खिलाड़ियों से बड़ा यो-यो टेस्ट

हाल ही में इंग्लैंड दौरे पर गई इंडियन क्रिकेट टीम में अंबाती रायडू और भारतीय ए टीम में संजू सैमसन का चयन इसलिए नहीं हुआ, क्योंकि वे यो-यो टेस्ट में फेल हो गए

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किसी भी खेल में प्लेयर्स की फिटनेस अहम होती है। इसलिए समय-समय पर इन खिलाड़ियों का फिटनेस टेस्ट होता है। क्रिकेट, फुटबॉल, बास्केटबॉल, रग्बी और हॉकी जैसे खेलों में इस टेस्ट को यो-यो टेस्ट की संज्ञा दी जाती है। लेकिन जब किसी खिलाड़ी के परफॉर्मेंस को दरकिनार कर यो-यो टेस्ट को अधिक तरजीह दी जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है।

हाल ही में इंग्लैंड दौरे पर गई इंडियन क्रिकेट टीम में अंबाती रायडू और भारतीय ए टीम में संजू सैमसन का चयन इसलिए नहीं हुआ, क्योंकि वे यो-यो टेस्ट में फेल हो गए। आईपीएल सीजन में रायडू ने 16 मैच खेले जिनमें एक शतक और 03 अर्द्धशतक के जरिए 602 रन बनाए थे। आईपीएल में रायडू की फिटनेस का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 186 रन दौड़ कर बनाए। इसके अलावा रायडू ने करीब 24 घंटे फील्डिंग की। वहीं अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच में मोहम्मद शमी को यो-यो टेस्ट में फेल हो जाने के चलते टीम में शामिल नहीं किया गया।

खिलाड़ियों का यह टेस्ट आज विवादों में आ गया है। बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी ने इन खिलाड़ियों का चयन न होने पर खेद प्रकट किया है। उन्होंने सीओए को लिखे पत्र में कई वाजिब सवाल पूछे। पत्र में अनिरुद्ध चौधरी ने लिखा, ये किस मीटिंग में फैसला लिया गया कि यो-यो टेस्ट में 16.1 से कम स्कोर करने वाले क्रिकेटर्स को बीसीसीआई द्वारा सलेक्ट की गई टीम में जगह नहीं दी जाएगी, उस मीटिंग में कौन-कौन शामिल थे, जिन्होंने यो-यो टेस्ट का फैसला किया। फिटनेस टेस्ट पास करने वाला क्रिकेटर अच्छा प्रदर्शन करेगा ये संभव नहीं।

सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण फिटनेस टेस्ट का निर्धारित स्कोर कभी हासिल नहीं कर पाए। इसके बावजूद इन क्रिकेटर्स ने अपना लोहा पूरी दुनिया में मनवाया। 90 के दशक की बात की जाए, तो भारतीय टीम में मोहम्मद अजहरुद्दीन, रॉबिन सिंह और अजय जडेजा के अलावा कोई भी क्रिकेटर 16.5 से अधिक स्कोर हासिल नहीं कर सका। उस समय इसे बीप टेस्ट के नाम से जाना जाता था। फिटनेस में ऑस्ट्रेलिया के क्रिकटर्स का कोई सानी नहीं है। वे यो-यो टेस्ट में सबसे अव्वल माने जाते हैं। बावजूद इसके ऑस्ट्रेलिया यो-यो टेस्ट पर भरोसा नहीं करता।

सीए ने 3 साल पहले ही ऑस्ट्रेलिया में यो-यो टेस्ट बैन कर दिया। ऑस्ट्रेलिया में खिलाड़ियों की फिटनेस जांच करने के लिए दो किलोमीटर दौड़, फर्राटा दौड़ और स्ट्रेंथ टेस्ट किया जाता है। वहीं इंग्लैंड में खिलाड़ियों का चयन 40 मीटर की फर्राटा दौड़, विकेट के बीच में दौड़ और एजिलिटी टेस्ट के आधार पर होता है।

यो-यो टेस्ट की सबसे बड़ी खामी ये है कि इसमें हर खिलाड़ी के फिटनेस लेवल को एक ही नज़र से देखा जाता है। जबकि भौगोलिक, शारीरिक बनावट और खान-पान के आधार पर प्रत्येक खिलाड़ी का फिटनेस लेवल अलग-अलग होता है। भारत यो-यो टेस्ट के पीछे हाथ धोकर पड़ा है, जबकि इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया इससे किनारा कर चुके हैं। इतना ही नहीं क्रिकेट के अलावा बॉस्केटबॉल की कई टॉप टीमों ने तो यो-यो टेस्ट से तौबा कर ली है।

SOURCEहिन्दुस्थान समाचार/ओमप्रकाश
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