अनिल अंबानी ने की अदालत की अवमानना; जुर्माना भरो या जेल जाओ, सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया

एरिक्सन के मुआमले में स्वीडिश टेलीकॉम उपकरण निर्माता अनिल अंबानी की कंपनी के ख़िलाफ़ बकाया राशि की निकासी के लिए सुप्रीम कोर्ट गया था। इस केस के शीर्ष 10 बिंदु —

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नई दिल्ली — उद्योगपति अनिल अंबानी को आज सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना ​​का दोषी ठहराया। फैसले में कहा गया कि अगर वह जुर्माना नहीं देते हैं तो तीन महीने के लिए जेल जाएंगे।

अंबानी की कंपनी को देना है चार सप्ताह के भीतर एरिक्सन इंडिया को रु० 453 करोड़। अदालत ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के चेयरमैन को लापरवाही के लिए फटकार लगाई। अंबानी और उनके दो निदेशकों पर जुर्माना लगाया गया। प्रत्येक को रु० 1 करोड़ का जुर्माना।

अनिल अंबानी और उनके साझेदारों ने अपने वादे का उल्लंघन किया, अदालत ने इस व्यव्हार को अपने आदेश की “जानबूझ कर अवज्ञा” बताते हुए कहा कि उन्हें स्वीडिश टेलीकॉम उपकरण निर्माता एरिक्सन को बकाया चुकाना चाहिए।

रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का सम्मान करते हैं। आरकॉम ग्रुप उसका अनुपालन करेगा।”

इस बड़ी कहानी के शीर्ष 10 बिंदु इस प्रकार हैं —

  1. सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि कोर्ट में रजिस्ट्री द्वारा रिलायंस समूह द्वारा पहले से जमा रु० 180 करोड़ एरिक्सन को दिए जाएंगे। अदालत ने यह भी कहा कि रिलायंस द्वारा दिए गए किसी भी बिना शर्त माफी को अस्वीकार करने की आवश्यकता है क्योंकि उन्होंने अपने वादे और अदालत के आदेश का उल्लंघन किया है।
  2. एरिक्सन इंडिया ने अपने नेटवर्क के प्रबंधन और संचालन के लिए 2014 में आरकॉम के साथ सात साल का करार किया था। पिछले साल इस कंपनी ने अनिल अंबानी की कंपनी के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय में बकाया रु० 550 करोड़ पाने के लिए गुहार लगाईं थी।
  3. एरिक्सन ने अदालत के सामने तर्क दिया था कि एक तरफ़ रिलायंस समूह के पास राफ़ाल जेट सौदे में निवेश करने के लिए पैसा था पर दूसरी तरफ़ वह एरिक्सन को बकाया राशि देने में आनाकानी कर रहा था। इस आरोप का अनिल अंबानी की कंपनी ने खंडन किया था।
  4. अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस राफ़ाल जेट के निर्माता दसो के ऑफ़सेट भागीदारों में से एक है, जिसके लिए भारत और फ़्रांस ने 2016 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि अंबानी को लाभ पहुंचाने के लिए 36 जेट का अनुबंध हुआ; सरकार, रिलायंस और दसो द्वारा इस आरोप का दृढ़ता से खंडन किया गया है और सुप्रीम कोर्ट ने भी जांच की अपील ख़ारिज कर दी है।
  5. अनिल अंबानी ने शीर्ष अदालत को बताया था कि बड़े भाई मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो के साथ एक परिसंपत्ति बिक्री सौदे की विफलता के साथ उनकी कंपनी ने दिवालिया कार्यवाही दर्ज की है और यह आरकॉम की निधियों के नियंत्रण में नहीं था। सरकार द्वारा किसी भी पिछले भुगतान से मुकेश अंबानी की कंपनी को प्रतिरक्षा प्रदान करने से इनकार करने के बाद संपत्ति की बिक्री रोक दी गई थी।
  6. आरकॉम ने अदालत को यह भी बताया कि उसने एरिक्सन को उसका बकाया पाने के लिए पुरज़ोर कोशिश की थी, लेकिन संपत्ति की बिक्री न हो पाने के कारण ऐसा करने में वह असमर्थ हुआ।
  7. अनिल अंबानी, रिलायंस टेलीकॉम के चेयरमैन सतीश सेठ और रिलायंस इंफ्राटेल के चेयरपर्सन छाया वीरानी के ख़िलाफ़ अवमानना ​​याचिका दायर की गई थी।
  8. अंबानी की फ़र्म जुर्माना देने के लिए सहमत हो गई है। ‘असुरक्षित लेनदार’ एरिक्सन पर सनसनी फैलाने और ‘मीडिया ट्रायल’ प्रायोजित करने का आरोप लगाते हुए अंबानी की कंपनी अदालत की रजिस्ट्री में रु० 118 करोड़ की राशि जमा करने को तैयार था लेकिन एरिक्सन एचएस ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
  9. 23 अक्टूबर को अदालत ने आरकॉम को 15 दिसंबर तक अपना बकाया चुकाने को कहा था, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि भुगतान में देरी का मतलब एक साल में 12% ब्याज होगा।
  10. एरिक्सन ने अपील की कि सर्वोच्च अदालत अनिल अंबानी और ऋणदाताओं को कोर्ट के आदेश का पालन करने को कहे और बकाया धन सौंपने का निर्देश दे। संपत्ति की बिक्री से ब्याज के साथ रु० 550 करोड़ अंबानी की कंपनी ऐडा करे, एरिक्सन ने यह मांग की। भारत के दूसरी सबसे बड़ी फ़ोन सेवा आरकॉम ने 2017 में अपना मोबाइल कारोबार बंद कर दिया था।