Friday 15 January 2021
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कंगना के कर्म मन्दिर पर पड़े हथौड़े, शिवसेना के ताबूत में ठुकीं कीलें

कंगना रनौत ने एक बेहद समझदार और सधी हुई हिन्दूहित समर्थक के रूप में अपनी पीड़ा को जिहादियों द्वारा कश्मीर से निष्कासित कश्मीरी पंडितों की पीड़ा से जोड़ते हुए उनकी व्यथा के ऊपर एक फ़िल्म बनाने का ऐलान भी कर दिया है

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मुम्बई के पाली हिल स्थित कंगना रनौत के दफ्तर पर आज 9 सितम्बर 2020 मुम्बई की महानगरपालिका या बीएमसी ने जिस तरह से हथौड़े और बुलडोजर चलाए, वह भारत के राजनैतिक इतिहास में एक मील का पत्थर बनेंगे। कहने को तो BMC ने कल 8 सितम्बर को ही दफ्तर को नक़्शे के हिसाब से न बनाने का आरोप लगाकर नोटिस दे दिया था, लेकिन जिस तरह की धूर्ततापूर्ण जल्दबाज़ी में इस हरकत को अंजाम दिया गया, उससे साफ है कि यह प्रकारांतर से शिवसेना द्वारा कंगना रनौत के विरुद्ध किया गया माफ़ियानुमा गुंडई भरा हमला है। यह हतप्रभ के साथ-साथ आक्रोशित कर देने वाली असंवैधानिक व ग़ैरकानूनी गुंडागर्दी इसलिए है क्योंकि कंगना के वकील रिज़वान सिद्दीकी को इतना समय भी नहीं दिया गया कि वह उस नोटिस के जवाब में उनका पक्ष बम्बई हाईकोर्ट में रख पाते। विडंबना देखिए कि आज जिस समय बीएमसी के हथौड़े और बुलडोज़र कंगना के दफ़्तर पर चलाए जा रहे थे, ठीक उसी समय रिज़वान सिद्दीकी असहाय स्थिति में उस दफ़्तर के बाहर अपने लैपटॉप के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रहे थे और जब बम्बई हाईकोर्ट ने कंगना के दफ़्तर में तोड़फोड़ पर रोक लगाने का आदेश पारित किया, तब तक बीएमसी के दस्ते वहां सर्वनाश कर के जा चुके थे।

कंगना आज सुबह चंडीगढ़ हवाई अड्डे से जब अपने चार्टर्ड विमान में मुम्बई के लिए सवार हुईं थीं उन्हें तभी इस बात की सूचना मिल गई थी कि बीएमसी के दस्ते अपने लाव-लश्कर के साथ उनके दफ़्तर में पहुँच कर तोड़फोड़ शुरू कर चुके थे। और अपनी ट्वीट्स में शिवसेना सरकार की इस जिहादी क्रूरता को देखते हुए उन्होंने उद्धव ठाकरे की तुलना इस्लामी आक्रान्ता बाबर से करते हुए अपने बहुत मन से बनाए गए दफ़्तर को ‘राम मंदिर’ की संज्ञा दी थी। इसके बाद उस दफ़्तर में बीएमसी द्वारा की गई भर्त्सना योग्य कार्रवाई के जैसे भयानक वीडियो वायरल होने शुरू हुए, वह शिवसेना की क्रूरता और घृणा की बेहद जुगुप्सा भरी तस्वीर पेश करते हैं।

मामला अब तूल पकड़ेगा यह तय है, और यह एक बड़ी जंग की भी शुरुआत है यह भी तय है। यह जंग मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री पर काबिज वामपंथी-इस्लामी माफ़िया गठजोड़ का साथ दे रही उद्धव ठाकरे की शिवसेना, और भारत की बड़ी जनता के समर्थन से डट कर खड़ी कंगना रनौत के बीच निश्चित रूप से होगी। मुम्बई पहुँचने के बाद अपने पहले ट्विटर वीडियो में उद्धव ठाकरे को सीधे शब्दों में “तुझे क्या लगता है, फिल्म माफ़िया के साथ मिल के, मेरा घर तोड़ के तूने मुझसे बहुत बड़ा बदला ले लिया है? आज मेरा घर टूटा है, कल तेरा घमंड टूटेगा। ये वक़्त का पहिया है, हमेशा एक सा नहीं रहता। याद रखना” कह कर इस युद्ध का शंखनाद भी कर दिया है।

इतना ही नहीं, कंगना रनौत ने एक बेहद समझदार और सधी हुई हिन्दूहित समर्थक के रूप में अपनी पीड़ा को जिहादियों द्वारा कश्मीर से निष्कासित कश्मीरी पंडितों की पीड़ा से जोड़ते हुए उनकी व्यथा के ऊपर एक फ़िल्म बनाने का ऐलान भी कर दिया है।

क़ानून के अखाड़े में आगे जो भी हो, लेकिन इतना निश्चित है कि एक राष्ट्रवादी और निडर स्त्री कंगना रनौत के ऊपर इस तरह का कायराना और नीच हमला बोल कर उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी शिवसेना के राजनैतिक अंत की विधिवत शुरुआत कर दी है। शिवसेना के संस्थापक हिन्दू हृदय सम्राट स्व। बालासाहेब ठाकरे ने अपने एक बहुचर्चित साक्षात्कार में कहा था कि कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से पहले वह अपनी पार्टी को समाप्त कर देना पसंद करेंगे। लेकिन उन्हीं बालासाहेब ठाकरे के आदर्शों और मूल्यों पर पैर रखते हुए मात्र सत्ता के लालच में उद्धव ठाकरे ने 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बाद हिन्दुत्व एवं राष्ट्रवाद की राजनीति में अपनी पुरानी सहयोगी रही भाजपा की पीठ में छुरा घोंपा था। नैतिकता एवं विचारधारा के तमाम मूल्यों को धता बताते हुए उन्होंने हिन्दू-विरोधी सेक्युलरिज्म के दलदल में आकंठ डूबी कांग्रेस एवं एनसीपी के साथ गठबंधन की सरकार बनाई थी। स्व। बालासाहेब ठाकरे के समय से ही उनके प्रबल समर्थक रहे देश भर के हिन्दुत्व समर्थकों को तब उनके इस कदम से बहुत ठेस लगी थी। कहा जाता है कि पिछले साल के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में शिवसेना को वोट देने वाले लोगों के एक बड़े हिस्से में भी इसको लेकर असंतोष एवं आक्रोश उत्पन्न हुआ था। दबे स्वरों में कई राजनैतिक पंडितों ने शिवसेना को अपने इस कदम से भविष्य में बड़ा राजनैतिक नुकसान होने की भविष्यवाणी भी की थी।

लेकिन आज शिवसेना ने कंगना रनौत के विरुद्ध जिस प्रकार की क्रूर, बर्बर, जिहादियों जैसी और घृणित कार्रवाई की है, उसने इस पार्टी और इसके नेताओं के भविष्य का अंत लगभग निश्चित कर दिया है। एक स्त्री पर, वह भी अपने धर्म और राष्ट्र पर गर्व करने वाली समझदार एवं सफल स्त्री पर ऐसे हमले करना भारत की जनता के मानस को अंदर तक ठेस पहुँचाता है। और इस ठेस का कोई उपचार बिना एक बड़े दंड के मिलना अभी तक तो संभव नहीं लगता है। कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा, कि कंगना के ‘कर्म मन्दिर’ पर पड़ा एक-एक हथौड़ा शिवसेना के ताबूत पर पड़ी आख़िरी कील साबित होगा।

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Shakendra Singhhttps://www.sirfnews.com/
शाकेन्द्र सिंह उत्तराखंड के एक छोटे से क़स्बे किच्छा में निवास करते हैं। पोलैंड से इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त करने के बाद विदेश में उपलब्ध चमकदार करियर की संभावनाओं को दरकिनार कर उन्होंने अपने देश लौट कर अपनी पुश्तैनी खेती तथा व्यापार में आगे बढ़ना अधिक बेहतर समझा। प्रखर एवं स्पष्ट राष्ट्रवादी सोच रखने वाले शाकेन्द्र सिंह भारतीय तथा अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के साथ-साथ हिन्दी सिनेमा व संगीत में गहरी रुचि रखते हैं तथा उन पर लिखते भी हैं। उन्हें क़रीब से जानने वाले मित्र उनका बख़ान 50 एवं 60 के दशक के बॉलीवुड के एनसाइक्लोपीडिया के रूप में करते हैं।
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