हरियाणा के सोनीपत के 20 गांवों में महिला-पुरुष अनुपात में बड़ी छलांग

सेक्स-आँकलन टेस्ट रैकेट पर नकेल कसना, नवजात शिशुओं का शत-प्रतिशत पंजीकरण, सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था और भ्रूण हत्या जैसी बुराइयों के ख़िलाफ़ जागरुकता पैदा करना सहित कई क़दम उठाना इन दिनों संभव हो गया है

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सोनीपत — हरियाणा के सोनीपत ज़िले में प्रति 1,000 पुरुषों पर महिलाओं के बराबर या अधिक संख्या पंजीकृत करने वाले 20 गांवों में लिंगानुपात में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

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सोनीपत के गाँव का अनुकरणीय उदाहरण

जनवरी में पुरखास को ज़िले का सर्वश्रेष्ठ गांव घोषित किया गया था जहाँ एक सर्वेक्षण में पाया गया कि जनसंख्या में प्रति 1,000 पुरुषों के मुकाबले 1,327 महिलाएँ हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस उपलब्धि के लिए रु० 1.5 लाख का पुरस्कार देने का फ़ैसला किया है।

डॉ० जे०एस० पुनिया, सिविल सर्जन, सोनीपत, ने मंगलवार को कहा कि ज़िले में 20 गांव थे जहाँ लड़कियों की संख्या या तो बराबर थी या लड़कों की तुलना में अधिक थी। इनमें मलिकपुर (1,304), गोहाना शहर (1,224), बेगा (1,135), ख़ानपुर (1,130), पांची जाटान (1,128), भैंसवाल कलां (1,125) और खरखौदा शहर (1,101) शामिल थे।

‘बेटी बचाओ, बेटी पढाओ’ कार्यक्रम के कार्यान्वयन में सराहनीय प्रदर्शन के लिए ज़िले को 2018 में प्रधानमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया था, यह याद करते हुए, डॉ० पुनिया ने कहा कि 2014 में प्रति 1,000 लड़कों पर 830 लड़कियों का लिंगानुपात 2018 में 930 लड़कियों का हो गया था।

हरियाणा की एम०एल० खट्टर सरकार को जानकर ख़ुशी होगी कि डॉ० पुनिया ने कहा है कि सेक्स-आँकलन टेस्ट रैकेट पर नकेल कसना, नवजात शिशुओं का शत-प्रतिशत पंजीकरण, सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था और भ्रूण हत्या जैसी बुराइयों के ख़िलाफ़ जागरूकता पैदा करना सहित कई क़दम उठाना इन दिनों संभव हो गया है।

बाल लिंगानुपात में केवल हरियाणा की दशा ख़राब नहीं थी

बाल लिंग अनुपात भारत के सभी पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में सामान्य प्राकृतिक सीमा के भीतर है, लेकिन कुछ पश्चिमी और विशेष रूप से उत्तर-पश्चिमी राज्यों जैसे कि महाराष्ट्र, हरियाणा, जम्मू और कश्मीर में काफी अधिक है — 2011 तक के आँकड़ों के अनुसार क्रमशः 118, 120 और 116; वहीं पश्चिमी राज्यों महाराष्ट्र और राजस्थान 2011 की जनगणना में 113, गुजरात में 112 और उत्तर प्रदेश में 111 पर बाल लिंगानुपात पाया गया।

कल और आज

ऐल्स्टन मार्गरेट की किताब विमेन, पोलिटिकल स्ट्रगल्स एंड जेंडर इक्वालिटी इन साउथ एशिया के मुताबिक़ हरियाणा में एक क्षेत्र के अध्ययन से पता चला था कि 9,000 से अधिक विवाहित महिलाओं को अन्य भारतीय राज्यों से आयातित दुल्हन के रूप में ख़रीदा जाता है। इस अधिनियम के परिणामस्वरूप हरियाणा, राजस्थान और पंजाब के कुछ क्षेत्रों में परिवार के सदस्यों द्वारा पत्नी-साझाकरण और बहुपत्नीकरण भी होता है, जो लिंग असंतुलन को बनाए रखता है — यदि किसी परिवार को यह लगे कि घर में केवल एक महिला काफ़ी है। उदाहरण के लिए, दक्षिण भारत में नीलगिरि पहाड़ियों की बहुपत्नीक टोडा समुदाय ने एक निश्चित जनसांख्यिकीय असंतुलन को बनाए रखने के लिए कन्या भ्रूण हत्या का अभ्यास किया करता था।

हरियाणा में उच्च वर्ग के परिवारों में भ्रूण हत्या और शिशु हत्या की उच्च दर हुआ करती थी। पूर्व सरकारों के संवेदीकरण कार्यक्रम इन परिवारों को सामाजिक शिक्षा का लक्ष्य नहीं बनाते थे।

हरियाणा में एक अध्ययन में पाया गया कि उच्च जाति की महिलाओं के लिए जन्म के समय लिंगानुपात 100 महिलाओं के लिए 127 पुरुषों का था, जबकि निचली जाति की महिलाओं के साथ अनुपात 102 का था। जबकि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रान्सफ़र या नक़द हस्तांतरण कार्यक्रम ने लड़कियों के लिए स्कूल नामांकन और प्रतिरक्षण दरों में सफलतापूर्वक सुधार किया, इन कार्यक्रमों ने सीधे तौर पर बेटों के लिए माता-पिता की मांग और लिंग-भेद लिंग चयन जैसी समस्याओं का निराकरण नहीं किया। स्थिति में सुधार धीरे-धीरे हुआ।

अब हरियाणा पंजाब से कहीं बेहतर

पर अब लगभग तीन वर्षों से, हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग की टीमें पंजाब में अवैध लिंग निर्धारण करने वाले अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर छापे मार रही हैं। जब कि पंजाब की स्थिति में ऐसा कोई सुधार देखने को नहीं मिला।

जुलाई 2015 और सितंबर 2018 के बीच हरियाणा सरकार की कोशिशों से पंजाब में लिंग निर्धारण के 30 मुआमले सामने आए, जबकि पंजाब सरकार की अपनी कोशिश से केवल 7 मुआमलों से पर्दा हटा।

मार्च 2018 में राजस्थान की एक टीम ने प्री-कंसेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (प्रोहिबिशन ऑफ सेक्स सिलेक्शन) एक्ट, 1994, के तहत पंजाब के फ़िरोज़पुर के तीन लोगों को ग़ैरक़ानूनी व्यवहार करने के आरोप में गिरफ़्तार किया।

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