Thursday 5 August 2021
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एकजुट विपक्ष से उपचुनावों में भाजपा को मिली शिकस्त

हालांकि 4 लोकसभा उपचुनावों में से एक में अपने बलबूते और दूसरे में अपने गठबंधन सहयोगी पार्टी की जीत से उसे कुछ दिलासा मिली है

नई दिल्ली— लोकसभा चुनाव- 2019 के पहले देश में उभर रहे विपक्ष के महागठबंधन के आगे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को देश के विभिन्न भागों में हुए लोकसभा और राज्य विधानसभा उपचुनावों में हार का सामना करना पड़ा है। हालांकि 4 लोकसभा उपचुनावों में से एक में अपने बलबूते और दूसरे में अपने गठबंधन सहयोगी पार्टी की जीत से उसे कुछ दिलासा मिली है। राज्य विधानसभाओं के लिए हुए 11 उपचुनावों में से भाजपा को केवल एक सीट मिली जबकि अन्य सीटें विपक्ष के खाते में गई। उत्तर प्रदेश के चर्चित कैराना लोकसभा चुनाव में महागठबंधन ने अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए यह सीट भाजपा से छीन ली है। राष्ट्रीय लोकदल की उम्मीदवार तबस्सुम हसन ने भाजपा उम्मीदवार मृगांका सिंह को करीब 49449 हजार वोटों से शिकस्त दी। यह सीट मृगांका के पिता हुकुम सिंह के निधन के कारण रिक्त हुई थी| इस उपचुनाव में राष्ट्रीय लोकदल ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के समर्थन से अपना उम्मीदवार खड़ा किया था। विपक्षी एकता की सफलता का दूसरा उदाहरण महाराष्ट्र के भंडारा-गोंदिया में देखने को मिला जहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार मधुकर कुपड़े ने जीत हासिल की। इस सीट पर भाजपा से नाराज चल रही शिवसेना ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का समर्थन किया था। यह सीट राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी ने भाजपा से छीन ली। इसी राज्य में मुंबई के पास स्थित पालघर लोकसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार राजेन्द्र गावित ने जीत हासिल कर पार्टी के लिए खाता खोला। पालघर में विपक्षी दल भाजपा के खिलाफ साझा उम्मीदवार नहीं उतार पाए थे। महाराष्ट्र के पलूस-काडेगांव सीट पर कांग्रेस के विश्वजीत कदम निर्विरोध चुन लिए गए। कदम को राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी और शिवसेना ने अपना समर्थन दिया था तो बाद में भाजपा ने भी उम्मीदवार हटा लिया था। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में भाजपा की सहयोगी नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) के उम्मीदवार तोखेहो एपथोमी ने नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के जामेर को पराजित किया। इस प्रकार 4 लोकसभा उपचुनावों में से भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को दो और विपक्षी दलों को शेष 2 सीटों पर विजय मिली।

राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में लोकसभा उपचुनावों में भाजपा की लगातार तीसरी हार है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संसदीय क्षेत्र गोरखपुर और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की सीट फूलपुर के बाद भाजपा ने यह तीसरी संसदीय सीट गंवाई है। इसी राज्य में नूरपुर विधानसभा उपचुनाव में भी भाजपा को अपनी सीट खोनी पड़ी जब समाजवादी पार्टी के नईम हसन ने भाजपा की अवनी सिंह को 5 हजार से अधिक वोटों से हराया। इस सीट पर अवनी सिंह के पति लोकेन्द्र सिंह जीते थे| पिछले दिनों एक सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु के बाद यह सीट रिक्त हुई थी। विपक्षी नेताओं ने उपचुनावों के नतीजों को भाजपा के खिलाफ जनादेश करार देते हुए इसे भाजपा की सांप्रदायिक, विभाजनकारी और अहंकार से भरी राजनीति की पराजय बताया है। भाजपा का कहना है कि चुनाव स्थानीय मुद्दों को लेकर लड़े गए थे| यह प्रधानमंत्री मोदी सरकार के बारे में लोगों की राय का पैमाना नहीं है। भाजपा नेताओं के अनुसार, वहां विपक्षी एकता की चुनौती को नाकाम बनाने के लिए आवश्यक रणनीति तैयार करेंगे। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद देशभर में हुए 27 लोकसभा उपचुनावों में से पार्टी केवल 6 पर ही जीत हासिल कर पाई है जबकि उसे खुद की 7 सीटें गंवानी पड़ी है। बिहार में लालू प्रसाद यादव का साथ छोड़कर भाजपा के साथ गठबंधन सरकार बनाने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जोकीहोट विधानसभा चुनाव में हार से गहरा झटका लगा। अपने गढ़ जोकीहाट में जनता दल (यू) को विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा। पड़ोसी राज्य झारखंड में विपक्षी झारखंड मुक्ति मोर्चा अपनी दोनों सीटों सिल्ली और गोमिया बचाने में सफल रहा। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने थराली विधानसभा सीट बचाकर राहत महसूस की।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में वर्चस्व कायम करने वाली ममता बनर्जी की जीत का सिलसिला जारी रहा। तृणमूल कांग्रेस ने महेशताला सीट जीत ली| भाजपा के लिए यह उपलब्धि कहा जाएगा कि उसने मार्क्सवादी पार्टी के उम्मीदवार को पछाड़कर दूसरे स्थान पर कब्जा जमाया। कर्नाटक में हजारों की संख्या में मतदाता पहचान पत्र बरामद किए जाने के बाद सुर्खियों में आए राजराजेश्वरी नगर विधानसभा क्षेत्र पर कांग्रेस के मुनिरत्ना ने विजय हासिल कर विधानसभा में कांग्रेस की सदस्य संख्या 78 में एक का इजाफा किया। केरल में सत्तारूढ़ वाममोर्चे के प्रमुख मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने अपनी सीट बरकरार रखी। पंजाब में अकाली दल –भाजपा गठबंधन की हार का सिलसिला शाहकोट उपचुनाव में भी जारी रहा जहां कांग्रेस ने यह सीट अकाली दल से छीन ली। मेघालय के अंपाती की सीट कांग्रेस की झोली में आई।

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