Wednesday 26 January 2022
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राजस्थान के दो बच्चों ने लॉकडाउन के दौरान लिख दी 2,100 पन्नों की रामायण

राजस्थान के जालौर में तीसरी और चौथी कक्षा में पढ़ने वाले माधव जोशी और उनकी बहन अर्चना ने लॉकडाउन के दौरान 2100 से अधिक पेजों की संपूर्ण रामायण का लेखन किया है

कोरोनावायरस के कारण जब बीते वर्ष पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया था तो सभी लोग अपने घरों में बंद रहने के लिए बाध्य हो गए थे। इस दौरान लोगों ने दूरदर्शन पर प्रसारित रामायण बहुत ही रूचि के साथ देखी। राजस्थान के जालौर में तीसरी और चौथी कक्षा में पढ़ने वाले माधव जोशी और उनकी बहन अर्चना ने लॉकडाउन के दौरान 2100 से अधिक पृष्ठों की संपूर्ण रामायण का लेखन किया है।

भाई-बहन माधव और अर्चना ने कोरोनावायरस की अवधि में पूरी रामायण स्वयं कलम और पेंसिल से लिखी है। इसके लिए उन्होंने 20 कॉपियों का प्रयोग किया जिसके बाद 2100 से अधिक पन्नों की रामायण तैयार हो गई।

दोनों बच्चों ने सात भागों में इसे पूरा किया है। रामचरितमानस सात कांड में है। माधव और अर्चना ने अपनी कॉपियों में सातों कांड को पेन पेंसिल से लिखा है। ये सात कांड बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड, किष्किंधा कांड, सुंदर कांड, लंका कांड और उत्तर रामायण हैं।

इसमें से माधव ने 14 कॉपियों में बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड और उत्तरकांड लिखा है। छोटी बहन अर्चना ने 6 कॉपियों में किष्किंधा कांड, सुंदर कांड और लंका कांड को लिखा है। माधव जोशी ने बताया कि कोरोना में दूरदर्शन पर प्रसारित रामायण देख कर रामायण पढ़ने की इच्छा हुई।

पहले परिवार के साथ और तद्पश्चात भाई बहन ने रामचरितमानस का तीन बार पठन किया। इसी दौरान पिता संदीप जोशी के प्रोत्साहन से इनमें रामायण लिखने की इच्छा जागृत हुई। ये दोनों बच्चे जालौर, राजस्थान में आदर्श विद्या मंदिर विद्यालय में पढ़ते हैं। अर्चना तीसरी में पढ़ती है और माधव चौथी कक्षा का छात्र है। इन्हें रामायण की पूरी जानकारी हो गई है। दोनों बच्चों को रामचरितमानस में दोहे, छंद, चौपाइयां कितनी हैं, यह भी कंठस्थ हो गया है।

आदर्श विद्या मंदिर के प्रधानाध्यापक सत्यजीत चक्रवर्ती बताते हैं कि इससे बच्चों का संस्कृति और इतिहास से जुड़ाव होता है। लेखन में सुधार और पढ़ने-लिखने का प्रभाव भी बच्चों पर पड़ता है। दोनों भाई-बहन ने कोरोना काल के 8 माह में रामायण लिखी और रामायण लिखने का कार्य मार्गशीर्ष पूर्णिमा को पूरा किया। संयोग से 550 वर्ष पहले जालोर के इतिहास की महत्वपूर्ण पुस्तक कान्हड़ दे प्रबंध का लेखन पंडित पद्मनाथ ने मार्गशीर्ष पूर्णिमा को ही पूरा किया था।

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