Monday 25 October 2021
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बर्ड फ़्लू से हरियाणा में 1 लाख से अधिक पक्षियों की मौत, केरल में 40,000 चिड़ियों को मारना पड़ा

बर्ड फ़्लू काफी संक्रामक बीमारी है जिसमें H5N1 वायरस के कारण पक्षियों के श्वसन तंत्र पर इसका असर पड़ता है। मानव भी इससे संक्रमित हो सकते हैं

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कोरोनावायरस संक्रमण से देश को थोड़ी राहत मिली कि अब बर्ड फ़्लू ने चिंता बढ़ा दी है। कई राज्यों में भारी संख्या में पक्षियों की मौत हो गई है। हरियाणा के पंचकुला में एक लाख से अधिक पोल्ट्री पक्षियों की मौत हो गई है। राज्य के पशुपालन और डेयरी विभाग ने इसके सटीक कारण का पता लगाने के लिए व्यापक फोरेंसिक जाँच शुरू कर दी है।

देश के सबड़े बड़े पोल्ट्री इलाकों में से एक पंचकुला से मरने वाले पक्षियों के 80 से अधिक नमूने इकट्ठा किए गए हैं। पक्षियों के रक्त, उन्हें दिया गया भोजन और मृत पक्षियों के जालंधर के क्षेत्रीय रोग निदान प्रयोगशाला (RDDL) को भेजा गया है। नमूनों को पशुपालन और डेयरी विभाग के महानिदेशक डॉ बीएस लौरा की देखरेख में ज़ब्त किया गया है।

पोल्ट्री पक्षियों के बीच वायरस के अत्यधिक रोगजनक और आनुवंशिक तनाव की संभावना का पता लगाने के लिए नमूनों को ज़ब्त किया गया।

राजस्थान, केरल और मध्य प्रदेश के बाद हिमाचल प्रदेश में भी बर्ड फ़्लू के मामले सामने आए हैं। अधिकारियों ने हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के पोंग बांध झील क्षेत्र में मृत पाए गए कुछ प्रवासी पक्षियों में बर्ड फ़्लू की पुष्टि की है।

राजस्थान में बर्ड फ़्लू

राजस्थान में कई ज़िलों में पक्षियों की मौत हुई है। राज्य के विभिन्न जिलों में सोमवार को 170 से अधिक पक्षियों की मौत की घटनाएँ सामने आई हैं। पशुपालन विभाग के अनुसार राज्य में 425 से अधिक कौवों, बगुलों और अन्य पक्षियों की मौत हो गई है।

झालावाड़ के पक्षियों के नमूनों को जाँच के लिये भोपाल के राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान भेजा गया था जिसमें बर्ड फ़्लू की पुष्टि हुई है जबकि अन्य ज़िलों के पक्षियों के नमूनों की जांच के परिणाम अब तक नहीं मिले हैं।

केरल में बर्ड फ़्लू

केरल के कोट्टायम और अलप्पुझा ज़िलों के कुछ हिस्सों में बर्ड फ़्लू फैल गया है, जिसके चलते प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में और उसके आसपास एक किलोमीटर के दायरे में बत्तख, मुर्गियों और अन्य घरेलू पक्षियों को मारने का आदेश दिया है।

अधिकारियों ने कहा कि H5N8 वायरस के प्रसार की रोकथाम के लिए करीब 40,000 पक्षियों को मारना पड़ेगा।

कोट्टायम ज़िला प्रशासन ने कहा कि नींदूर में एक बत्तख पालन केंद्र में बर्ड फ़्लू पाया गया है और वहां क़रीब 1,500 बत्तख मर चुकी हैं।

बर्ड फ़्लू काफी संक्रामक बीमारी है जिसमें H5N1 वायरस के कारण पक्षियों के श्वसन तंत्र पर इसका असर पड़ता है। मानव भी इससे संक्रमित हो सकते हैं।

एक दशक से पहले साल 2007 में पिछली बार भारत पर बर्ड फ़्लू के कई मुआमले सामने आए थे, पर समय रहते आवश्यक सावधानी बरतने के कारण बीमारी महामारी में नहीं बदली।

हिमाचल में 1,800 प्रवासी पक्षी मरे

हिमाचल प्रदेश में पोंग बांध झील अभयारण्य में अब तक क़रीब 1,800 प्रवासी पक्षी मृत पाये गये हैं। केंद्र द्वारा दी गयी जानकारी साझा करते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अर्चना शर्मा ने कहा कि बरेली में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में मृत पक्षियों के नमूनों की जांच रिपोर्ट में बर्ड फ़्लू की पुष्टि हुई है। 

शर्मा ने कहा कि उनका विभाग भोपाल स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डीजीज से इसकी पुष्टि का इंतजार कर रहा है क्योंकि इस बीमारी की जांच के लिये यह नोडल इकाई है।

जालंधर में भी बर्ड फ़्लू की आशंका

शर्मा ने कहा कि जालंधर में उत्तरी क्षेत्र बीमारी जांच प्रयोगशाला ने भी पक्षियों के नमूनों में फ़्लू की आशंका व्यक्त की है।कांगड़ा के ज़िलाधिकारी राकेश प्रजापति ने ज़िले के फ़तेहपुर, देहरा, जवाली और इंदौरा उप मंडल में मुर्गी, बत्तख, हर प्रजाति की मछली और उससे संबंधित उत्पादों जैसे अंडे, मांस, चि​कन आदि की ब्रिकी पर प्रतिबंध लगा दिया है।

हिमाचल प्रदेश के पोंग बांध वन्यजीव अभयारण्य में वन्यजीव कर्मियों ने पिछले सोमवार को फ़तेहपुर में सबसे पहले चार पक्षियों के मृत मिलने की सूचना दी थी। इसके बाद कुछ अन्य क्षेत्रों से भी मामले सामने आए।

पिछले साल जनवरी के अंत तक एक लाख से ज्यादा प्रवासी पक्षी यहां आए थे और इस साल अब तक 50,000 से ज्यादा पक्षी पहुंच चुके हैं।

अधिकारियों ने कहा कि बर्ड फ़्लू के लिए निर्धारित निर्देशों के तहत मृत पक्षियों का निपटान कर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि राज्य में अन्य जलाशयों से पक्षियों की मौत की सूचना नहीं मिली है। राज्य में वन्य जीव, पशुपालन विभाग के कर्मचारियों को अलर्ट रहने को कहा गया है। 

केरल में हालात क़ाबू में होने के बावजूद प्रशासन ने ज़िलों में हाई अलर्ट जारी किया है क्योंकि यह वायरस मनुष्य को भी संक्रमित करने की क्षमता रखता है। केरल में वर्ष 2016 में बड़े पैमाने पर बर्ड फ़्लू फैला था।

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