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Sunday 5 July 2020

बंगाल में रहने वाले सभी बांग्लादेशी भारतीय नागरिक — ममता बनर्जी

ममता बनर्जी ने कहा कि वे 'एक भी व्यक्ति' को बंगाल से बाहर नहीं जाने देंगी, राज्य में रहने वाला कोई भी शरणार्थी नागरिकता से वंचित नहीं रहेगा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि बांग्लादेश से आए ऐसे तमाम लोग जो इस देश के चुनावों में वोट डालते रहे हैं भारतीय नागरिक हैं और उन्हें नए सिरे से नागरिकता के लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है। बनर्जी ने इस सन्दर्भ में भाषण देते हुए नरेन्द्र मोदी सरकार की खिंचाई भी की।

ममता बनर्जी ने दावा किया कि दिल्ली के जिन सांप्रदायिक दंगों ने अब तक 45 लोगों की जान ले ली है, उसे पश्चिम बंगाल में दोहराने की कोशिश हो रही है और “हम कलकत्ता को दूसरी दिल्ली में बदलने नहीं देंगे”।

मुख्यमंत्री ने यहां एक सार्वजनिक सभा में कहा, “जो लोग बांग्लादेश से आए हैं, वे भारत के नागरिक हैं… उन्हें नागरिकता मिली है। आपको फिर से नागरिकता के लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है। आप चुनावों में वोट डाल रहे हैं, पीएम और सीएम का चुनाव कर रहे हैं… अब वे कह रहे हैं आप नागरिक नहीं हैं… उनका विश्वास मत करो।”

ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि वे “एक भी व्यक्ति” को बंगाल से बाहर नहीं जाने देंगी। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में रहने वाला कोई भी शरणार्थी नागरिकता से वंचित नहीं रहेगा।

दिल्ली हिंसा को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए टीएमसी बॉस ने कहा, “यह मत भूलो कि यह बंगाल है। दिल्ली में जो हुआ वह यहां कभी नहीं होने दिया जाएगा। हम नहीं चाहते कि बंगाल दूसरी दिल्ली या दूसरे उत्तर प्रदेश में बदले।”

संपादक के क़लम से

भाजपा का पुराना आरोप है कि ममता बनर्जी “मुस्लिम तुष्टिकरण” और अल्पसंख्यक समुदाय के “वोट-बैंक” की राजनीति करती है। परन्तु मुख्यमंत्री का यह बयान एक तरफ जहाँ कथित सेक्युलरवादियों के लिए एक अटपटा क़ुबूलनामा है, क्योंकि वे अब तक मानते ही नहीं थे कि देश में लाखों बंगलादेशी घुसपैठिये हैं, वहीं ममता बनर्जी का यह भाषण भाजपा को इस प्रकार की राजनीति के ख़िलाफ़ संघर्ष में मददगार सिद्ध होगा। अब प्रश्न बस इतना है कि बंगाल के लोगों का मुख्यमंत्री के इस बयान से माथा ठनकता है या घुसपैठियों का विषय उनके लिए कोई मुद्दा ही नहीं है या फिर यह “संकीर्ण मानसिकता” दर्शाने वाला “सांप्रदायिक” मुद्दा है।

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