड़ा 88 करोड़ रहा है।

पद्मावत की कमाई तो 285 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। ये आंकड़े फिल्म जगत के लिए बेहद सकूनदेह हैं। इनसे एक मतलब तो यह निकलता है कि बिना बड़े स्टारों के भी फिल्में अपनी लागत वसूलने के साथ मुनाफा भी कमा सकती हैं। सफल निर्देशकों में अनेक नाम नये हैं। इन फिल्मों की विषय-वस्तु भी अलग-अलग है और कई फिल्मों में बेमानी तरीके से ग्लैमर का तत्व भी नहीं डाले गए हैं। इन कामयाबियों से इंडस्ट्री में संघर्षरत लोगों को हौसला तथा निर्माताओं और स्टूडियो को बेहतर विषयों में निवेश करने का साहस मिलेगा। इन सफल फिल्मों ने आने वाली फिल्मों पर दबाव भी बढ़ा दिया है।

रेमो डिसूजा निर्देशित रेस-3 सलमान खान तथा आनंद एल राय की जीरो शाहरुख खान के स्टारडम के भरोसे तो चल जाएगी, परंतु पुनीत मल्होत्रा की स्टूडेंट ऑफ द ईयर-2, कृष द्वारा निर्देशित मणिकर्णिका- झांसी की रानी, और अतुल मांजरेकर की फन्ने खां को स्टार कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद अग्नि-परीक्षा से गुजरना पड़ सकता है। इस साल एक और बड़ी फिल्म लेकर राजकुमार हिरानी आ रहे हैं। हिरानी ने हाल के वर्षों की सबसे कामयाब फिल्में निर्देशित की हैं। उनकी नयी फिल्म अभिनेता संजय दत्त के जीवन पर आधारित है। फिल्म के ट्रेलर को बहुत सराहा गया है। संजय दत्त की विवादित जिंदगी और बड़े स्टारडम को देखते हुए कहा जा सकता है कि इसे बड़ी संख्या में दर्शक मिलेंगे। इस फिल्म में संजय दत्त की भूमिका में रनबीर कपूर हैं। यदि हिंदी सिनेमा ने पहली छमाही के प्रदर्शन को दोहरा दिया, तो यह साल सबसे सफल वर्ष में शुमार किया जायेगा

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