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Friday 5 June 2020

अशांत पश्चिम बंगाल, बेपरवाह राज्य सरकार

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पश्चिम बंगाल जल रहा है। दार्जिलिंग से लेकर कोलकाता से सटे उत्तर 24-परगना ज़िला तक अशांत है। जनता में आक्रोश है, पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बिल्कुल बेपरवाह हैं। पहले बात करें कोलकाता के पड़ोस 24 परगना की। वहां पर एक आपत्तिजनक फ़ेसबुक पोस्ट के बाद जमकर वबाल काटा गया। इलाक़े में हिंसा भड़कने के दौरान कई मंदिर व स्कूल जला दिए गए और दर्जनों दुकानों में लूटपाट की गई।

दरअसल वहां 11वीं कक्षा के एक छात्र ने फ़ेसबुक पर मुस्लिमों के किसी पवित्र स्थान के बारे में अपमानजनक टिप्पणी पोस्ट कर दी। इसके विरोध में हज़ारों कट्टर मज़हबी कूद पड़े कोहराम मचाने। जमकर दंगे हुए। उस भीड़ में से कुछ तो उस छात्रको पत्थर मारकर मार डालने की इजाज़त मांग रहे हैं — तब जबकि उस छात्र को तत्काल गिरफ़्तार कर लिया गया है। एक नाबालिग बच्चे की इस छोटी सी ग़लती को भी हज़ारों मज़हबी बर्दाश्त नहीं कर सके। मुआफ़ करने के बजाय, सड़कों पर वबाल काटने उतर पड़े। ज़रा इन सरफिरों से पूछा जाए कि एक पोस्ट से क्या बिगड़ गया उस पवित्र स्थान का। एक तरफ़ अल्लाह को सबसे रहमदिल कहते हो और ख़ुद इतने कमज़र्फ़ नफरत-दिल हो?

ख़ैर, पुलिस ने सजगता दिखाते हुए फ़ेसबुक पर वह पोस्ट लगाने वाले नवालिग छात्र को गिरफ़्तार कर लिया है। फिर भी मुसलमान सड़क जाम करने लगे, पुलिस पर हमले किए और पुलिस वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। उत्तेजित भीड़ ने मौक़े पर पहुंचे पुलिसवालों के वाहनों में तोड़फोड़ की और पथराव किया। इसमें पुलिस अधीक्षक समेत कुछ पुलिसवाले घायल भी हो गए।

कोलकाता से सटे स्थान पर इतनी व्यापक स्तर पर आगज़नी हुई और हैरानी इसलिए हो रही है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हालात पर काबू पाने के बजाय प्रदेश के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी पर ही आरोप लगाने शुरू कर दिए। कहा कि राज्यपाल महोदय ने धमकी दी। क्या उन्हें यह शोभा देता है कि उनका राज्य जल रहा है और वो सियासत कर रही हैं? क्या राज्यपाल को इतना भी अधिकार नहीं कि मुख्यमंत्री से यह पूछ सके कि स्थिति पर नियन्त्रण क्यों नहीं हो रहा? क्या त्रिपाठी ने दंगाग्रस्त इलाक़ों की स्थिति पर बनर्जी से फोन पर बात करके कोई अपराध कर दिया? वो कह रही हैं कि राज्यपाल ने उन्हें धमकी दी और अपमानित किया। हालांकि राज्यपाल ने सारे माहौल को शांत करने की मंशा से अपना स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि “हमारी बातचीत में ऐसा कुछ नहीं हुआ जिससे ममता बनर्जी को लगे कि उनकी बेइज़्ज़ती हुई, उन्हें धमकाया गया या उन्हें अपमानित किया गया।”

दरअस्ल कठमुल्ला मुसलमानों का गढ़ बन गया है पश्चिम बंगाल। आपको याद होगा कि पिछले साल मालदा में हज़ारों मुसलमानों की भीड़ ने किस तरह से उपद्रव किया था। मालदा में बवाल करने वालों की मांग थी कि कमलेश तिवारी नाम के उस शख़्स को फाँसी दे दी जाए जिसने उनके नबी की शान में तथाकथित गुस्ताख़ी की। यह मांग तब हो रही थी जब तिवारी को रासुका लगाकर जेल में डाल दिया गया था। उस पर कई कठोर धाराएं लगा दी गई थीं। फाँसी की मांग करने वालों को ये नहीं पता था कि तिवारी ने जो अपराध किया है उसकी सजा देश के मौजूदा क़ानून के अन्दर किसी भी प्रकार से फाँसी नहीं हो सकती।

इसके साथ ही यह भी तो ग़ौर फ़रमाने योग्य है कि कोलकाता के एक मदरसे के हेडमास्टर क़ाज़ी मासूम अख़्तर को सिर्फ़ इसलिए बेरहमी से पीटा जाता है, क्योंकि उसने अपने छात्रों को राष्ट्रगान सिखाने की कोशिश की थी। अब यह सवाल अहम हो गया है कि क्या भारत में राष्ट्रगान समाज के एक वर्ग के लिए ज़रूरी नहीं है? फिर एक लंबी डरावनी चुप्पी सामने आ रही है उन कथित लेखकों की तरफ से जो असहिष्णुता के सवाल पर अपने पुरस्कार लौटाते रहे हैं या जंतर-मंतर पर धरने पर बैठते रहे हैं। बनर्जी की सरकार 24 परगना से लेकर मालदा के उपद्रवियों को कुछ नहीं कहती।

जन्नत में आग

पृथ्वी का जन्नत यानी दार्जीलिंग भी तो जल रहा है। दार्जीलिंग में भी हालात क़ाबू से बाहर हो रहे हैं। वहाँ मानों सारा दार्जिंलिंग सड़कों पर उतर आया है। इसी बीच बनर्जी संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नीदरलैंड चली जाती हैं। कहती हैं कि दार्जीलिंग में हिंसक प्रदर्शन बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने यह चेतावनी 24 परगना में हंगामा करने वालों को नहीं दी। दार्जीलिंग में वहाँ की इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं थीं। वहाँ पर बंद का आह्वान किया जा रहा है।

बंद का आह्वान गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) ने किया है। जीजेएम पृथक गोरखालैंड के लिए आंदोलन चला रहा है। वहां पर दवाख़ानों को छोड़कर सभी अन्य दुकानें एवं होटल बंद हैं। पर्यटन का कारोबार ठप्प है। बनर्जी अपने राज्य के बिगड़ते हालात पर क़ाबू क्यों नहीं पातीं? वे सक्षम नहीं हैं या इच्छा नहीं है? सिर्फ़ केन्द्र पर आरोप लगाने से बात नहीं बनेगी। देशभक्त गोरखा लोगों की मांगों का कोई शांतिपूर्ण समाधान तो तलाशना होगा।

हावी होते कठमुल्ले

सारा देश देख रहा है कि बनर्जी सांप्रदायिक शक्तियों के हाथों में खुलकर खेल रही हैं। आपको याद होगा कि उनके एक ख़ासमख़ास और कोलकाता की एक मस्जिद के एक कुख्यात इमाम ने कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ख़िलाफ़ एक बेहद आपतिजनक फ़तवा जारी किया था। कोलकाता की टीपू सुल्तान मस्जिद के तत्कालीन शाही इमाम सैयद मोहम्मद नुरुर रहमान बरकती ने फ़तवा जारी करते हुए मोदी जी का अपमान करने वाले को रु० 25 लाख का ईनाम देने का वादा किया था। जरा देख लीजिए कि कितना ख़तरनाक था वो फतवा। देश के प्रधानमंत्री पर हमला करने का फ़तवा जारी करने के बावजूद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनर्जी का ख़ासमख़ास बना हुआ है वह धूर्त इमाम।

जीएसटी पर भी रार

बनर्जी मानो कोई काम क़ायदे से करने के लिए तैयार ही नहीं हैं। उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में भी तमाम मीन-मेख निकाले थे। उन्होंने अपनी फ़ेसबुक पोस्ट पर लिखा कि देश ने 14 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि आज़ादी हासिल की थी और अब 30 जून 2017 की मध्य रात्रि से देश की आज़ादी और लोकतंत्र के लिए भयानक ख़तरा पैदा हो गया है और इंस्पेक्टर राज का युग लौट आया है! ज्ञातव्य है कि जीएसटी में इंस्पेक्टरों को 4 गंभीर अपराधों के लिए गिरफ़्तारी की शक्तियाँ प्राप्त हैं, जिसमें व्यापारियों को 1 से 4 वर्ष जेल की सज़ा हो सकती है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री नोटबंदी का भी विरोध कर रही थीं। वो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ मिलकर नोटबंदी के बहाने भी प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोल रही थीं। क्या उन्हें मालूम है कि कालेधन की अर्थव्यवस्था क्या होती है? क्या उन्हें पता है कि काला धन देश को किस तरह से खोखला करता है? शायद नहीं। ख़ैर, फ़िलहाल पश्चिम बंगाल में कठमुल्ला ताक़तें पूरी तरह से हावी हैं। बनर्जी की ओर सारा देश देख रहा है कि वो अब उन ताक़तों के साथ खड़ी होती हैं या उन पर चाबुक़ बरसाएंगी।

Ravindra Kishore Sinha
Ravindra Kishore Sinhahttp://www.sirfnews.com
Member of Parliament (Bharatiya Janata Party), Rajya Sabha, and Chairman, Hindusthan Samachar Seva Samiti
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