बॉलीवुड भी चाहता है ‘मी टू’ जैसी मुहिम

बीबीसी ने हाल ही में 'बॉलीवुड्स डार्क सीक्रेट' नाम से एक डॉक्यूमेंट्री बनाई है। इसमें दो अभिनेत्रियों राधिका आप्टे और उषा जाधव ने कास्टिंग काउच के बारे में अपने अनुभवों को खुलकर बताया है

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एक सुबह, हैदराबाद जैसा व्यस्त शहर तब रुक गया, जब एक उभरती हुई अभिनेत्री ने तेलुगू फिल्म चेंबर ऑफ कॉमर्स ऑफिस के सामने अचानक अपने कपड़े उतारने लगी। वहां से गुजरती भीड़ के लिए यह दृश्य अकल्पनीय था। भीड़ के लिए यह दृश्य अकल्पनीय था और अभिनेत्री के लिए वह अकल्पनीय था जो उनके साथ घट चुका था जिसका आज न तो कोई सबूत है और न गवाह। उसका कहना था कि इंडस्ट्री में उसे कास्टिंग काउच का शिकार होना पड़ा है। ऐसे में उसको टॉपलेस होकर धरने पर बैठने का एक मात्र रास्ता दिखा। चारों तरफ से ठगे जाने के बाद क्या इस उभरती हुई अभिनेत्री श्री रेड्डी के पास यहीं एक रास्ता बचा था अपनी बात कहने का? कुछ ऐसा ही प्रश्न वहां खड़ी भीड़ में मौजूद हर व्यक्ति के जहन में उभर रहा था। वहां मौजूद मीडिया भी इसी बात की तफ्सील कर रही थी। और श्री जवाब दे रही थी कि उसने यह क्योंकर किया। इस तरह की खबर प्रसारित होने के बाद जितने मुंह उतनी बातें भी होने लगी थी। यही पर यह सवाल भी उठता है कि अगर यह अभिनेत्री अपनी बात इस ढंग से न रखकर साधारण ढंग से रखती, तो क्या उसकी बात इतनी तेजी और प्रमुखता से देश-विदेश में प्रचारित और प्रसारित होती? शायद नहीं। आखिर नंगा सच उद्घाटित करने के लिए नंगेपन से काम लिया गया। यह कोई नई बात नहीं है। अपनी बात रखने के लिए लोग इस ढंग को अपनाते हैं। पर यह सामने वाले के लिए आसान नहीं होता है।

पिछले साल तमिलनाडु के किसानों ने जंतर-मंतर पर अर्धनग्न होकर अपनी बात रखी थी। और मीडिया का अटेंशन पाया। कॉस्टिंग काउच और अपने साथ हुए यौन शोषण के विरोध में श्री रेड्डी का यूं र्निवस्त्र हो जाना लोगों का ध्यान खींचने के लिए था। जिसकी प्रतिक्रिया भी जबरदस्त हुई। किसी ने श्री को प्रचार की भूखी और किसी ने इसको उसका पब्लिसिटी स्टंड करार दे दिया। इसका परिणाम यह निकला कि पुलिस भी श्री को कटघरे में खड़ा करने लगी। तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री के बड़े से बड़े लोगों ने श्री की इस हरकत को फिल्म इंडस्ट्री का अपमान बताया और शर्मनाक घटना कहा। मूवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन यानी एमएए ने उन्हें सदस्यता देने से ही इनकार कर दिया। साथ ही इसके 900 सदस्यों को खबरदार किया कि वे श्री के साथ काम न करें। यहां यह जानना जरूरी है कि तेलुगू फिल्मों में काम करने के लिए एमएए का सदस्य होना जरूरी होता है। तो क्या मान लिया जाए कि फिल्म इंडस्ट्री में कॉस्टिंग काउच या यौन शोषण मंगल ग्रह की बात है? श्री रेड्डी के इस कदम के एक हफ्ते बाद ही करेक्टर आर्टिस्ट सुनीता ने कॉस्टिंग काउच को लेकर बड़ा बयान दिया। सुनीता ने इस इंडस्ट्री से जुड़े फिल्म क्रिटिक कैथी महेश पर आरोप लगाया कि उन्होंने कुछ साल पहले अपने घर बुलाकर रेप करने की कोशिश की थी। यद्यपि इस आरोप के लिए महेश ने सुनीता पर मानहानि का केस भी कर दिया है, लेकिन सुनीता अपनी बात पर कायम हैं।

बीबीसी ने हाल ही में ‘बॉलीवुड्स डार्क सीक्रेट’ नाम से एक डॉक्यूमेंट्री बनाई है। इसमें दो अभिनेत्रियों राधिका आप्टे और उषा जाधव ने कास्टिंग काउच के बारे में अपने अनुभवों को खुलकर बताया है। राधिका तो पहले से ही इस विषय पर अपनी बात रखती रही हैं। लेकिन मराठी भाषा की प्रसिद्ध अभिनेत्री उषा ने बहुत ही चौंकाने वाले खुलासे किए। उनका कहना है कि इस इंडस्ट्री में पावरफुल लोगों द्वारा अभिनेत्रियों से सेक्सुअल फेवर के लिए कहा जाता है। उनसे भी कुछ साल पहले फिल्म में मौका दिए जाने के बाद बदले में कुछ लौटाने के लिए कहा गया। इसी तरह की बात जानीमानी अभिनेत्री कल्कि कोचलिन ने भी इस डॉक्यूमेंट्री में बताई। इस डॉक्यूमेंट्री में अपनी आपबीती बताने वाली कुछ अभिनेत्रियों ने अपनी पहचान जाहिर नहीं की है। सवाल है कि ये सारी अभिनेत्रियां झूठ बोल रही हैं? जब भी कोई अभिनेत्री इस किस्म का सवाल उठाती है या अपनी आपबीती कहती है तो सवाल उसी से किया जाने लगता है कि जब हुआ तब क्यों नहीं, इतने सालों बाद क्यों? हॉलीवुड में मुगल की हैसियत रखने वाले हार्वे विंस्टीन के खिलाफ जब ढेर सारी अभिनेत्रियों ने हैशटैग मी टू के माध्यम से अपने साथ हुए हादसों को सबके सामने लाई तब भी इस किस्म की बातें उठी थी। इस साल जनवरी में हैदराबाद में चल रहे एक कॉन्क्लेव में कन्नड़ अभिनेत्री श्रुति हरिहरन ने ‘सिनेमा में सेक्सिज्म’ टॉपिक पर अपने साथ हुए कास्टिंग काउच की घटना के विषय में बताया। जब वे मात्र अठारह साल की थीं, तभी एक मीटिंग के दौरान उनके साथ जो हुआ वह बहुत ही अप्रिय था। बाद में भी उनके साथ जो घटना हुई, वह भी आश्चर्यजनक है। श्रुति की इस बात को गम्भीरता से लिया गया और कन्नड़ फिल्म चेंबर आफ कॉमर्स ने इसकी जांच की बात कहीं। लेकिन इस संस्था के प्रेसीडेंट सारा गोविंद ने कहा कि श्रुति को यह बात बताने में दस साल क्यों लग गए? श्रुति एक मुकाम पर पहुंचने के बाद यह बात बता रही हैं। यह बात नई अभिनेत्रियों के लिए गलत संदेश देने वाला होगा। यहां यह बात भी देखने वाली है कि जब एक स्थापित अभिनेत्री अपने साथ हुए कॉस्टिंग काउच की घटना पर बात करती है, तो इसे हल्के में नहीं लिया जाता है, पर यही बात श्री रेड्डी कहती है तो इसे सस्ती लोकप्रियता से जोड़कर देखा जाता है। क्या यह समझने के लिए काफी नहीं है कि अपने साथ होने वाले यौन शोषण के बारे में इस इंडस्ट्री की नई लड़कियां चुप क्यों रहती हैं? वास्तव में इसका कारण क्या है? सफेद कॉलर वाला यह अपराध निरंतर जारी कैसे है। विरोध की आवाज आसानी से उठती क्यों नहीं है?

यौन शोषण के आरोप में फंसे हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे विंस्टीन मामले में जब एक पूरा अभियान चला, तब प्रसिद्ध अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने इस मामले की तह तक जाते हुए एक बात कही थी कि मुझे नहीं लगता कि हॉलीवुड में सिर्फ हार्वे विंस्टीन हैं। ऐसी बहुत सी कहानियां हमारे सामने आने वाली हैं क्योंकि यह सिर्फ सेक्सुएलिटी या सेक्स की बात नहीं है, यह पॉवर की बात है। इस पॉवर के तहत हमारी इंडस्ट्री में किसी भी औरत को काम के लिए कोम्प्रोमाइज करने को कहा जाता है। अगर वह इसके लिए राजी नहीं होती है, तो उसे डराया जाता है। यही बात श्री रेड्डी की घटना के बाद राधिका आप्टे भी कहती हैं कि भारतीय फिल्मों में एक अदद मौका बड़ी मुश्किल से मिलता है, इसके लिए हमारे निजी संपर्क, सोसाइटी में हमारी पहुंच और हम कैसे दिखते हैं, ये सब अहम होता है। इन अभिनेत्रियों के अनुभवजनित बातों से जाहिर है कि जल में रहकर मगर से बैर नहीं किया जा सकता है। इस बात को अधिक समझना हो, तो श्री रेड्डी के खुलासे के बाद उसके ऊपर लगाए गए ताबड़तोड़ प्रतिबंधों से जान सकते हैं। श्री के मामले में इस इंडस्ट्री का एक भी बड़ा व्यक्ति खड़ा नहीं हुआ। इंडस्ट्री की इस लॉबी और पावर को भेद पाना हर एक के वश की बात नहीं है। ग्लैमर और सेक्स की छौंक के कारण इस तरह की खबरें मेन स्ट्रीम मीडिया के लिए सनसनी होती हैं, वहीं सोशल मीडिया के लिए यह एक संवेदनशील मुद्दा बन जाता है। जिसका परिणाम हैशटैग मी टू जैसा कंपेन भी निकल आता है। जो बहुत से लोगों के चेहरों से नकाब उतार देता है। इससे बहुत कुछ हो या न हो, पर इतना अवश्य होता है कि इंडस्ट्री में मौजूद कुछ ऐसे लोगों की पहचान हो जाती है और आने लोग सावधान हो जाते हैं। इस तरह के खुलासों से ऐसे लोगों के हौसले भी पस्त होते हैं। आज बालीवुड में भी हैशटैग मी टू जैसी मुहिम चलाने की जरूरत है।

हिन्दुस्थान समाचार/प्रतिभा कुशवाहा

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