Sunday 28 February 2021
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उद्धव ठाकरे से पहले 7 नेता बिना विधायक बने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे

उद्धव ठाकरे से पहले एआर अंतुले से पृथ्वीराज चव्हाण तक ऐसे सात मुख्यमंत्री हुए, जिनमें से तीन ने बाद में चुनाव जीता और चार विधान परिषद के रास्ते आए

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Politics India उद्धव ठाकरे से पहले 7 नेता बिना विधायक बने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री...

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे गुरुवार शाम को उन सात नेताओं की लीग में शामिल होंगे जिन्हें महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री का पद मिला था जब वे राज्य विधान सभा या परिषद के सदस्य नहीं थे — एआर अंतुले, वसंतदादा पाटिल, शिवाजीराव निलंगेकर-पाटिल, शंकरराव चव्हाण, सुशीलकुमार शिंदे और पृथ्वीराज चव्हाण।

तत्कालीन कांग्रेस नेता और वर्तमान एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी इन नेताओं में से एक हैं। गुरुवार शाम यहां शिवाजी पार्क में मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले 59 वर्षीय ठाकरे आठवें ऐसे नेता बन जाएंगे।

संविधान के प्रावधानों के अनुसार कोई भी नेता जो विधानसभा या परिषद का सदस्य नहीं है, उसे पद की शपथ लेने के छह महीने के भीतर विधायिका का सदस्य बनना होता है।

अंतुले राज्य के पहले ऐसे नेता बने जब उन्होंने जून 1980 में मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

फरवरी 1983 में सांसद के रूप में इस्तीफा देने के बाद वसंतदा पाटिल ने पद पर कब्ज़ा कर लिया।

निलंगेकर-पाटिल जून 1985 में मुख्यमंत्री बने, जबकि तत्कालीन केंद्रीय मंत्री शंकरराव चव्हाण ने मार्च 1986 में राज्य में शीर्ष पद प्राप्त किया।

नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली सरकार में रक्षा मंत्री रहे पवार को मार्च 1993 में सुधाकरराव नाइक को मुंबई में हुए दंगों के बाद पद से हटा दिया गया था।

इसके अलावा मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में मंत्री रहे पृथ्वीराज चव्हाण नवंबर 2010 में अशोक चव्हाण की जगह राज्य के मुख्यमंत्री बने।

अंतुले, निलंगेकर-पाटिल और शिंदे ने मुख्यमंत्री बनने के बाद विधानसभा उपचुनाव लड़ा और विजयी हुए।

अन्य चार नेताओं ने विधान परिषद के सदस्य बनकर संवैधानिक प्रावधान को पूरा किया।

उद्धव ठाकरे आज शाम दादर के शिवाजी पार्क में सीएम पद की शपथ लेंगे जहां उनकी पार्टी प्रत्येक वर्ष पारंपरिक दशहरा रैली आयोजित करती है। इस बार के विधानसभा चुनाव से पहले ठाकरे परिवार से कोई चुनावी मैदान में उतरा नहीं था। परिवार से बाहर जब भी सेना के किसी नेता पर ठाकरे परिवार ने भरोसा किया, उसने परिवार का भरोसा तोड़ा। दूसरी तरफ़ महाराष्ट्र में लगातार शिव सेना की पैंठ कम हो रही थी। इन दोहरी समस्याओं से निपटने के लिए इस बार उद्धव ने अपने पुर आदित्य को चुनावी मैदान में उतरा। आदित्य मुंबई के वर्ली से चुनाव जीते भी, परन्तु NCP व कांग्रेस को इतनी अल्प आयु का मुख्यमंत्री मंज़ूर नहीं था जबकि भाजपा से सेना का नाता टूट चुका था। इसलिए उद्धव को प्रत्यक्ष राजनीति में उतरना पड़ा।

1962 से आज तक ये नेता महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने, जिनमें शरद पवार की बारी तीन बार आई — यशवंतराव चव्हाण, मारोतराव कन्नमवार, पी. के. सावंत, वसंतराव नाईक, शंकरराव चव्हाण, वसंतदादा पाटील, शरद पवार, अब्दुल रहमान अन्तुले, बाबासाहेब भोसले, वसंतदादा पाटील, शिवाजीराव पाटील निलंगेकर, शंकरराव चव्हाण, शरद पवार, सुधाकरराव नाईक, शरद पवार, मनोहर जोशी, नारायण राणे, विलासराव देशमुख, सुशील कुमार शिंदे, विलासराव देशमुख, अशोक चव्हाण, पृथ्वीराज चव्हाण, देवेन्द्र फडणवीस।

सन 1960 तक महाराष्ट्र बना नहीं था. तब तक इस क्षेत्र को बॉम्बे प्रेज़िडेंसी के नाम से जाना जाता था जिसमें 15 अगस्त 1947 से 1962 तक मुख्यमंत्री थे — बाळासाहेब गंगाधर खेर, मोरारजी देसाई और यशवंतराव चव्हाण।

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