अमरीकी जासूस ने माना ‘पाकिस्तान आतंकवाद को भारत के ख़िलाफ़ हथियार की तरह इस्तेमाल करता है’

सीआईए के पूर्व निदेशक माइकल मोरेल का मानना है कि एक ग़लत मानसिकता पाकिस्तान को भारत के ख़िलाफ़ उकसाती है

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ISRO Too Competent To Need Society’s Immature Reaction

Three days have passed since Lander Vikram strayed from the planned trajectory; the nation is still trying to motivate ISRO scientists as if they were in a state of despondency, notwithstanding their 95% success in meeting the Chandrayaan-2 mission objectives

Pandits’ Return Will Be Real Normalcy In Kashmir

The opposition and media would have the world believe that not persecuted Pandits getting their home and hearth back but terrorists conveniently using internet, bombs and bullets would qualify as normalcy in the Valley

Muslim Women Act Proves Modi Can If He Wants To

The passing of the Muslim Women Bill in the Rajya Sabha, which has established BJP's floor management prowess, must wake Hindus and the middle class up to pressure PM Narendra Modi to legislate what they have been demanding for ages

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वाशिंगटन, डीसी — भारत के खिलाफ संघर्ष में पाकिस्तान ने अपने अस्तित्व को खतरे में बताकर आतंकवाद को बढ़ावा दिया और इसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया। यह कहना है सीआईए (CIA) के पूर्व निदेशक माइकल मोरेल का।

कल मोरेल ने कर्ट कैंपबेल और रिच वर्मा के साथ गुरुवार को एक पॉडकास्ट चर्चा में यह आरोप लगाया कि पाकिस्तान दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में से एक है।

मोरेल ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ अपने संघर्ष में आतंकवादी समूहों को एक औजार बनाया है। कैंपबेल, पूर्व एशियाई मामलों के पूर्व सहायक सचिव और भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत वर्मा इन दिनों नियमित रूप से एशिया समूह के द टीलेव्स पॉडकास्ट की मेजबानी करते हैं।

“वे जो महसूस नहीं करते हैं वह यह है कि उन आतंकवादी समूहों को नियंत्रण में रखना असंभव है। अंततः आतंकवाद आप ही को काटने दौड़ता है। आप जानते हैं, मेरा मानना ​​है कि बिल आख़िर पाकिस्तान शायद दुनिया का सबसे खतरनाक देश है,” मोरेल ने कहा।

अबोटाबाद में छापेमारी द्वारा ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के एक सुरक्षित घर में घुस कर मार गिराने में मोरेल ने अहम भूमिका निभाई थी। अमेरिका का मानना था कि अल-कायदा प्रमुख बिन लादेन 11 सितंबर 2001 के वर्ल्ड ट्रेड टावर्स पर हमले का मास्टरमाइंड था।

मोरेल ने कहा कि पाकिस्तान की जनसंख्या भी चिंता का एक प्रमुख कारण है। इनकी “अर्थव्यवस्था बेहाल है। पाकिस्तान हर वर्ष भारी संख्या में स्नातक होने वाले युवाओं को नौकरियाँ मुहय्या नहीं करा सकता। शिक्षा प्रणाली लचर है। जब मैं डिप्टी डायरेक्टर था, मैं किसी भी अन्य देश से ज्यादा पाकिस्तान गया।,” उन्होंने ओबामा प्रशासन के दौरान सीआईए में डिप्टी हेड के रूप में पाकिस्तान में अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा।

इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि कई पाकिस्तानी माता-पिता अपने बच्चों को मदरसे में भेजते हैं और सब को पता है कि वहां जाने वाले बच्चों का क्या होता है।

“सामाजिक परिप्रेक्ष से देखें तो पाकिस्तान में अतिवाद बढ़ रहा है। यह सेना के भीतर बढ़ रहा है। इसलिए यह असंभव नहीं है, कल नहीं, अगले सप्ताह नहीं, अगले साल नहीं, लेकिन अब से पांच या 10 साल बाद यह एक ‘रंग क्रांति’ का रूप ले सकता है।”
सोवियत यूनियन से निकले छोटे देशों में हुए आन्दोलनों को रंग क्रांति या कलर रेवोल्यूशन कहते हैं।

“इस्लामाबाद की सड़कों पर शायद ‘अरब वसंत’ शैली का आंदोलन देखने को मिले जिसके नतीजे में वहाँ एक परमाणु हथियारों से लैस चरमपंथी सरकार बन जाए — स्थिति इतनी डरावनी है,” मोरेल ने कहा।

मोरेल के अनुसार तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की पाकिस्तान नीति अपने पहले कार्यकाल में पाकिस्तानियों को उनके रणनीतिक वातावरण को वास्तविक रूप से देखने के लिए बनाई गई थी। “वे आज भी भारत को जैसे देखते हैं, मुझे लगता है कि भविष्य में पाकिस्तान भारत को एक संभावित खतरे के रूप में ही देखेगा। भारत ने बहुत समय पहले ही पाकिस्तान पर ध्यान केंद्रित करना बंद कर दिया है। भारतीयों की नज़र वहीं अपने आर्थिक भविष्य पर टिकी हुई है,” उन्होंने कहा।

लेकिन चूँकि पाकिस्तानी इस कथित अस्तित्व संबंधी खतरे के बारे में सोच-सोच कर परेशान होते रहते हैं, उन्होंने खुद को उस ‘खतरे’ से बचाने के लिए अपने समाज को संगठित किया। इसलिए उन्होंने सेना को बहुत अधिक शक्ति दी, और नागरिक सरकार को बहुत कम शक्ति दी, मोरेल ने कहा।

मोरेल ने कहा, पाकिस्तान की सरकार इसी मानसिकता से ग्रस्त होकर नीतियाँ बनाती है “जिनपर मुझे विश्वास नहीं है और बहुतों को विश्वास नहीं है कि यह पाकिस्तान के दीर्घकालिक हित में है”। पाकिस्तान ने परमाणु हथियारों पर अधिक पैसा खर्च किया है जितना कि वे शिक्षा में कर सकते थे।

“और पाकिस्तान आतंकवाद का इस्तेमाल भारतीयों के खिलाफ एक हथियार के रूप में करते हैं… और फिर अफ़ग़ानिस्तान में भी क्योंकि वे अफ़ग़ानिस्तान में भारतीय प्रभाव से डरते हैं। इसलिए उन्होंने आतंकवादी समूह बनाए हैं, ये समूह भी भारत के खिलाफ संघर्ष में पाकिस्तान के हथियार के समान हैं, मोरेल ने कहा।

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