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Wednesday 3 June 2020

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का शताब्दी वर्ष समारोह

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वाराणसी — वसंत पंचमी का पावन अवसर एवं काशी हिन्दू हिंदू विश्वविद्यालय के स्वर्णिम १०० वर्ष! विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में दीपावली जैसा माहौल था, सभी संकाय प्रकाश के आलोक से परिपूर्ण होकर एक नवीन सुंदरता से परिपूर्ण थे।

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गौरवशाली इतिहास से परिपूर्ण विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह एवं स्थापना दिवस के अवसर पर ढोल-नगाड़ों के गुंजायमान स्वर के मध्य पुष्प वर्षा के साथ ऋतुराज बसंत भी महामनाकी बगिया के स्वागत में झूम उठा।

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शताब्दी समारोह के इन ऐतिहासिक पलों के माध्यम से बसंत पंचमी की एक और तिथि विश्वविद्यालय के इतिहास का एक और पृष्ठ निर्मित कर गयी। हास्टल रोड से भव्यता एवं उलास से परिपूर्ण एक-एक कर झांकियां निकलनी शुरू हुईं तो राजपथ के नजारे सा अहसास आंखों के सम्मुख प्रस्तुत था। गर्व एवं कला के साथ-साथ सौहार्द की चमक बिखेरती इन झांकियों में महामना का तप भी झलका और बीएचयू की प्रतिष्ठा भी।

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काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस पर विभिन्न संकायों और संस्थानों की झांकियां निकलीं जिसका आरम्भ प्रातः १०:३० बजे से हुआ। हास्टल रोड पर एक तरफ सुसज्जित मंच पर कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी गणमान्य अतिथियों के साथ मौजूद थे तो दूसरी तरफ सामने से गुजर रहा था झांकियों का कारवां, जिसका सिलसिला अपराह्न २:३० बजे तक चला।

“हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि आज हम १००वें वर्ष के स्थापना दिवस में अपना योगदान दे रहे हैं। भारत-रत्न महामना पंडित मदनमोहन मालवीय जी कि दूरदर्शिता का प्रतीक यह विश्वविद्यालय मानव के सर्वांगीण विकास के लिए कृतसंकल्पित है।” — प्रो० गिरीश चन्द्र त्रिपाठी (कुलपति, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय)

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने सधे क़दमों के साथ अनुशासनबद्ध होकर पथसंचलन किया। कृषि मैदान से स्वयंसेवकों ने एक तरफ़ जहां अनुशासन का पाठ पढ़ाया वहीँ दूसरी तरफ़ देशभक्ति का भाव भी जगाने में योगदान दिया।

सिंहद्वार सहित अनेक स्थानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा से झांकी का अभिनन्दन किया। पथसंचलन भारत कला भवन, मधुवन मार्ग से होते हुए सिंहद्वार, संत रविदास द्वार, नगवा चुंगी होते हुए विश्वविद्यालय स्थापना स्थल पर पहुंचा जहां वन्देमातरम के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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प्रत्येक संकाय की झांकी एक विशेष सन्देश दे रही थी, जिसमें नारी सशक्तिकरण से लेकर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत, राष्ट्र निर्माण, राष्ट्र प्रेम, पर्यावरण और प्रकृति प्रेम जैसे विभिन्न बिंदु शामिल थे। झांकियों के साथ नुक्कड़ नाटक, नृत्य नाटिकाओं के माध्यम से भी सामाजिक संदेशों की अलख जगाने का सराहनीय प्रयास हुआ।

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सर्वप्रथम महिला महाविद्यालय की झांकी निकली। ढोल-नगाड़ों की धुन पर महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने फागुन गीत पर नृत्य के साथ नारी सशक्तिकरण का संदेश दिया। इसमें प्राचीनता और आधुनिकता का समन्वय एवं रचनात्मकता का समावेश था। तत्पश्चात दृश्य कला संकाय की ‘उत्कृष्टता का प्रतीक’, कला संकाय की ‘ज्ञानगंगा’ और संस्कृति विद्या धर्म विज्ञान संकाय की ‘श्रीमद्भागवत के गजेंद्र मोक्ष का दृश्य एवं कृष्ण-अर्जुन संवाद’ की थीम पर आधारित झांकियां निकालीं गयी।

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सबसे बड़ी झांकी चिकित्सा विज्ञान संस्थान और कृषि विज्ञान संस्थान की रही। चिकित्सा विज्ञान संस्थान ने ‘स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत’ की थीम पर झांकी निकाली, जिसमें आयुर्वेद, मेडिसिन, नर्सिंग के साथ सर सुंदरलाल अस्पताल, ट्रामा सेंटर के समस्त विद्यार्थी, शिक्षक शामिल थे।

सभी चिकित्सक धोती-कुर्ता और केसरिया साफे में थे। झांकी के साथ बग्घी पर सवार थे बीएचयू के गौरव पद्म पुरस्कार प्राप्त प्रो. रामहर्ष सिंह, प्रो. टीके लहरी, प्रो. चूड़ामणि गोपाल और प्रो. श्याम सुंदर, जो हर किसी के आकर्षण का केंद्र बने।

“बीएचयू जैसा विश्वविद्यालय विश्व में कहीं भी नहीं है।यहां मानवीय मूल्य के साथ चरित्र निर्माण की शिक्षा दी जाती है।” — उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस पिनाकी चन्द्र घोष

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विज्ञान संस्थान की तरफ से निकली झांकी इको फ्रेंडली थी। जिसमे हाल ही में पद्मश्री सम्मान से नवाजे गए प्रो. ओएन सिंह द्वारा बनाए गए हाइड्रोजन कार, ऑटो, मोपेड, जेनरेटर को प्रदर्शित किया गया। विशेष सन्दर्भ के अंतर्गत एनसीसी की ओर से निकाली गई एयरफोर्स और नेवी की झांकियों ने जनमानस के मन में देश प्रेम का भाव जगाया। विधि संकाय ने चौरा-चौरी घटना की सुनवाई को अपनी झांकी में प्रदर्शित किया।

मुख्य बिंदु: पहली बार भारत अध्ययन केंद्र और कौशल विकास केंद्र की झांकी शामिल हुई। शारीरिक शिक्षा विभाग के छात्र-छात्राओं ने पिरमिड का प्रदर्शन किया।

bhu11वहीं आईआईटी बीएचयू की झांकी में तकनीकी को बेहतरीन ढंग से प्रदर्शित किया गया। छात्रों द्वारा बनाए गए ड्रोन कैमरे, रोबोटिक डिवाइस प्रदर्शित किए गए।

छात्रों ने नुक्कड़ नाटक और ब्रेक डांस भी किया। अंतिम झांकी एनएसएस की रही, जिसके अंतर्गत छात्र-छात्राओं ने हाथों में पौधे लेकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का सफल प्रयास किया। यहां यह बताना आवश्यक है कि वाराणसी में हरा-भरा एवं पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित क्षेत्र बीएचयू परिसर ही है।

bhu6कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने झांकियों की शोभायात्रा के दौरान विद्यार्थियों का अभिवादन किया। कृषि विज्ञान संस्थान की छात्राओं को जब उन्होंने ट्रैक्टर चलाते देखा तो पूरे उत्साह के साथ उनका हौसला बढ़ाया।

एनसीसी की झांकी के दौरान कुलपति ने कैडेट्स की सलामी ली।इस दौरान मंच पर कुलपति के साथ जस्टिस गिरिधर मालवीय, प्रो. चितरंजन ज्योतिषि, प्रो. धनंजय पांडेय, प्रो. राजीव संगल, पूर्व कुलपति प्रो. वाईसी सिम्हाद्री आदि मौजूद रहे।

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Anupam Pandeyhttp://anupamkpandey.co.in
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