भारतीय कार्रवाई के डर से PoK में 4 आतंकी कैम्प बंद

16 मार्च को पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर के निकियाल में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया जिसमेें आईएसआई के प्रतिनिधि और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी अशफाक बरवाल शामिल थे

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Terror camps

1. पीओके में 4 आतंकी कैंप भारत द्वारा कार्रवाई के डर से बंद कर दिए गए हैं

2. पाकिस्तान संघर्ष विराम उल्लंघन के बाद आतंकवादी भारतीय प्रतिशोध की आशंका जता रहे हैं

3. आतंकी शिविरों की पहचान लश्कर-ए-तैयबा के रूप में की गई है

नई दिल्ली — भारतीय और पाकिस्तानी बलों के बीच बढ़ती झड़पों के बीच भारतीय सेना द्वारा कार्रवाई के डर से पाकिस्तान ने अपने कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकी शिविरों को बंद करने के लिए कहा है।

खुफिया जानकारी के आधार पर तथा तकनीकी निगरानी के तहत एजेंसियों ने बताया कि 16 मार्च को राजौरी के विपरीत पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर के निकियाल में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया जिसमेें आईएसआई के प्रतिनिधि और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी अशफाक बरवाल शामिल थे।

भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तानी चौकियों को निशाना बनाने और पाकिस्तान द्वारा संघर्ष विराम उल्लंघन के प्रतिशोध में आतंकी शिविरों को निशाना बनाने के बीच क्षेत्र में आतंकवादी शिविरों को बंद करने के निर्देश दिए गए।

सुंदरानी और राजौरी के विपरीत कोटली और निकियाल क्षेत्र में आतंकवादियों के शिविर और कार्यालय भी बंद कर दिए गए हैं।

जिन चार आतंकी कैंपों को बंद किया गया है वे लश्कर के अशफाक बराल के नियंत्रण में थे।

दो अन्य जैश-ए-मोहम्मद शिविर पाला और बाग क्षेत्र में हैं जबकि कोटली में एक और हिजबुल मुजाहिदीन द्वारा चलाया जा रहा था।

नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर 14 फरवरी को पुलवामा आतंकी हमले के बाद से पाकिस्तान द्वारा संघर्ष विराम उल्लंघन बढ़ा है।

2019 में 634 युद्धविराम उल्लंघन हुए हैं जबकि पिछले साल 1,629 युद्धविराम उल्लंघन हुए थे।

पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान मारे गए थे। इसके बाद से आतंकवाद-रोधी अभियान तेज़ हो गए हैं। इस साल मारे गए 57 आतंकवादियों में से 29 को 14 फरवरी के बाद मौत के घाट उतारा गया।

पुलवामा हमले के बारह दिन बाद भारतीय वायु सेना (IAF) ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े आतंकी शिविर में से एक को नष्ट करने के लिए गैर-सैनिक हवाई हमले किए जिसमें 300 आतंकवादियों के ढेर होने की संभावना बताई जाती है।