Doval

नई दिल्ली —भारत द्वारा एंटी-सैटेलाइट मिसाइल के सफल प्रौद्योगिकी प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को एक अंतरिक्ष सिद्धांत का मसौदा तैयार करने का काम सौंपा है, जो नई अधिग्रहित क्षमता के संचालन के लिए प्रोटोकॉल तय करे। डोभाल डीआरडीओ और इसरो प्रमुखों के साथ बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा कार्यक्रम के लिए बने विभाग का नेतृत्व करते हैं।

मिसाइल कार्यक्रम के परिचालन के लिए डीआरडीओ और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से बात करने के बाद भारत को परमाणु कमान प्राधिकरण की तर्ज पर एक प्राधिकरण बनाना होगा ताकि खतरे की किन स्थितियों में भारत के ए-एसएटी की प्रतिक्रिया को सक्रिय करना है यह निश्चित कर दिया जाए।

भारतीय उपग्रहों को नष्ट होने या क्षीण होने की स्थिति से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ”दुश्मन द्वारा भारतीय उपग्रहों को नष्ट या निष्क्रिय कर दिए जाने की स्थिति में हमें रक्षात्मक व आक्रामक कदम उठाने होंगे। या फिर ऐसी स्थिति हो जहाँ दुश्मन ने इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक रेडिएशन (विद्युत-चुम्बकत्व) द्वारा अपने उपग्रहों तक पहुँचने का हमारा रास्ता अवरुद्ध कर दिया हो, तब हमारी क्या प्रतिक्रिया हो, यह तय होना चाहिए।”

भारत को अब इस तकनीकी कौशल को रणनीतिक क्षमता में बदलने की आवश्यकता होगी और इसमें इस सवाल का जवाब ढूंढना शामिल है कि क्या देश अपने उस परमाणु सिद्धांत पर क़ायम रहेगा जिसके तहत किसी और देश पर आक्रमण की पहल हमारी तरफ़ से नहीं होगी ― जिसे ‘नो फर्स्ट यूज़’ कहा जाता है।

एक और मुद्दा जिस पर विशेषज्ञों को विचार करने की आवश्यकता है वह है ए-सैट मिसाइलों के प्रबंधन और संचालन के लिए अंतरिक्ष कमान की स्थापना। अब तक भारत के पास एक अलग रणनीतिक बल कमान और एकीकृत मुख्यालय के तहत एक साइबर कमान है।

बुधवार को ए-सैट परीक्षण आयोजित करने से पहले मोदी सरकार ने कोलोराडो में पहली अमेरिकी अंतरिक्ष कमान का अध्ययन किया था। यद्यपि इसे एक संयुक्त कमान बनाने के लिए रणनीतिक बल कमान के साथ विलय कर दिया गया है, भारत ने उन निर्देशों का अध्ययन किया जो अंतरिक्ष कमान के गठन का नेतृत्व करते हैं।

भारतीय A-SAT परीक्षण ने पहले लक्षित उपग्रह की खोज करने के लिए अपनी आक्रामक वाहन की क्षमता को सुनिश्चित किया, फिर उस उपग्रह का पता लगाया और अंत में उसे नष्ट करने से पहले लॉक कर दिया। ए-सैट क्षमता का अधिग्रहण भारत के लिए एक गेम चेंजर है क्योंकि देश के पास अब स्टैंड-ऑफ हथियारों का उपयोग करके प्रतिकूल उपग्रहों को अपंग करने की तकनीक है। भारत अब सीमा पार किए बिना भी प्रतिकूल अर्थव्यवस्था, नेविगेशन, स्टॉक मार्केट, सैन्य और मौसम एकत्र करने की क्षमताओं को लक्षित कर सकता है।

चीनी मामलों के एक विशेषज्ञ ने कहा कि चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों में ए-सैट हथियार का निरोधात्मक प्रभाव महसूस किया जाएगा क्योंकि दोनों देश अब सैन्यबल में बराबरी की स्थिति में आ गए हैं।