नई दिल्ली— उ.प्र.भाजपा के 21 विधायकों को वाट्सएप संदेश के माध्यम से धमकी मिली है। जो संदेश मिल रहे हैं उनमें 10 लाख रुपये की व्यवस्था करो| हमारे लोग आप से दूर नहीं हैं| तीन दिन का समय दिया जा रहा है, नहीं देने में मार दिया जाएगा, जैसे वाक्य लिखे होते हैं। जिन विधायकों, नेताओं के फोन पर ये संदेश आये हैं, सभी भाजपा के हैं। शुरूआत पश्चिम उ.प्र. के विधायक से हुई।

इसके बारे में इंडियन एक्सप्रेस समूह के गुजराती अखबार ‘समकालीन’ के संपादक रहे हरि देसाई का कहना है कि मुंबई में सेठों, उद्योगपतियों को इस तरह की धमकी किसी प्रापर्टी विवाद में, किसी बड़े सौदे में, कोई फिल्म अपने चहेते कलाकारों-हीरोइनों को काम दिलाने के लिए दुबई से दाऊद के धमकी वाले संदेश आते थे। कभी-कभार किसी अन्य गैंग से भी इस तरह की धमकी / संदेश आते थे।

अपहरण करके फिरौती वसूलने वाले गैंग भी इस तरह की धमकी देते हैं। लेकिन अब तक इतने बड़े स्तर पर वह भी 21 विधायकों को और विधायक भी भाजपा के, उ.प्र. के, जहां भाजपा की सरकार है, जहां योगी आदित्यनाथ जैसे कड़क मुख्यमंत्री हैं, जहां से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सांसद हैं (उ.प्र. के वाराणसी संसदीय क्षेत्र से) , जहां से केन्द्रीय गृह मंत्री सांसद हैं (उ.प्र.की राजधानी लखनऊ से), जहां से केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेतली राज्य सभा सांसद हैं, धमकी मिल रही है।

पुलिस-प्रशासन अभी तक वाट्सएप पर धमकी वाला संदेश देने वाले को पकड़ नहीं पाया, उसका पता नहीं लगा पाया ,यह तो बहुत अचरज की बात है। क्योंकि, अपने अति सावधान व देश व व्यक्ति की सुरक्षा के लिए 24 घंटे सतर्क प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राज में भी अभी तक इस तरह की धमकी देने वाले को पकड़ा नहीं जा सका, यदि वह विदेश में है तो उसका पता लगा कर उस देश से कड़ा विरोध दर्ज कराकर उसको गिरफ्तार नहीं कराया जा सका, यह भी अचरज की बात है।

जानकार बताते हैं कि नरेन्द्र भाई ऐसे मामले में किसी को छोड़ते नहीं हैं। वैसे तो इस तरह की धमकी देने वालों से निपटने में सत्ताधारी विधायक ही सक्षम हैं। अब तो ज्यादातर विधायक दबंग होते हैं। बहुतों पर तो कई-कई तरह के केस भी दर्ज होते हैं। इसलिए यह सुनकर अचरज हो रहा है कि सत्ताधारी विधायकों को धमकी मिल रही है।

एक आशंका और भी हो रही है, 28 मई 2018 को नूरूपुर विधानसभा व कैराना लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हैं। दोनों ही सीटें पश्चिम उ.प्र. के मुस्लिम जनसंख्या वाले इलाके में हैं। इसके मद्देनजर भी इस तरह की धमकी की जांच कराई जानी चाहिए। क्योंकि धमकी से हिन्दू-मुस्लिम वोट पोलराइज करने की संभावना बढ़ जाएगी। पहले भी ऐसे उपक्रम होते रहे हैं। यदि प्रशासन सतर्क नहीं रहे तो दंगे भी हो जाते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार