Thursday 21 October 2021
- Advertisement -
HomeEconomy'मोदी के नेतृत्व में सुधरेगी भारत की आर्थिक स्थिति'

‘मोदी के नेतृत्व में सुधरेगी भारत की आर्थिक स्थिति’

|

गले 5 वर्षो के दौरान भारत की आर्थिक स्थिति अन्य तमाम विकासशील देशों के मुक़ाबले बेहतर हो सकती है। जापान की ब्रोकरेज फ़र्म नोमुरा ने गुरुवार को ऐसी संभावना जताई।

1280px-Nomura Securities head officeनोमुरा के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकास समर्थक रहे हैं, लिहाज़ा उनके नेतृत्व वाली सरकार आर्थिक मोर्चे पर सही फ़ैसले कर सकती है। इसके अलावा रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की नीतियाँ और कार्यशैली भी आर्थिक मज़बूती की ओर ले जाएंगी।

नोमुरा की एक रिपोर्ट में कहा गया है, “आम चुनाव में मोदी की शानदार जीत और आरबीआई की कमान रघुराम राजन के हाथों में जाना भारत की काया पलटने वाली परिघटना साबित हो सकती है।” फ़र्म के मुताबिक़ यह उम्मीद करना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अगले 5 वर्षो के दौरान तमाम विकासशील देशों में भारत की स्थिति सबसे ज़्यादा मज़बूत होगी।

शानदार जुगलबंदी
नोमुरा ने एक नोट में कहा है कि आरबीआई अपनी तरफ़ से महंगाई कम करने की लगातार कोशिश कर रहा है। दूसरी तरफ़ शानदार बहुमत की बदौलत मोदी सरकार नौकरशाही की बाधाएँ कम कर रही है और आपूर्ति से जुड़े सुधारों की राह परतेज़ी से आगे बढ़ रही है।

वास्तविक निवेश बढ़ने के आसार
सरकार और रिजर्व बैंक जिस तरह की नीतियाँ लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, यदि उन्हें प्रभावी तरीक़े से अमल में लाया जाता है तो वास्तविक निवेश 10% के हिसाब से बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में आर्थिक विकास दर 7% से ऊपर पहुँच सकती है। यदि निवेश बढ़ने की गति 15% तक पहुँचती है तो आर्थिक विकास दर 8% हो जाएगी। बावजूद इसके कि पिछले 2 वित्त वर्षो से विकास दर 5% से कम है।

बुनियादी ढांचे में अपार संभावनाएँ
देश की क़रीब आधी आबादी 25 वर्ष से कम उम्र की है। इनमें से क़रीब 70% का शहरीकरण नहीं हुआ है। इसके लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचे की ज़रूरत होगी। एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2017 तक इसके लिए 1 खरब डॉलर की दरकार होगी।

ज़रूरतें पूरी कर सकता है जापान
फ़र्म का मानना है कि भारत और जापान के बीच आपसी सहयोग की काफ़ी संभावना है। फ़र्म ने दोनों देशों को साथ मिलकर काम करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। रिपोर्ट में कहा गया है, “संभवत: जिस किसी चीज की भी भारत को ज़रूरत होगी, जापान उनकी पेशकश कर सकता है।

Sirf News needs to recruit journalists in large numbers to increase the volume of its reports and articles to at least 100 a day, which will make us mainstream, which is necessary to challenge the anti-India discourse by established media houses. Besides there are monthly liabilities like the subscription fees of news agencies, the cost of a dedicated server, office maintenance, marketing expenses, etc. Donation is our only source of income. Please serve the cause of the nation by donating generously.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

- Advertisment -

Now

Columns

[prisna-google-website-translator]