Sunday 17 October 2021
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अमेरिका और जापान के साथ भारत का नौसेना अभ्यास

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चेन्नई/कोलकाता — चेन्नई के पास तीनों देशों का समुद्री अभ्यास सोमवार को बंगाल की खाड़ी में शुरू हुआ है। यह अभ्यास 10 जुलाई से लेकर 17 जुलाई तक चलेगा। ‘मालाबार’ नाम के इस अभ्यास में क़रीब 22 लड़ाकू जहाज़ और इनसे जुड़े हुए लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर शामिल हैं।

जहाज़ों का नाम है भारत का आइएनएस विक्रमादित्य (44,570 टन), जापान का जिमूआ (27 हजार टन) और दुनिया के सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट करियर माने जाने वाले अमेरिका के यूएसएस निमित्ज़ (1,00,000 टन) भी शामिल हैं। भारत की ओर से इस अभ्यास का सबसे बड़ा आकर्षण होगा एयरक्राफ्ट कैरियर आइएनएस विक्रमादित्य। 2013 में नेवी में शामिल किए जाने के बाद मिग-29 फ़ाइटर जेट्स से लैस आइएनएस विक्रमादित्य इस तरह के पूर्ण सैन्य अभ्यास में पहली बार शामिल हो रहा है।

इस अभ्यास को लेकर चीन चिंतित है । ऐसी ख़बर हैं कि चीन किसी तरह इन समुद्र इलाक़ों में अपना शक्ति का प्रभाव बढ़ाने में तुला हुआ है। भारत भी इसी इरादे से इन अभ्यास में शामिल हुआ है । चीन को यह मालूम हो कि इन समुद्र इलाकों में भारत का अपना एक बोलबाला है और इसे एक चुनौती के रूप में भी लिया जा सकता है।

कोलकाता से बंगाल ब्यूरो के अनुसार विवादित दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी के बीच भारत, अमेरिका और जापान की नौसेनाओं की संलिप्तता वाला मालाबार नौसैन्य अभ्यास बंगाल की खाड़ी में शुरू हो गया है जिसमें तीनों देशों के विमान, नौसेना की परमाणु पनडुब्बियां और नौसैन्य पोत शामिल हुए हैं। यह अभ्यास ऐसे समय हो रहा है जब सिक्किम क्षेत्र में भारत एवं चीन की सेनाओं के बीच बड़ा सैन्य गतिरोध पैदा हो गया है और दक्षिण चीन सागर में बीजिंग अपनी नौसैन्य मौजूदगी को बढ़ा रहा है। मालाबार सैन्य अभ्यास का लक्ष्य सामरिक रूप से महत्वपूर्ण भारत प्रशांत क्षेत्र में तीनों नौसेनाओं के बीच गहरे सैन्य संबंध स्थापित करना है। भारत और अमेरिका साल 1992 के बाद से नियमित रूप से सालाना अभ्यास कर रहे हैं।

बीजिंग मालाबार अभ्यास के मक़सद को संदेह की नज़र से देखता है क्योंकि उसे लगता है कि यह अभ्यास भारत प्रशांत क्षेत्र में उसके प्रभाव को रोकने की कोशिश है। इस अभ्यास में समुद्री गश्त एवं टोह अभियान, सतह एवं पनडुब्बी रोधी युद्ध जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। चेन्नई तट से लेकर बंगाल की खाड़ी तक ये युद्धाभ्यास होगी जिसमें 20 जंगी जहाज़, दर्जनों फ़ाइटर जेट्स, दो सबमरीन, टोही विमान शामिल होंगे।

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