Wednesday 25 May 2022
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आडवाणी राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के प्रत्याशी?

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नई दिल्ली — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति पद के लिए पूर्व उपप्रधानमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का नाम प्रस्तावित किया है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं अगले राष्ट्रपति के लिए आडवाणी का नाम आगे किया है। भाजपा अब एनडीए के घटक दलों और विपक्ष को साथ लेकर इस पर सहमति बनाने का प्रयास करेगी।

रविवार का घटनाक्रम

वेंकैया नायडू ने लोक जनशक्ति पार्टी प्रमुख और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के आवास जाकर राष्ट्रपति चुनाव को लेकर चर्चा की और उनकी कुशलक्षेम भी पूछी। वेंकैया ने पासवान से राष्ट्रपति चुनाव के संबंध में विस्तृत चर्चा की। मुलाकात के दौरान बिहार के जमुई से सांसद चिराग पासवान भी मौजूद रहे। बैठक के बाद वेंकैया ने कहां, ‘राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का नाम 23 जून से पहले घोषित कर दिया जाएगा।’

वेंकैया नायडू ने इसके बाद समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव और नरेश अग्रवाल से बात की। समाजवादी नेताओं ने नायडू के समक्ष अपना मत रखा है कि देश का अगला राष्ट्रपति राजनीतिक व्यक्ति हो, गैर राजनीतिक न हो।

भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने आडवाणी को भाजपा और वर्तमान राजनीति का पिता का दर्जा देते हुए राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाने की मांग की। शत्रुघ्न ने सोशल मीडिया ट्विटर पर ‘फादर्स डे’ के दिन रविवार को जारी संदेश में कहा, ‘पितृ दिवस के अवसर पर सबसे बेहतरीन तोहफा भाजपा और भारतीय राजनीति के पिता तूल्य नेता लाल कृष्ण आडवाणी को राष्ट्रपति पद पर सुशोभित कर दिया जा सकता है| आडवाणी इस पद के लिए सबसे योग्य व्यक्ति हैं।’

दरअसल भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा गठित कमेटी के सदस्य केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू और केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली शुक्रवार से ही विपक्षी दलों एवं क्षेत्रीय दलों के साथ बैठक कर राष्ट्रपति चुनाव के लिए आम सहमति बनाने का लगातार प्रयास कर रहे हैं।

तीन सदस्यीय कमेटी ने दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को छोड़कर लगभग सभी पार्टियों से चर्चा की।

इधर कमेटी के वरिष्ठ सदस्य राजनाथ सिंह रविवार सुबह सैर करते वक्त गिर गए जिससे उनके पैर में हल्की चोट आ गयी। चिकित्सकों ने राजनाथ को आराम की सलाह दी है। राजनाथ के घायल होने के चलते अब जिम्मेदारी वेंकैया नायडू के कंधों पर आ गयी है। वैंकेया नायडू ने विभिन्न दलों के साथ हुई रायशुमारी की जानकारी रविवार को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को दे दी है।

दूसरी तरफ शिवसेना ने एनडीए की एकजुटता पर ग्रहण लगाने के संकेत दिए हैं। सूत्र बताते हैं कि अमित शाह से मुलाकात में उद्धव ठाकरे ने साफ-साफ इसके संकेत भी दे दिए हैं। शिवसेना प्रधानमंत्री को उम्मीदवार चुनने के लिए प्रस्ताव पर तैयार नहीं है। लोजपा प्रमुख और केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान प्रधानमंत्री को उम्मीदवार चुनने के लिए प्रस्ताव लाने को तैयार हैं।

भाजपा मुख्यालय पर लगे आडवाणी को राष्ट्रपति बनाने के पोस्टर

लालकृष्ण आडवाणी को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने के समर्थन में भाजपा मुख्यालय सहित कई जगहों पर पोस्टर लगाए गए। हालांकि पार्टी मुख्यालय से इन पोस्टर हटा दिया गया है। पोस्टर में आडवाणी को सबसे योग्य उम्मीदवार बताया गया था।

इसका तात्पर्य यह है कि पार्टी के प्रभावशाली वर्गों में आडवाणी को राष्ट्रपति पद के लिए प्रत्याशी बनाने की बात अवश्य चली है, पर कुछ जगहों से इसपर विरोध जताया गया होगा या एनडीए के किसी घटक दल ने उनके नाम पर अपनी असहमति ज्ञापित की होगी।

कुछ समय तक पार्टी में इस बात पर भी चर्चा चली कि क्या आडवाणी के ख़िलाफ़ राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मुआमले में न्यायलय की कार्यवाही चलते समय क्या उन्हें देश के सर्वोच्च पद के लिए उम्मीदवार घोषित करना उचित होगा। हमारे सूत्रों के अनुसार इस पर क़ानूनी राय यह मिली कि उन्हें दोषी पाए जाने से पहले उनके नाम को मनोनीत करने पर कोई पाबंदी नहीं है। परन्तु यदि वे राष्ट्रपति बन जाते हैं तो साधारनतया उनपर क़ानूनी कार्यवाही नहीं हो पाएगी।

पिछले सप्ताह राजनाथ सिंह और वेंकइया नायडू की आडवाणी एवं मुरली मनोहर जोशी की मुलाक़ात के बाद जोशी की राय मीडिया को पता चली पर आडवाणी ने गृह मंत्री तथा सूचना-प्रसारण मंत्री से क्या कहा यह बात बाहर नहीं आई। सिंह और नायडू भाजपा के मार्गदर्शक मंडल के दोनों दिग्गजों से यह पूछने गए थे कि देश का राष्ट्रपति कौन और कैसा हो। माना जा रहा था कि इसका आशय यह है कि इनमें से कोई उमीदवार नहीं है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के हस्तक्षेप के कारण अमित शाह द्वारा बनाई गई टीम की रणनीति में बदलाव अब अनिवार्य हो गया है।

इससे पहले ‘मेट्रो मन’ ई श्रीधरन और झाड़खंड के राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू की बात चली थी। श्रीधरन का नाम कमज़ोर पड़ गया क्योंकि भाजपा, एनडीए तथा अन्य समर्थक दलों के अधिकांश नेता किसी राजनैतिक व्यक्तित्व को राष्ट्रपति के रूप में देखना चाहते हैं। मुर्मू की पहचान आडवाणी जितनी बड़ी नहीं है। इसके अलावा अतिवरिष्ठ होने के कारण आडवाणी को सारे नेता सम्मानित करना चाहते हैं।

इन सब कारणों के बावजूद 23 जून से पहले भाजपा या एनडीए की तरफ़ से राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी का नाम औपचारिक तौर पर घोषित नहीं किया जाएगा। इस विषय पर अंतिम चर्चा होना अभी शेष है कि आडवाणी के राष्ट्रपति बन जाने पर क्या भाजपा के मुश्किल वक़्त में उनका सहयोग मिल पाएगा क्योंकि यह धारणा भी प्रबल है कि आडवाणी मानते हैं कि मोदी ने या तो उनका करियर समाप्त कर दिया या फिर मोदी ने पार्टी का सञ्चालन उस प्रकार नहीं किया जैसा कि आडवाणी चाहते थे, जिसपर एकाध बार आडवाणी ने खुले-आम आपत्ति भी जताई थी।

इसके अलावा आडवाणी के राम जन्मभूमि आन्दोलन से जुड़े होने के कारण मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए विपक्ष उन्हें हराने की जी-तोड़ कोशिश कर सकता है जब कि श्रीधरन जैसे व्यक्तित्त्व के मुआमले में शायद उम्मीदवार पर आम सहमति बन जाए। हालांकि आज की राजनीति में मर्यादा का ख़याल अक्सर नहीं रखा जाता, राष्ट्रपति पद की गरिमा को ध्यान में रखते हुए यह माना जाता है कि सर्वसम्मति से चुना गया प्रत्याशी शालीनता का उदाहरण स्थापित करता है, जो कि वांछित है।

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