अयोध्या में 2018 में बनेगा भव्य राम मंदिर – विहिप

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नई दिल्ली – देश में रामजन्म भूमि मुद्दा एक बार फिर से तूल पकड़ने लगा है। विश्व हिन्दू परिषद ने बाकायदा राम मंदिर बनने की समय सीमा भी आज घोषित कर दी है। विहिप के अनुसार 2018 में राम मंदिर बन जायेगा और इसको अब कोई नहीं रोक सकता है। विहिप ने मंदिर निर्माण के लिए सभी राजनीतिक दलों से संसद में प्रस्ताव लाए जाने की मांग की है। विहिप ने कहा कि मोदी-योगी सरकार को देश में बहुमत मंदिर निर्माण पर ही दिया गया है।

विश्व हिन्दू परिषद के महामंत्री डॉ सुरेंद्र जैन ने शनिवार को कहा कि रामजन्मभूमि आंदोलन को लेकर न तो विहिप का तेवर बदला है और न ही संकल्प। यह आंदोलन समग्र हिन्दू समाज का है। रामलला का मंदिर जब तक नहीं बनेगा, तब तक न चैन से बैठेंगे न किसी को बैठने देंगे। डा. जैन आज यहां इंद्रप्रस्थ विश्व हिंदू परिषद द्वारा एनडीएमसी सेंटर में ‘श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन एक नवजागरण’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी को सम्बोधित कर रहे थे।

डा. जैन ने कहा कि चार लाख से ज्यादा लोगों ने बलिदान दिया है । यह संकल्प सभी युवाओं का है कि जब तक भव्य मंदिर नहीं बनेगा तब तक चैन से नहीं बैठेंगे । 16 करोड़ रामभक्तों ने इस आंदोलन में भाग लिया है, यह विश्व में इतिहास है । उन्होंने अपने सम्बोधन में स्वर्गीय अवैद्यनाथ, अशोक सिंघल और महंत भास्कर दास को श्रद्धांजलि दी । उन्होंने कहा कि हमने बाबरी का नामो-निशान तक मिटा दिया है ।

उन्होंने कहा, ‘रामविरोधी सुन लें कान खोल कर कि 6 दिसम्बर को कितनी भी छाती पीट लें लेकिन राम मंदिर बनेगा । अब बाजी उनके हाथ से निकल चुकी है । तारीख सरकार नहीं, समाज तय करता है। मोदी-योगी सरकार देश में राम मंदिर का संकल्प लेकर आई है। 2018 में भव्य राम मंदिर बनेगा। आज हिन्दू सामर्थ्य के साथ खड़ा है जिसका श्रेय रामजन्मभूमि आंदोलन को जाता है।’

डा. जैन ने कहा, ‘इस राष्ट्र का कोई पिता नहीं है। इसका पिता सिर्फ राम हैं । जन्मभूमि की अवधारणा ही श्रीराम युग से आई थी । भारत एक राष्ट्र था है और रहेगा और हिंदुत्व ही इसकी राष्ट्रीयता है। हिन्दू भारत के मालिक हैं। रामजन्मभूमि आंदोलन ने यह पहले ही तय कर दिया है।’

डॉ सुरेंद्र जैन ने रोहिंग्या मुसलमानों के मामले पर कहा कि पश्चिम बंगाल में हिन्दुओं की प्रताड़ना, कश्मीरी पंडितों पर हिंसा, केरल में लाल आतंक पर यह बुद्धिजीवी वर्ग नहीं बोलता है मगर रोहिंग्या को समर्थन दे देता है। उन्होंने दावा किया कि रोहिंग्या मुसलमानों के संबंध आतंकवादी संगठन आईएसआईएस से हैं। अब इस प्रकार का मानवीय चेहरा नहीं चलेगा। जो इस राष्ट्र को अपनी मातृभूमि कर्मभूमि माने वही इस देश मे रहने का अधिकार रखता है।

डा. सुरेंद्र जैन ने सवाल उठाये कि क्या बाबर, हुमायूं, गौरी इस राष्ट्र के राष्ट्रपुरुष हो सकते हैं? उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर दिल्ली को मुगल आक्रमणकारियों के नाम से करने के आरोप भी लगाए।

डा. जैन ने प्रधानमंत्री द्वारा स्वतन्त्रता दिवस के मौके पर लाल किला से झंडा फहराने को भी गलत करार दिया। उन्होंने कहा कि लाल किला देश के स्वाभिमान का प्रतीक नहीं है। यह हिन्दू मन्दिरों को तोड़ कर बनाया गया था। लाल किले से ध्वज फहराना गलत है ।

जैन ने कहा कि जब भारत की सेना के जवान सीमा पर जंग लड़ते हैं तो, जय श्री राम, जय भवानी, जय बजरंगी कहते हैं। उन्होंने कहा कि आज तक नहीं सुना कि वो बाबर या हुमायूं की जय बोलते हैं, क्योंकि इन सबने देश को सिर्फ लूटा है।

उन्होंने कहा कि बंग-भंग आंदोलन में भारत का मुस्लिम समाज वन्दे मातरम कहता था लेकिन आज सेकुलर बिरादरी के चलते वन्दे मातरम बोलने से इनकार करते हैं ।

डा. जैन ने आरोप लगाए कि एक षड्यंत्र के तहत हिन्दुओं को उत्तर-दक्षिण के आधार पर बांटने का प्रयास किया गया । हिन्दुओं के अंदर हीन भावना फैलाई गई । हिन्दू मजबूत होगा तभी भारत मजबूत होगा, हिन्दू और भारत का सम्बंध आत्मा-शरीर का है । आज आंदोलन के चलते हिन्दुओं में से हीन भावना निकल चुकी है, हिन्दू विश्व को नेतृत्व देने का माद्दा रखता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षण संस्थाओं में एक योजना के माध्यम से हिन्दू महापुरुषों के लिए आपत्तिजनक शब्द लिखे गए और मुगलों को महान बताया गया । उन्होंने एक प्रथा (रुदाली) का उदाहरण देते हुए बताया कि राजस्थान में रुदाली की एक प्रथा है जिसमे रोने के लिए किराये पर लोग मिलते हैं ठीक उसी तरह देश मे रुदालियों की प्रथा आ गयी है। यह रुदाली योजनाबद्ध तरीके से हर छोटी-मोटी घटनाओं पर रोना प्रारम्भ कर देते हैं।

जैन ने कहा कि लव जिहाद के नाम पर हिन्दुओं की बेटी को ले जाने वाले, गौमांस खाने वालों पर भी कानून लागू होना चाहिए। सरकार अगर उनपर भी कानून का पालन करवाए तो किसी गौरक्षक को जमीन पर उतरने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी । उन्होंने पुरस्कार वापसी करने वाले लेखकों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब हिन्दू की हत्या होती है तो यह पुरस्कार वापसी गैंग सामने नहीं आता है ।

डॉ सुरेंद्र जैन ने कहा कि याकूब समर्थक जान लें कि अब उनके दिन लद चुके हैं। अब पूरा देश भगवा युग में प्रवेश कर रहा है। भगवा क्रांति आधे से ज्यादा भारत में आ चुकी है, आधे में प्रवेश करने वाली है । भगवा भारत के रथ को अब कोई नहीं रोक सकता है ।

सुरेंद्र जैन ने अपने सम्बोधन में कांग्रेस पर दंगे करवाने के आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के शासन में गोधरा से भी बड़े दंगे हुए हैं और इनके पीछे यही सेकुलर बिरादरी शामिल रही है। आज इन्हीं सेकुलर नेताओं द्वारा आम मुस्लिम समाज को भड़काया जा रहा है ।

उन्होंने एक विवादित बयान देते हुए कहा कि मुस्लिम समाज को 6 दिसम्बर को ईद के रूप में मनाना चाहिए। जैन यही नहीं रुके, उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को बाकायदा इसके लिए बजरंग दल और विहिप का आभार भी प्रकट करना चाहिए। हमने 6 दिसम्बर 1992 को बाबर की यादों से मुस्लिम समाज को मुक्त करवाया था ।

डॉ सुरेंद्र जैन ने अगले 6 दिसम्बर को 25वी वर्षगांठ (रजत जयंती को) व्यापक स्तर पर आयोजित करने की घोषणा करते हुए कहा कि इस बार युवाओं को वृहद स्तर पर जोड़ा जाएगा ।

महामंडलेश्वर राघवेन्द्र ने भी गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि रामजन्म भूमि के लिए आंदोलन के माध्यम से जागृति आ रही है । बहुत कठिनाइयों को झेलते हुए सबने रामजन्मभूमि को मुक्त किया । आज ऐसा लगने लगा है कि अब राम मंदिर का निर्माण अयोध्या में जल्द हो जाएगा। लोकसभा में प्रस्ताव के माध्यम से राम मंदिर का निर्माण सम्भव हो। जिस प्रकार सोमनाथ का निर्माण हुआ। राम मंदिर बनने से भारत मे नई चेतना का निर्माण होगा । हमें लोकसभा को प्रेरित करना चाहिए ।

वहीं वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र बरतरिया ने कहा कि सनातन हिन्दू राजनीतिक विषयों को समझने के लिए पूरी तरह से प्रेरित नहीं है । भारत राष्ट्र का राम से बड़ा सम्बंध है और राम ही हमारे स्रोत हैं । हम हमेशा यही सोचते हैं कि पुत्र हो तो राम जैसा, भाई हो तो लक्ष्मण जैसा। यहां तक एक अच्छे राज्य की परिकल्पना भी रामराज के रूप में की जाती है । राम मंदिर कब बने , किसके नेतृत्व में बने? यह अभी तक निर्धारित नहीं हुआ है । संसद में बैठे लोग राजनीतिक दबाव के चलते नेतृत्व अपने हाथ में नहीं लेना चाहते हैं । इसके चलते मंदिर निर्माण रुका हुआ है।

विहिप प्रवक्ता विजय शंकर तिवारी ने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद ने 1882 में आंदोलन प्रारम्भ किया था। 1992 में अथक प्रयासों के बाद इस विवादित ढांचे को नेस्तनाबूद किया गया । हिन्दू समाज ने एक ईंट तक नही छोड़ी। यह है विहिप के कार्यकर्ताओं की ताकत । इतना बड़ा आंदोलन नवजागरण के माध्यम से ही सम्भव है ।