Thursday 26 November 2020
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स्वास्थ्य मंत्रालय में सरकारी नौकरी के झाँसे में 27,000 लोग

नौकरी के इच्छुक लोगों ने विज्ञापित नौकरियों में आवेदन करने के लिए फीस के रूप में लगभग 400 से 500 रुपये का भुगतान किया था

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Crime स्वास्थ्य मंत्रालय में सरकारी नौकरी के झाँसे में 27,000 लोग

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने एक फ़र्ज़ी रोज़गार गिरोह का भंडाफोड़ कर ऐसे पाँच लोगों को गिरफ़्तार किया है जो वेबसाइट के माध्यम से सरकारी नौकरी दिलाने के बहाने लोगों को ठगता था। यह गिरोह अब तक क़रीब 27 हज़ार लोगों को ठग चुका है।

पुलिस ने बताया कि संदिग्धों के यहाँ से तीन लैपटॉप और सात फ़ोन बरामद किए गए हैं। इसके साथ ही रु० 49,00,000 के साथ एक बैंक खाते को भी ज़ब्त किया गया है। अभियुक्तों ने इस साल 1 अक्टूबर तक लगभग 27,000 से अधिक लोगों से रु० 1.09 करोड़ से अधिक की ठगी की थी।

नौकरी के इच्छुक व्यक्ति की ओर से साइबर सेल को इस बारे में शिकायतें मिलने के बाद यह घोटाला सामने आया था। ठगों ने इन लोगों को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के “स्वास्थ्य एवं जन कल्याण संस्थान” के नाम से बनाई गई एक नक़ली वेबसाइट के ज़रिए सरकारी नौकरी दिलाने का झाँसा दिया था, जिस पर उन्होंने आवेदन किया था। पुलिस ने कहा कि धोखाधड़ी के शिकार हुए इन लोगों ने यह सोचकर विभिन्न नौकरी के लिए ऑनलाइन फ़ीस का भुगतान किया था कि सरकारी नौकरी की पेशकश करने वाली यह एक असली वेबसाइट है।

शिकायत मिलने पर प्राथमिक जाँच के बाद धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया गया और आधिकारिक पड़ताल शुरू हुई। साइबर सेल ने कहा कि तकनीकी जाँच के आधार पर हरियाणा के हिसार में बैठे फर्जी वेबसाइट का संचालन करने वाले मास्टरमाइंड की पहचान की गई।

जाँच के दौरान यह भी पता चला कि वेबसाइट ने हज़ारों नौकरीपेशा लोगों को ठगा था और गिरोह के सदस्य हिसार में एटीएम से पैसे निकाल रहे थे। संदिग्धों ने अब तक 15 लाख से अधिक एसएमएस भेजे हैं, जिसके कारण 27,000 से अधिक लोग इस छल का शिकार बने थे। इस फ़र्ज़ी वेबसाइट पर अकाउंटेंट, यूडीसी, एलडीसी, एएनएम, लैब अटेंडेंट, एम्बुलेंस ड्राइवर से लेकर 13,000 से अधिक नौकरियां पोस्ट की गई थीं। नौकरी के इच्छुक लोगों ने विज्ञापित नौकरियों में आवेदन करने के लिए फ़ीस के रूप में लगभग 400 से 500 रुपये का भुगतान किया था।

साइबर सेल ने कहा कि बैंक के एक एटीएम से पैसे निकालते समय गिरोह के एक सदस्य अमन खाटकर को गिरफ़्तार किया गया था, जिस खाते में वेबसाइट के पेमेंट गेटवे से पैसे ट्रांसफर किए जा रहे थे। इसके बाद गिरोह के अन्य सदस्यों को भी हरियाणा और दिल्ली के विभिन्न हिस्सों से जल्द ही पकड़ लिया गया।

आरोपियों की पहचान रामधारी, अमनदीप खटकरी, सुरेंद्र सिंह, संदीप और जोगिंदर सिंह के रूप में हुई है। हिसार के 50 वर्षीय रामधारी की पहचान इस गिरोह के मास्टरमाइंड और प्रमुख साजिशकर्ता के रूप में हुई है। वह दिल्ली में एक ऑनलाइन परीक्षा केंद्र भी चलाता है।  

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