बेंगलुरु रीजन की 28 विस सीटों में 27 पर भाजपा है जनता की पहली पसंद

बेंगलुरु रीजन की 28 सीटों में 27 पर लोगों ने अपनी पहली पसंद कांग्रेस के मुकाबले भारतीय जनता पार्टी को बताया है। एक जिस सीट पर पहली पसंद कांग्रेस है, वह चमराजपेट है

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बेंगलुरु— कर्नाटक विधानसभा चुनाव में अपना मत देने और सरकार चुनने का जैसे-जैसे दिन निकट आ रहा है, राज्‍य में तीन प्रमुख पार्टियों में से सत्‍ता किसकी आएगी, इसे लेकर स्‍थ‍ितियां साफ होने लगी हैं। यहां ज्‍यादातर मतदाताओं ने क्षेत्रवार अपनी पहली पसंद बताई है, जिसमें अधिकतर लोग अब भी नोटबंदी और जीएसटी जैसे तत्‍काल प्रभाव दिखाने वाले केंद्रीय निर्णय के बाद भी मोदी सरकार के समर्थन में खड़ी दिखाई दे रही है।

हांलाकि कांग्रेस और जनता दल सेक्‍युलर को पसंद करने वालों की संख्‍या भी कुछ कम नहीं है, लेकिन अधिकतर की पहली पसंद यहां भाजपा से ज्‍यादा इस प्रदेश की जनता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। बेंगलुरु रीजन की 28 सीटों में 27 पर लोगों ने अपनी पहली पसंद कांग्रेस के मुकाबले भारतीय जनता पार्टी को बताया है। एक जिस सीट पर पहली पसंद कांग्रेस है, वह चमराजपेट है।

वैसे देखा जाए तो कर्नाटक की कुल 224 विधानसभा सीटों में से कम से कम 128 पर कभी ना कभी भाजपा जीत हासिल कर चुकी है, इसलिए यहां से इस बार जीत हासिल करना उसके लिए पहले के मुकाबले कुछ आसान है, जबकि बाकी सीटों से अपने 72 प्रत्‍याशियों की पहली सूची में नाम घोषित करने के बाद से जीतने लायक उम्मीदवार की खोज वह अभी कर रही है। नामों पर जल्‍द घोषणा की उम्‍मीद है। इस बार राजधानी, बेंगलुरु से सीधे जुड़ी येलाहंका, केआर पुरम, बायतारायणपुर, यशवानपुर, राजराजेश्वर नगर, दशरहली, महालक्ष्मी लेआउट, मल्लेश्वरम, अनकेकल, बंगलौर साउथ, बममानाहली, महादेवपुर (एससी), जय नगर, बीटीएम लेआउट, पद्मना नगर, बसावनगुड़ी, चिकीपेट, चैमारजेट, विजया नगर, गोविंदागार नगर, राजजी नगर, गांधी नगर, संतनगर, शिवाजी नगर, सीवी रमन नगर, सरवन नगर, पुलाची नगर (एससी) और हिब्ला आदि कुल 28 विधानसभा सीटों से जो आम जनता की राय निकलकर आई है, वह कांग्रेस या जनतादल सेक्‍युलर, महिला सशक्‍तिकरण पार्टी, बीएसपी, एनसीपी या अन्‍य की तुलना में भारतीय जनता पार्टी के साथ ज्‍यादा दिखाई दे रही है।

पिछली बार बेंगलुरु के चमराजपेट विधानसभा से कांग्रेस उम्‍मीदवार जमीर अहमद खान की जीत हुई थी, लेकिन फिर यह जनतादल सेक्‍युलर के साथ मिल गए। इसके कारण से स्‍थानीय जनता में इस वक्‍त दो तरह की बातें अधिक हैं, इसमें कांग्रेस को फिर से जिताने के साथ ही भाजपा के पक्ष में भी बहुत से लोग यहां इस बार खड़े नजर आए। अधिकांश का कहना यही था कि कांग्रेस में प्रत्‍याशी की जीत के बाद भी यह भरोसा अंत तक नहीं रहता कि वह व्‍यक्‍ति कांग्रेस पार्टी का सदस्‍य आगे तक रहेगा भी या नहीं। इस मामले में बेंगलुरु रीजन में भाजपा के लिए अच्‍छा है कि उसकी साख अच्‍छी है।

पिछली बार 2013 के विधानसभा चुनाव में विभिन्‍न पार्टियों के प्रत्‍याशियों के बीच बेंगलुरु क्षेत्र में जीत की संख्‍या देखें तो कुल 28 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस की झोली में सबसे अधिक सीटें गई थी। कांग्रेस ने यहां से 14 विधानसभाओं में अपनी विजय पताका फहराई थी, जबकि राजधानी परिक्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी दूसरे नंबर की राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी थी। यहां भाजपा के प्रत्‍याशियों में से 11 को जीत हासिल हुई थी। इस मामले में जेडीएस ने यहां कुल 03 स्‍थानों पर विजय हासिल की थी। उसमें से भी कुछ ने चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस का दामन थाम लिया था।

प्रदेश में सरकार किसकी बने?, जब इस बात को लेकर हिन्दुस्थान समाचार ने एक कंपनी के रीजनल हेड संजीव कुमार राव ने बात की तो उनका साफ कहना था कि कांग्रेस आज किस मुंह से भ्रष्‍टाचार की बात करती है, मैं यहां पिछले कई वर्षों से रह रहा हूं। हम सभी जानते हैं कि बेंगलुरु भारत के सूचना प्रौद्योगिकी निर्यातों का अग्रणी स्रोत है और इसी कारण से इसे भारत का सिलिकॉन वैली भी कहा जाता है। इस वैली को निरंतर बनाए रखने का जितना अधिक प्रयास पिछली सरकार का रहा है, उसकी अभी प्रदेश कांग्रेस की सरकार से तुलना भी नहीं कर सकते हैं। यहां भ्रष्‍टाचार का आलम यह है कि ठीक चुनाव के पहले मार्च में बजट लैप्‍स होने के भय से सिद्धारमैया की सरकार ने कई हजार करोड़ के ठेके आनन-फानन में दिए हैं। जब मोदी कर्नाटक में आकर कहते हैं कि इस सरकार में 10 प्रतिशत कमीशन दिए बिना कोई काम नहीं होता है तो वे कुछ गलत नहीं कहते, बल्कि हकीकत में प्रतिशत 10 से बहुत ज्‍यादा का यहां जमीनी भ्रष्‍टाचार का है।

उधर, प्रकाशन व्‍यवसायी कीर्ति गोयनका का कहना हैं कि पिछले पांच सालों में यहां खुदी हुई सड़के सबसे बड़ी समस्‍या है। मुख्‍यमार्ग छोड़कर अंदर चले जाएं तो यह हाल पूरे बेंगलुरु में देखने को मिल जाएगा। विद्यालयों में प्राइमरी कक्षा की फीस 70 हजार रुपये वार्ष‍िक से शुरू होती है, जबकि सरकारी स्‍कूलों का हाल बेहाल है। यहां की दुर्दशा को देखकर गरीब से गरीब अभिभावक अपने बच्‍चे को इन विद्यालयों में पढ़ाना नहीं चाहते हैं। यहां अब तक मैट्रो का कार्य पूरा नहीं हो सका है, यदि फिर से कांग्रेस सरकार आ गई तो आगे के 5 सालों में भी इसके पूरा होने की कोई उम्‍मीद नजर नहीं आती।

वहीं, अन्‍य बैंक सेक्‍टर में सेवाएं दे रहे ओपी पोद्दार का कांग्रेस सरकार पर आरोप है कि कांग्रेस पार्टी ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्‍यान नहीं दिया है। यातायात में कोई राज्‍य सरकार आम तौर पर टोल टैक्‍स नहीं लगाना चाहती है, लेकिन कांग्रेस सरकार ने एयरपोर्ट जाने पर भी टोल वसूली जारी रखी है। एक तरफ के 85 और दोनों ओर से 130 रुपये एक बार के यह वसूल रही है। जब एयरपोर्ट अथॉरिटी ने भीड़ को देखकर एक अन्‍य रास्‍ता सुलभ कराया है तो पता यहां तक चला कि यह बेंगलुरु से एयरपोर्ट जाने वाले सभी वाहनों का एक बार में ही दोनों ओर का टोल टैक्‍स वसूल लेना चाहते थे, लेकिन जब तक ऐसा निर्णय कागजों में कर पाते राज्‍य में आचार संहिता लग गई, नहीं तो कांग्रेस सरकार जनविरोधी यह कदम भी उठा लेती।

ऐसा ही कुछ कहना जीके श्रीनिवास का है जो कि नौकरी तो केंद्र सरकार की करते हैं, लेकिन अपने राज्‍य के वर्तमान हालत से संतुष्‍ट नहीं हैं। वे कहते हैं कि उनके परिवार के लोग कांग्रेस के परंपरागत वोटर्स रहे हैं , लेकिन अभी वे विकास के लिए भाजपा को पसंद करते हैं और अपने प्रदेश में इस बार भाजपा की सरकार चाहते हैं।

हिन्‍दुस्‍थान समाचार