मानेकशॉ की 105 वीं जयंती पर प्रथम भारतीय फील्ड मार्शल को श्रद्धांजलि

फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ ने युद्ध की ऐसी रणनीति तैयार की जिससे पाकिस्तान सेना 1971 के युद्ध में जल्द ही आत्मसमर्पण के लिए मजबूर हो गई

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मानेकशॉ

नई दिल्ली | पाकिस्तान के साथ 1971 के युद्ध में भारत की जीत के श्रेय के अधिकारी फील्ड मार्शल सैम होर्मूसजी फ्रामजी जमशेदजी मानेकशॉ बुधवार को 105 साल के हो गए होते। अपने उपनाम सैम से प्रसिद्ध फील्ड मार्शल मानेकशॉ भारतीय सेना के आठवें प्रमुख थे। सेना के सबसे प्रसिद्ध जनरलों में से एक नाम उनका है।

3 अप्रैल 1914 को अमृतसर में जन्मे फील्ड मार्शल मानेकशॉ ने अपनी स्कूली शिक्षा शेरवुड कॉलेज, नैनीताल, से की। वह भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), देहरादून, के अग्रदूतों में से एक थे। फील्ड मार्शल मानेकशॉ 1 अक्टूबर 1932 को भारतीय सैन्य अकादमी में शामिल हुए और उन्हें 1934 में द्वितीय लेफ्टिनेंट के रूप में ब्रिटिश भारतीय सेना में कमीशन किया गया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मानेकशॉ को उनकी वीरता के लिए सैन्य क्रॉस से सम्मानित किया गया था।

1947 के विभाजन के बाद फील्ड मार्शल मानेकशॉ को 16 वीं पंजाब रेजिमेंट को सौंप दिया गया। उन्होंने जम्मू और कश्मीर के अभियानों के दौरान वीरता और युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया जब पाकिस्तानी सेना ने अफगान लड़ाकों के साथ कश्मीर पर हमला किया। नागालैंड में उग्रवाद से निपटने के लिए उन्हें 1968 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

COAS बनने के बाद मानेकशॉ को पूर्व में पाकिस्तान की आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए योजना तैयार करने का काम दिया गया। उन्होंने युद्ध की ऐसी रणनीति तैयार की जिससे पाकिस्तान सेना आत्मसमर्पण के लिए मजबूर हो गई। इस तरह बांग्लादेश के गठन में उन्होंने एक अहम भूमिका निभाई। 1971 के युद्ध में 90,000 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया।

1972 में मानेकशॉ को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। 1 जनवरी 1973 को वह फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत होने वाले भारतीय सेना के पहले जनरल बने। 39 साल तक सेवा करने के बाद फील्ड मार्शल मानेकशॉ भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हो गए।

सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वह अपनी पत्नी के साथ तमिलनाडु के कुन्नूर में बस गए। 27 मार्च 2008 को फील्ड मार्शल सैम होर्मुसजी फ्रामजी मानेकशॉ का निधन हो गया।

फील्ड मार्शल मानेकशॉ को उनके मिलनसार स्वभाव के लिए भी जाना जाता था। 16 दिसंबर 2008 को सैम मानेकशॉ पर तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा 1971 के भारत-पाक युद्ध की 37 वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक डाक टिकट जारी किया गया था।