Thursday 5 August 2021
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मथुरा आश्रम में 2 साधुओं की विषैले दूध की चाय पीकर मृत्यु

मृतकों में से एक के भाई ने आरोप लगाया है कि आश्रम के भीतर घटनास्थल से विष का दुर्गंध आ रहा है और षड़यंत्र के तहत साधुओं की हत्या हुई है

उत्‍तर प्रदेश की तीर्थनगरी मथुरा के गोवर्धन क़स्बे के वन में बने आश्रम में संदिग्‍ध हालात में दो साधुओं की मौत और एक साधु के गंभीर रूप से अस्वस्थ होने की खबर से हड़कंप मचा हुआ है। कल मामले की जानकारी मिलते ही डीएम और एसएसपी सहित पुलिस बल घटनास्थल पर पहुँच गया और शवों को क़ब्ज़े में लेकर पोस्‍टमॉर्टम के लिए भेज दिया।

गंभीर रूप से बीमार साधु की चिकित्सा हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया। आश्रम में ही उपलब्ध गाय के दूध से चाय बनाकर इन लोगों ने पी थी, जिसके बाद यह घटना हुई है। एक साधु के भाई ने विष देकर हत्‍या करने का आरोप लगाया है।

गोवर्धन के गिरिराज उद्यान के पीछे एक आश्रम में तीन साधु पिछले एक साल से आश्रम बनाकर भजन-साधना कर रहे थे। शनिवार 21 नवंबर सुबह लगभग 10 बजे आश्रम में जैसे ही दो साधुओं की मृत्यु की सूचना मिली, पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया।

दो साधुओं ― गोपाल दास और श्याम सुंदर दास ― के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। रामबाबू दास को गंभीर अवस्‍था में ज़िला अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया, जहाँ उनकी अवस्था चिंताजनक बताई जा रही है। मृतक साधु गोपाल दास के भाई टीकम ने आरोप लगाया है कि साधुओं की विष देकर हत्या की गई है और आश्रम में विषैली औषधियों का दुर्गंध आ रहा है। वहीं एसएसपी ने कहा कि इस मामले में वीडियोग्राफी कराकर पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा।

पुलिस के अधिकारियों ने घटनास्थल पर पहुँचकर लोगों से बातचीत की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि साधुओं को किसी षड़यंत्र के अंतर्गत विष दिया गया है और उनकी हत्या की गई है। घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में भय का वातावरण है। एसएसपी ने कहा कि इस मामले में वीडियोग्राफी कराकर पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। पुलिस टीम ने आश्रम में मिले खाद्य पदार्थों के नमूने लिए हैं। चाय में मिलाए गए दूध तथा अन्य सामान के भी सैम्पल्स लिए हैं। एसएसपी ने कहा कि पुलिस पूरे घटना की जाँच कर रही है।

पिछले दिनों महाराष्ट्र के पालघर में हुई संतों की हत्या मामले के पश्चात औरंगाबाद से एक और संत पर आक्रमण की घटना सामने आई थी। बताया गया था कि संत प्रियशरण महाराज पर ज़िले के चौक परिसर के लाडसावंगी मार्ग पर स्थित उनके आश्रम में घुसकर हमला किया गया। हमलावर 7-8 की संख्या में थे। इन्होंने आश्रम में घुसने के लिए पहले उसकी कड़ी तोड़ी और फिर संत से मारपीट करके उनके कंधे पर चाकू से वार भी किया था। 

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